प्रेस कॉन्फ्रेंस: 'पढ़ने के दौरान मैं ऐसे लोगों को ठोकता था'

By: | Last Updated: Saturday, 30 January 2016 11:05 PM
kailash vijayvargiya in press confrence

एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम प्रेस कॉन्फ्रेंस में आज बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय हैं.

अगर नेताओं को उनके बयानों के आधार पर तौला जाए तो हमारे आज के मेहमान देश के सबसे वजनी नेताओं में से एक हैं वो कलाकार हैं लेकिन आजकल कलाकारों से ही भिड़े हुए हैं किसी के दिल के तार को पाकिस्तान से जोड़ रहे हैं तो किसी के मंगल की उनको चिंता है. प्रधानमंत्री के करीबी है लेकिन जैसे उनकी सुन नहीं रहे हैं. राजनीति के अखाड़े में अपनी अलग पहचान बना चुके बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय.

दिबांग – कैलाश जी आपका स्वागत है
विजयवर्गीय – धन्यवाद दिबांग जी
दिबांग – ये दंगल में मंगल क्या है
विजयवर्गीय – मेरा ख्याल है कि मैं जिस मोहल्ले में रहता हूं वहां अखाड़े बहुत हैं और मैं भी वहां कुश्ती लड़ा करता था तो दंगल हमारे लिए बहुत आम बात है तो कहीं पर भी हम दंगल करते रहते हैं.
दिबांग – कैलाश जी तो क्या आप ये कह रहे हैं कि आपको मालूम नहीं की दंगल नाम की एक फिल्म आ रही है.
विजयवर्गीय – फिल्म देखे मुझे सालों हो जाते हैं पर हां ये सुना जरूर है मेरे इस बयान के बाद लोगों ने कहा है की दंगल आ रही तो आपने दंगल फिल्म के बारे में कहा था तो मैंने तो नहीं कहा था लेकिन लोग समझ जाएं तो ठीक है मैं उसका बुरा नहीं मानूंगा.

दिबांग – कैलाश जी इंदौर के लोग कैलाश विजयवर्गीय को याद करते हैं हंसते थे गाते थे खाते थे खिलाते थे. काम करते थे खूब काम करते थे लेकिन अब एक नए किस्म के कैलाश विजयवर्गीय सामने आ गए हैं वो गुस्सैल हैं वो नाराज हो जाते हैं कहते हैं मुझे गुस्सा आ जाता हैं. कहते हैं सबक सिखाना पड़ेगा और लोग कह रहे हैं कि महत्वाकांक्षा का जो धुंध है उसमें पुराना कैलाश कहीं खो गया है. क्या हो गया है आपको क्या परेशानी है आखिर क्या हुआ कैलाश विजयवर्गीय के साथ ऐसा.
विजयवर्गीय – दिबांग मुझे तो नहीं लगता मेरी कोई महत्वाकांक्षा है मुझे तो मेरे हैसियत से बहुत ज्यादा दिया है पार्टी ने तो कभी इससे आगे बढ़ने के बारे में सोचता नहीं पर जहां रहता हूं वहां बहुत मेहनत से काम करता हूं. गुस्सा आता जरूर है क्योंकि एक सामान्य इंसान हूं मैं पर उतनी ही जल्दी मेरा गुस्सा चला भी जाता है.
दिबांग – जो देख रहे होंगे वो हंस जरूर रहेंगे कि एक को ठिकाने लगा दिया है तो आपका मतलब था कि शाहरुख खान और दिलवाले. दंगल का मंगल करना है तो सब अंदाजा लगा रहे हैं कि आमिर खान के फिल्म के बारे में बात कर रहे है और इसलिए बात कर रहे हैं क्योंकि असहिष्णुता वाली बात थी. आप उसको इतना घुमाए जा रहे हैं मतलब क्यों?

