देश विरोधी नारे लगाने वाले कहां हैं?

By: | Last Updated: Thursday, 10 March 2016 5:26 PM
JNU row: where are those who delivered anti-national slogans?

नई दिल्ली: जेएनयू विवाद को शुरू हुए एक महीना पूरा हो चुका है. पिछले महीने 9 तारीख को जो जेएऩयू में हुआ उसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था. छात्र संघ का अध्यक्ष कन्हैया गिरफ्तार भी हुआ और जमानत पर बाहर भी आ गया. लेकिन इन सबके बीच सबसे अहम सवाल ये बना हुआ है कि 9 फरवरी के दिन कुछ नकाबपोश लोग भी वीडियो में नारे लगाते दिखाई दे रहे थे वो कहां गए, उनका क्या हुआ? क्या उनकी पहचान की गई क्या उनसे पूछताछ की गई या फिर उमर खालिद और अनिर्बान की गिरफ्तारी के बाद सारा मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

देश के खिलाफ नारे लगाने वाली इस भीड़ में कुछ चेहरे थे जो ढके हुए थे. कुछ आवाजें थी जो देश विरोधी नारे लगा रही थीं. एक महीना होने को आया लेकिन इन आवाजों और इन ढके हुए चेहरों का कोई अता-पता नहीं है.

ठीक एक महीने पहले 9 फरवरी को दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी कैंपस में देश विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा था. एफआईआर हुई और छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया को गिरफ्तार कर लिया गया. जेएनयू विवाद ने पूरे देश को देशभक्त बनाम देशद्रोही के बीच बांट दिया था

JNU 5 JNU

कैंपस में लगे नारों की आवाज देश के हर कोने में चर्चा बन गई थी. 20 दिन तक जेल में रहने के बाद कन्हैया 6 महीने की अंतरिम जमानत पर वापस जेएनयू कैंपस लौट आया है और देशद्रोह के आरोपी छात्र उमर खालिद और अनिर्बान ने पुलिस के सामने सरेंडर भी कर दिया. लेकिन गायब हैं वो चेहरे जो मुंह ढके हुए कैंपस में दिखाई दिए थे और अब तक गायब हैं.

जेएनयू की जांच कमेटी ने कहा था कि नारे लगाने वाले जेएनयू के छात्र नहीं थे कुछ बाहरी लड़को ने नारे लगाए थे, इसकी रिपोर्ट और कुछ फोटो भी जेएनयू ने दिल्ली पुलिस को सौपे थे. लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई. इस मामले को देख रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के सूत्रो का कहना है कि जो लड़के नकाब और बिना नकाब के ऐसे नारे लगा रहे थे उनमे से ज्यादातर का संबंध कश्मीर से है , लेकिन जब तक पूरे सबूत नही जुटा लिए जाते तब तक गिरफ्तारी नहीं की जाएगी.

विपक्षी पार्टी भी पुलिस के ऊपर आरोप लगा रही है कि पहचान के बाद भी पुलिस कश्मीरी लड़को पर इसलिए कारवाही नहीं कर रही क्योकि पीडीपी केंद्र से नाराज हो सकती है.

कुछ ऐसे ही सवाल उठाते हुए वरिष्ठ पत्रकार मधु किश्वर ने ट्वीट किया है ‘ये सोचकर परेशान हूं कि कन्हैया की भूमिका की जांच किए बिना उसे गिरफ्तार कर लिया गया जबकि वो कश्मीरी जिन्होंने सचमुच टुकड़े टुकड़े वाले नारे लगाए वो अब तक पकड़े नहीं गए.’

असल में कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद जिस तरीके से दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर बस्सी की किरकिरी हुई थी और ग्रह मंत्री राजनाथ ने भी कह दिया था कि जो किया वो पुलिस ने किया उसके बाद से नए कमिश्नर किसी तरह का विवाद नहीं चाहते और गिरफ्तारी से पहले स्पेशल सेल को पुख्ता सुबूत जुटाने के लिए कहा गया है.

इतना कुछ हो गया लेकिन उनका अब तक कोई सुराग नहीं है जो 9 फरवरी को चीख-चीखकर देश विरोधी नारे लगा रहे थे. सवाल दिल्ली पुलिस पर भी हैं सरकार पर भी?

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Web Title: JNU row: where are those who delivered anti-national slogans?
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