पहली क्लास से गीता और महाभारत पढ़ाने की सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दवे की सलाह पर हंगामा, कांग्रेस समेत कई नेताओं ने किया विरोध

By: | Last Updated: Sunday, 3 August 2014 2:24 AM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जज ए आर दवे का विवादित बयान आया है. अहमदाबाद में जस्टिस दवे ने कहा कि अगर वह भारत के तानाशाह होते तो स्कूलों में पहली क्लास से गीता और महाभारत की पढ़ाई करवाते. जस्टिस दवे के इस बयान का जहां बीजेपी ने स्वागत किया है वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने जस्टिस दवे के इस बयान की निंदा की है.

 

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने जस्टिस दवे के इस बयान की आलोचना की है. कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा है कि जस्टिस दवे के फैसलों की समीक्षा करने की बात कही है. वहीं आम आदमी पार्टी ने जस्टिस दवे के इस बयान को आपत्तिजनक बताया है.

 

बीजेपी ने जस्टिस एआर देव के बयान का स्वागत किया है. बीजेपी नेता नलिन कोहली ने कहा है कि भारतीय संस्कृति की पुरानी चीज लागू करने में क्या बुराई है?

 

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एआर दवे ने कहा कि भारत को अपनी प्राचीन परंपराओं की ओर लौटना चाहिए. उन्होंने कहा कि महाभारत और भगवदगीता जैसे शास्त्रों को बचपन से बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए.

 

न्यायमूर्ति दवे ‘ वैश्विकरण के दौर में समसामायिक मुद्दे तथा मानवाधिकारों की चुनौतियों’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

 

उन्होंने कहा, ‘यदि मैं भारत का तानाशाह रहा होता तो मैंने पहली ही कक्षा से गीता और महाभारत को शुरू करवा दिया होता. इसी तरह से आप जीवन जीने का तरीका सीख सकते हैं. मुझे खेद है कि यदि मुझे कोई कहे कि मैं धर्मनिरपेक्ष हूं या धर्मनिरपेक्ष नहीं हूं. लेकिन यदि कुछ अच्छा है तो हमें उसे कहीं से भी ले लेना चाहिए.’

 

उन्होंने कहा, ‘यदि गुरु शिष्य जैसी हमारी प्राचीन परंपराएं रही होती तो हमारे देश में ये सब समस्याएं ‘हिंसा एवं आतंकवाद’ नहीं होता.’

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Web Title: justicedawe_controversial_statement
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