विजयवर्गीय – मैंने बिल्कुल नहीं घुमाया समझदार को इशारा काफी होता है आप समझदार हैं समझें.
दिबांग – आमिर खान ने भी कहा उस बयान में कि इन्होंने भारत छोड़ने की बात कभी नहीं की. उन्होंने ये भी कहा कि भारत में ही पैदा हुए हैं भारत में ही जिएंगे भारत में ही मरेंगे वो और उनकी पत्नी भारत नहीं छोड़ने वाले.
विजयवर्गीय – इस देश की राजनीति में कुछ लोग अराजनीतिक तरीके से हिस्सा ले लेते हैं पता नहीं लगता. वो होते हैं राजनीति में पर एक अलग प्लेटफॉर्म से राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं पिछले दिनों बिहार के चुनाव के वक्त यही हुआ जिस तरीके से अखलाक की मौत हुई उसके बाद जिस तरह पुरस्कार लौटाए गए वो सिर्फ बिहार के चुनाव को प्रभावित करने का हिस्सा था. उसके बाद बड़े बड़े घटनाक्रम हुए मालदा हुआ बंगाल का एक भी बुद्धिजीवी तथाकथित बुद्धिजीवी आजतक कुछ नहीं बोला मालादा की इतनी बड़ी घटना हुई उसके बाद बंगाल में दूसरा थाना जला कोई नहीं बोला अभी परसों फिर एक बालिका के साथ बलात्कार हुआ उसको जला दिया गया उसके मुंह पर एसिड डाल दिया गया एक भी महिला एक्टिविस्ट की आवाज नहीं सुनी मैंने मुझे समझ में नहीं आता कि इस देश में दोहरा चरित्र के समाज में वे लोग कहते हैं कि हम राजनीति में नहीं है लेकिन राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. इसलिए ऐसे लोगों को बेनकाब करना भी बहुत जरूरी है.

दिबांग – कैलाश जी आप खुद कलाकार हैं आप जानते हैं कि ये जो फिल्मी कलाकार होते हैं उनकी तो कोई सेना होती नहीं है हम जानते हैं बहुत सारे राजनीतिक दल मीडिया में चमकने के लिए फिल्म कलाकारों उनकी फिल्मों के पीछे पड़ जाते हैं ये एक आसान तरीका है पॉपुलेरिटी पाने का मीडिया में छाने का अपनी बात को जताने का.
विजयवर्गीय – मैं कभी इसकी चिंता नहीं करता दिबांग जी मेरा ख्याल है कि मीडिया ने जितना मेरे खिलाफ छापा है उतना देश के किसी नेता के खिलाफ नहीं छापा होगा जो मध्य प्रदेश के नेता है मध्य प्रदेश के पत्रकार हैं मध्य प्रदेश के मीडिया के लोग इस बात को अच्छी तरह जानते हैं पर मैंने कभी इसकी चिंता नहीं की सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए किसी बॉलीवुड कलाकार के पीछे भागूं इसकी आवश्यकता मैंने कभी महसूस नहीं की और ना मैं इसकी आवश्यकता समझता हूं.

सवाल – आपके बयान जो हैं वो विवाद खड़ा करते हैं और उन बयानों से कई बार आपकी पार्टी भी फंस जाती है उसको भी सफाई देनी पड़ती है और पार्टी हाई कमान को भी सवालों के घेरे में खड़ा किया जाता है तो क्या वजह है आपको पार्टी और पार्टी हाईकमान की चिंता नहीं है पार्टी का डर नहीं है या कहीं पार्टी की तरफ से इशारा भी रहता है कि आप दीजिए बयान

विजयवर्गीय – ऐसा कुछ भी नहीं है पर मुझे जो अच्छा नहीं लगता है मैं उसके बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त कर देता हूं कई बार पार्टी हाई कमान के निर्देश पर अपने बयान वापस भी ले लेता हूं ऐसा नहीं है कभी कभी गुस्से में आकर कुछ बोल जाता हूं तो सामान्य स्थिति में अपनी गलती को स्वीकार कर लेता हूं पर ये मेरा सामान्य स्वभाव है और ये स्वभाव मैं बदल नहीं सकता.

दिबांग – कोई एक बयान जो आपको याद हो आपने वापस ले लिया हो.
विजयवर्गीय – शाहरुख खान जी पर जो बयान दिया था मैं बिहार में था उस समय चुनाव के वक्त मैंने ट्वीट किया था अध्यक्ष जी का फोन आया था कि इस ट्वीट को वापस ले लो तो मैंने वापस ले लिया था.

दिबांग – पर जो आपने बयान दिया उसमें आपने कहा कि इस तरह के कपड़े पहनने चाहिए जिससे देखने वालों के निगाह में इज्जत आए आपने देखने वालों के बारे में कुछ नहीं कहा जो महिलाओँ को इस तरह देखते हैं.

kailash 2विजयवर्गीय – दिबांग जी दुर्भाग्य है इलेक्ट्रानिक मीडिया में अभी थोड़ा सा कई बार पूरा बयान नहीं दिखाया जाता है एक लाइन को पकड़कर उस पर खेला जाता है कम से कम ये इथिक्स होना चाहिए की जिसका बयान आप दिखा रहे हैं वो पूरा दिखाएं.

दिबांग – तो जो आपने महिलाओं के कपड़े के ऊपर जो बयान दिया उसमें क्या छूट गया था?

विजयवर्गीय – नहीं मैंने कहा था ये कि देखिए समाज में विकृति आई है लोगों की दृष्टि बदल गई है हमारे यहां महिलाओं को सरस्वती लक्ष्मी कहा जाता है पर कई बार हम ऐसे कपड़े पहन लेते है जिसके कारण कई बार लोगों की दृष्टि खराब हो जाती है.

दिबांग – अब तो आपने पूरा बयान दे दिया जब आप इस तरह का बयान देते हैं आप महिलाओं को उनकी सूझबूझ उनकी क्या समझ है? समाज कैसा है? आप ये समझते हैं कि उनको ये बिल्कुल नहीं आता और दूसरी तरफ जो लोग ऐसे देखते है आप उनको सुधारने की बात नहीं कहते आप उनसे नहीं कहते कि ऐसे देखोगे तो सुधारेंगे कानून है जेल जाओगे बचोगे नहीं. आप महिलाओं को उपदेश देते नजर आते हो.

विजयवर्गीय – मेरे कॉलेज के अंदर 50 फीसदी हमारे यहां लड़कियां थी कोई भी लड़का किसी लड़की को छेड़ नहीं सकता था कोई छेड़ देता था तो वहीं ठोकता था मैं तो मेरे कॉलेज में मैं इसलिए नेता था क्योंकि लड़कियां वहां सुरक्षित थी.

दिबांग – अब तो आप सबको ठोक नहीं सकते आपने कहा कि बैठ कर टीवी पर ऐड नहीं देख सकते जिस तरह के ऐड आते हैं गाने नहीं सुन सकते. आपकी सरकार है यहां पर आपने कुछ किया.

यहां पर देखें पूरे कार्यक्रम का वीडियो- http://abpnews.abplive.in/videos/kailash-vijayvargiya-in-press-conference-323329/

 

विजयवर्गीय – वैसे आग्रह पूर्वक नहीं लेकिन आप ने आज यह विषय उठाया तो मैं आग्रह पूर्वक जरूर इस विषय को उठाउंगा.

दिबांग – वही मैं कहा रहा हूं कि आप कहीं खो गए हैं वो कैलाश विजयवर्गीय कहां गया जो लोगों को पहले ठोक देता था. इस समय तो सरकार है आपकी किसी की मेज पर जाकर अपना मुक्का ठोक सकते हैं.
विजयवर्गीय – मैं अपनी इस भूल को स्वीकार करता हूं कि मैंने बहुत आग्रह पूर्वक ये बात मैंने सरकार से नहीं कहा है मैं इस बात को स्वीकार करता हूं.

सवाल – कहीं ऐसा तो नहीं है कि पार्टी के जो अध्यक्ष हैं या संघ के जो लोग हैं वो समाज की जो ऐसे बयानों को लेकर सहिष्णुता है उसको टेस्ट करते हैं आपके बयानों के जरिए कहीं ऐसा तो नहीं है.

विजयवर्गीय – मैं किसी से पूछ कर बयान नहीं देता मुझे जो लगता है वो मैं रात के दो बजे भी ट्वीट कर देता हूं मैं समय भी नहीं देखता हूं तो ऐसा कुछ नहीं है मुझे जब लगता है ये खराब है इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए तो मैं कर देता हूं.

सवाल – महाराष्ट्र में शिंगणापुर मंदिर है शनि धाम है वहां पर महिलाएं पूजा करना चाहती हैं लेकिन जो न्यास है वो उनको इजाजत नहीं दे रहा है क्या आप यहां पर भी महिलाओं को शिक्षा देंगे की आप पूजा करने मत जाइए न्यास जो कह रहा है वो मानिए.

विजयवर्गीय – नहीं मेरा मत है कि हमारे यहां संविधान के अंदर सबको समान अधिकार है यदि महिलाएं पूजा करना चाहती हैं तो पूजा करने देना चाहिए पर शायद वहां की परंपरा ये है मैं भी अपनी पत्नी के साथ गया था तो उन्होंने कहा था कि महिलाएं चबूतरे पर नहीं चढ़ सकती हैं मैं खुद ही पूजा करके आया था अब वो वहां की परंपरा है तो मैं उसपर टिप्पणी नहीं कर सकता.

दिबांग – परंपरा है तो उसको बदलना चाहिए पहले सती की भी परंपरा हुआ करती थी इस तरह की परंपरा जिस तरह का आपका संविधान है उसके सम्मत होनी चाहिए.

विजयवर्गीय – हां निश्चित रूप से मैं इसका पक्षधर हूं कि इसमें अगर कोई बहुत बड़ा कारण ना हो तो इस तरह की परंपरा को बदला जा सकता है.

सवाल – सबरी माला मंदिर में गर्भ गृह में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है तो आपकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इस नियम का समर्थन कर रहे हैं और शनि शिंगणापुर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने प्रवेश का समर्थन किया है तो आपकी पार्टी में इसपर अंर्तविरोध क्यों है?

विजयवर्गीय – पार्टी के संविधान के अंदर नहीं लिखा है. ये केरल के प्रदेश अध्यक्ष की व्यक्तिगत राय हो सकती है मेरी ये व्यक्तिगत राय है?

विजयवर्गीय – दिल्ली, बिहार में पार्टी की हार हुई . क्या लग रहा आगे जो 6 जगह चुनाव है वहां आपको बड़ी उम्मीद कहां से है?

विजयवर्गीय – देखिए उम्मीद तो हम सभी जगह से रखेंगे और लोकतंत्र के अंदर हार जीत महत्वपूर्ण नहीं होती. महत्वपूर्ण ये होता है कि आप किस तरह खुद को प्रस्तुत कर रहे हैं हम दिल्ली और बिहार हारे हैं पर उससे पहले हम जीते भी है महाराष्ट्र जीते हैं हमलोग हरियाणा जहां कभी नहीं जीते थे वहां हम जीते हैं, झारखंड में हमने सरकार बनाई है तो हार और जीत तो चलती है आगे भी जो 5 चुनाव है उसमें भी हमारा बहुत अच्छा प्रजेंस नहीं है पर हम कोशिश करेंगे की वहां खुद को अच्छी तरह प्रस्तुत करके अपनी सरकार बनाएं.

दिबांग – पश्चिम बंगाल में लड़ाई शुरू होने वाली है और वहां आपने अपना प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया आपने जिले के पदाधिकारियों को बदल दिया प्रमुखों को बदल दिया लड़ाई शुरू होने वाली है डुगडुगी बजने वाली है और आपने अपना जनरल बदल दिया यानि आप तो पहले ही पस्त हो गए.

विजयवर्गीय – नहीं नहीं उनका कार्यकाल पूरा हो गया था राहुल जी 6 साल से अध्यक्ष थे बदलना तो था ही अभी हमारी चुनाव प्रक्रिया चल रही थी उसमे बदलाव हुआ.

दिबांग – जब आपकी बड़ी लड़ाई होने वाली है तब तो ये स्वभाविक रहता है कि ये अच्छा काम कर रहे हैं तो इनका कार्यकाल बढ़ाना है इन्हीं के भरोसे पार्टी रही है और अब इन्हीं के भरोसे आगे जीत होगी.

विजयवर्गीय – आपकी बात बिल्कुल सही है हमने वैसा ही किया है वो राष्ट्रीय सचिव बन गए और उसके साथ ही हमने अध्यक्ष भी बना दिया है. पहले अकेले राहुल जी थे अब एक पर एक ग्यारह हो गए हम मिलकर वहां पर काम करेंगे.

सवाल – क्या आपको लगता है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी उसी तरह की राजनीति कर रही है जैसी राजनीति उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी करती है?

विजयवर्गीय – समाजवादी पार्टी से भी वो दो कदम आगे हैं. समावादी पार्टी में तो अब भी थोड़ी बहुत प्रजातंत्र है वहां तो बिल्कुल प्रजातंत्र दिखाई नहीं देगा आपको मैंने स्थानीय चुनाव में देखा वहां पुलिस के सामने पोलिंग बूथ पर कब्जा हो रहा है पूरा का पूरा वीडियो ले जाकर हमने चुनाव आयोग को दिया और इसलिए वहां हालत ज्याद खराब है ऐसा मैं मानता हूं.

सवाल – 23 जनवरी को आप लोगों ने सुभाष चंद्र बोस के सभी फाइलों को सार्वजनिक किया. वहां पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए लोग कह रहे हैं आपकी सरकार ने यहां नेताजी के फाइलों को सार्वजनिक किया क्योंकि बंगालियों की भावना जुड़ी हुई है नेताजी के साथ तो उसके लिए आपलोगों ने ऐसा किया है.

विजयवर्गीय – एकदम आप हमें कटघरे में खड़ा कर रही हैं ये उचित नहीं है मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि माननीय मोदी जी जब पार्टी के उम्मीदवार बनकर सारे देश में घूमे थे तो उन्होंने बंगाल की सभा में लोगों से कहा था इसकी फाइलें ओपन कराएंगे अगर सरकार में आएं तो समय के साथ साथ जैसा वादा उन्होंने बंगाल की जनता के साथ किया था उसको उन्होंने पूरा किया है इसका राजनीतिक दृष्टिकोण मत देखिए ये मोदी जी का वादा था बंगाल की जनता से वो उन्होंने पूरा किया.

सवाल – अभी जो नेताजी के परपोते ने आपकी पार्टी को ज्वाइन किया है ये तो सीधा सीधा राजनीतिक संबंध है. फाइल सार्वजनिक करने के ठीक दो दिन बाद उन्होंने पार्टी ज्वाइन कर ली.

विजयवर्गीय – वो इतने खुश हो गए कि उन्होंने कहा कि मोदी जी आपने जो बात कही थी साधारणत: राजनेता वादे कर जाते हैं उनको पूरा नहीं करते आपने पूरा किया मुझे आपके नेतृत्व में विश्वास है और मैं यहां पर भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करूंगा.

दिबांग – पश्चिम बंगाल में आप अपना बड़ा विरोधी किसको मानते हैं ममता बनर्जी को या वामपंथियों और कांग्रेस को.

विजयवर्गीय – नहीं अभी तो ममता बनर्जी , अभी तो वही हैं ममता जी हैं .

दिबांग – आपको उम्मीद क्या है पश्चिम बंगाल से?
विजयवर्गीय – हम सरकार बनाएंगे.

दिबांग – कहां तक आपको उम्मीद है पश्चिम बंगाल में?

विजयवर्गीय – मुझे जब हरियाणा का प्रभारी बनाया गया थो तो मैं इसी तरह पत्रकारों के बीच में गया था तो मैंने कहा हम हरियाणा में सरकार बनाएंगे तो आपके जैसा एक बहुत ही बुद्धिजीवी पत्रकार था उसने मेरे दाएं- बाएं देखा और बोला जादू का डंडा लेकर आए हो क्या. मैंने कहा ठीक है चुनाव के बाद मैं आप से इसी हॉल में बात करूंगा और बाद में चुनाव परिणाम के बाद मैंने उसी हॉल में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. हो सकता है कि बंगाल के चुनाव के बाद मैं आपसे कहूं की मुझे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुलाइए आप.

दिबांग – पर आप जानते है जो लोकसभा के चुनाव हुए उसमे आपको 18 फीसदी वोट मिले और जिस तरह की जीत हुई ममता बनर्जी की लोकसभा चुनाव में तो आपको और उम्मीद कहां से बनती है क्योंकि लोकसभा चुनाव में तो बड़ा हल्ला था आपका.

विजयवर्गीय – देखिए राजनीति में पॉजीटिव वोट भी होते हैं और निगेटिव वोट भी होते हैं पॉजीटिव वोट ये है कि केंद्र में मोदी जी ने बहुत अच्छा काम किया है और जो जो वादे उन्होंने बंगाल में किए थे सबको पूरा किया. नकारात्मक वोट ये है कि ममता जी ने जो भी वादे बंगाल में किए थे उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ . महिला मुख्यमंत्री होने के बाद भी अगर महिला कहीं सबसे ज्यादा असुरक्षित है तो वो बंगाल में हैं और सीमावर्ती राज्य होने के कारण जिस तरह से घुसपैठिए आ रहे हैं फेक करेंसी आ रही है वहां पर सरेआम थाने को जलाया जा रहा है लॉ एंड ऑर्डर बिल्कुल खत्म हो गया है तो उसके नकारात्मक वोट हैं वो भी हमे मिलेंगे निश्चित रूप से तो राजनीति में जब जाते है तो कुछ निगेटिव वोट होते हैं कुछ पॉजीटिव वोट होते हैं जो एक बड़ा स्कोर बना देते हैं.

सवाल – केरल में बीजेपी छोटे छोटे हिन्दू ग्रुप के साथ हाथ मिला रही है और एक बड़ा गठबंधन बनाने की योजना बना रहे हैं दो से पहले ही गठबंधन कर चुके हैं अब ये हिन्दुओं के वोट को आप असम और बंगाल में कैसे इकट्ठा करेंगे?

विजयवर्गीय – हमने कभी भी हिन्दू वोट के ध्रुवीकरण के लिए राजनीति नहीं की हां पर हम तुष्टीकरण के हमेशा खिलाफ रहे हैं इसलिए तुष्टीकरण को लेकर हम ये जरूर बोलते हैं पर ये हिन्दू वोट हम इकट्ठे कर और सिर्फ इसी की बदौलत देश पर राज करें ऐसा हमारा कभी एजेंडा नहीं रहा.

सवाल – मैं ध्रुवीकरण की बात नहीं कर रही मैं हिन्दू वोट को इकट्ठा करने की बात कर रही हूं. हिन्दू वोट तो आपके लिए जरूरी है इसको आप असम और बंगाल में कैसे इकट्ठा करेंगे?

विजयवर्गीय – आप के सवाल से मैं सहमत नहीं हूं हम सिर्फ हिन्दू वोट के लिए नहीं विकास के लिए बात कर रहे हैं.

दिबांग – बिहार में चुनाव हुए तो आपने शत्रुघन सिन्हा को करारा जवाब दिया आपने कहा कि कुत्ता गाड़ी के नीचे चलता है तो उसको लगता है गाड़ी उसी की वजह से चल रही है उसका उन्होंने जवाब दिया है.

दिबांग – कैलाश जी मैं ये पूछ रहा हूं ये तो आपकी पार्टी में ही हैं आप बड़े नेता हैं पार्टी में. पार्टी ऐसी है जिसका चाल, चरित्र, चेहरा अलग है जो अनुशासन को मानती है क्या हो रहा है ये पार्टी में और इन सबको ठीक क्यों नहीं करते हैं कहां आप अक्षम रह रहे हैं.

विजयवर्गीय – देखिए लोग प्रजातंत्र की बात करते हैं असली प्रजातंत्र अगर कहीं है तो भारतीय जनता पार्टी में है ये कोई बाप बेटे की पार्टी तो है नही मां बेटे की पार्टी तो है नहीं ये पार्टी सामूहिक निर्णय करती है पार्टी अनुशासित पार्टी है और जहां लगता है कि अनुशासनहीनता हो रही है तो समय के साथ साथ इलाज भी होगा.

दिबांग – पिछले दिनों एबीपी न्यूज और नीलसन ने एक सर्वे किया उसका एक आंकड़ा देखिए

विजयवर्गीय – देखिए जहां तक नियम के तहत है भारतीय जनता पार्टी इस बात से सहमत है कि राम मंदिर बनना चाहिए पर हम न्यायपालिका का भी आदर करना चाहते हैं और सामाजिक समरसता का तानाबाना नहीं टूटे इसकी भी चिंता करेंगे.

दिबांग – तो क्या कहेंगे बनेगा या नहीं बनेगा?
विजयवर्गीय – निश्चित रूप से बनेगा, समय का इंतजार करना होगा
दिबांग – ठंडे बस्ते में गई बात.
विजयवर्गीय – ऐसा मत मानिए आप, बिल्कुल ठंडे बस्ते में नहीं है बस्ता हमेशा गर्म रहेगा राम मंदिर का कभी भी ठंडा नहीं होगा.

सवाल – क्या ये जो मुद्दा है ये खाली उत्तर प्रदेश चुनाव तक गर्म रहेगा या हम ये माने की 2019 तक जबतक ये कार्यकाल है आपका बहुमत है तो आप राम मंदिर के प्रति वैसे ही प्रतिबद्ध है जैसे जब आप बाहर थे तब प्रतिबद्ध थे.

विजयवर्गीय – अभी भी मैं कह रहा हूं जब परिस्थितियां अनुकूल होगी तो अपने आप राम मंदिर बनेगा पर इसको लेकर उत्तर प्रदेश के चुनाव से नहीं जोड़ना चाहिए ये भारतीय जनता पार्टी ने मुद्दा नहीं उठाया है ठीक है वहां के लोगों ने उठाया है मुद्दा और लोग अपेक्षा भी करते है मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कि राम मंदिर बनना चाहिए.

दिबांग – एक कार्यकर्ता के तौर पर आप भी गए होंगे अयोध्या आपने भी सोचा होगा हमारी सरकार बनेगी हमारे प्रधानमंत्री बनेंगे तो उस दिन बनेगा ये राम मंदिर.

विजयवर्गीय – जी बिल्कुल

दिबांग – आज आप क्या सोच रहे हैं?

विजयवर्गीय – दिबांग जी आपने भी सुना होगा बहुत से मुस्लिम नेताओं ने कहा है कि पहली बार उन्होंने कहा है कि राम मंदिर बनना चाहिए . बहुत सारे मुस्लिम नेता मुझे लगता है कि मुस्लिम समाज पूरा खड़ा हो जाए और कह दे कि मंदिर बने हमें कोई परेशानी नहीं . राम मंदिर बनना चाहिए बनेगा इस बात का मेरा विश्वास है पर समय का इंतजार हमें करना होगा और हम इस देश के अंदर ऐसा वातावरण बनाने की कोशिश करेंगे की राम मंदिर बन जाए.

सवाल – वैचारिक दृष्टिकोण से जो एक हिन्दू राष्ट्र का सपना है उसके लिए जो पार्टी है संगठन है साथ वाले लोग हैं उसके लिए आप क्या प्रयास कर रहे हैं आपको लगता है कि अब ये सही समय है कि उस दिशा में अब कोशिश की जाए.

विजयवर्गीय – एक व्यापक अर्थों में हिन्दू और हिन्दू राष्ट्र के बारे में समझना पड़ेगा हिन्दू राष्ट्र इसका मतलब ये नहीं है कि देखिए मैं जब कहता हूं कि लोग कहते हैं कि ये देश असहिष्णु हो गया है तो मुझे ऐसा लगता है कि कोई भारत माता को गाली दे रहा है. सब धर्म का आदर करो यही तो भारत की विशेषता है और इसलिए हिन्दू राष्ट्र का ये मतलब नहीं है कि हम सिर्फ राम बोलने वाला इस देश के अंदर रह सकता है बाकि कोई नहीं रह सकता सब व्यक्ति जो भारत माता को अपनी माता मानता हो इस देश का सम्मान करता हो जो वंदे मातरम बोलता हो जो भारत माता की जय बोलता हो वो किसी भी धर्म को मानने वाला हो वो हमारा भाई है वो हमारा मित्र है और उसे इस देश में रहना चाहिए और वो हिन्दू राष्ट्र का नागरिक है ये हमारा मानना है.

दिबांग – आप क्यों नहीं कहते जो प्रधानमंत्री ने कहा लाल किले की प्राचीर से अपने पहले अभिभाषण में जब उन्होंने कहा कि ये लड़ाई झगड़े के मुद्दे ये धर्म के मुद्दे को 10 साल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दीजिए विकास की बात सोचिए. ये नई बीजेपी है ये विकास करना चाहती है पूरे देश का विकास करना चाहती है सबका सात सबका विकास जो मोदी जी ने जो दिशा दिखाई थी 15 अगस्त के पहले अभिभाषण में उसको आपलोग भूलते से क्यों नजर आ रहे हैं?

विजयवर्गीय – बिल्कुल नहीं बिल्कुल नहीं भूले आज भी हम कह रहे हैं सबका साथ सबका विकास ये आज भी हमारा नारा है हम इसी नारे के साथ सब जगह गए हम बिहार में भी गए थे तो इसी नारे के साथ गए थे हम बंगाल में भी जाएंगे तो इसी नारे के साथ जाएंगे जहां तक राम मंदिर का मुद्दा है हम उसका नैतिक रूप से समर्थन कर रहे हैं ये हमेशा कह रहे हैं पर इसलिए कह रहे है समय का इंतजार कीजिए तबतक के लिए भूल जाइए जब समय आएगा मैं आपकी आधी बात मान लेता हूं तबतक के लिए भूल जाइए जैसे ही समय आएगा राम मंदिर बन जाएगा पर अभी सिर्फ विकास की बात कीजिए .

दिबांग – कैलाश जी आपकी सरकार है रोज इसकी सुनवाई हो मामला निपटे और मंदिर बनेगा नहीं बनेगा बात साफ हो.

विजयवर्गीय – हां मैं इस बात का समर्थन करता हूं.

दिबांग – इंटरव्यू में आप समर्थन करते हैं पर वहां जाकर आप लोगों को क्यों नहीं ठोकते जैसे पहले आप ठोका करते थे पुराना कैलाश विजयवर्गीय कहां है?

विजयवर्गीय – आपने राय दी तो अब ठोकूंगा आप चिंता मत करिए.

दिबांग – क्या चाहते हैं आप इसमें क्या हो?

विजयवर्गीय – हां अगर अच्छा और जल्दी इसकी सुनवाई और रोज की रोज सुनवाई हो और जल्दी न्यायपालिका इसपर निर्णय कर दे तो ये अच्छी बात है.

दिबांग – जो आपका नारा था अच्छे दिन वाला तो क्या अच्छे दिन चल रहे है, अच्छे दिन आनेवाले हैं या फिर अच्छे दिन आएंगे क्या समझें उसके बारे में?

विजयवर्गीय – मुझे लगता है कि एक व्यापक दृष्टिकोण में देश किस दिशा में चल रहा है इसपर विचार करना चाहिए जो हमारी अर्थनीति और जो हमारे प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था के ऊपर कंट्रोल किया है मेरा मानना है कि एक दो सालों में देश की जनता को इसका परिणाम देखने को मिलेगा निश्चित रूप से अच्छे दिन आएंगे ऐसा मेरा मानना है.

दिबांग – कैलाश जी भारत किसानों का देश है पिछले दिनों पहली बार मध्य प्रदेश की विधानसभा में आपके गृह मंत्री बाबू लाल गौर उन्होंने कहा कि फरवरी से अक्टूबर 9 महीने में मध्य प्रदेश में 837 किसानों ने आत्महत्या की आपने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि न्यूनतम मूल्य जो होगा वो लागत और 50 फीसदी जो होगा वो होगा आप क्यों नहीं लागू करते . किसानों के अच्छे दिन कैसे आएंगे अगर आप ये काम नहीं करते हैं.

विजयवर्गीय – दिबांग जी वहां जो आत्महत्या के ग्रामीण क्षेत्र के हैं वह प्रश्न अधूरा था उत्तर भी अधूरा था मैं आपको बता दूं इसलिए किसानों ने आत्महत्या नहीं की थी कि उनकी फसल खराब हो गई इसलिए उस प्रश्न को आप घुमाइये मत प्लीज वहां पर आत्महत्या हुई होंगी पर इसलिए नहीं हुई की फसल खराब हो गई.

दिबांग – मध्य प्रदेश में किसानों की आत्महत्या की बात इसलिए कर रहा हूं क्योंकि पहली बार विधानसभा में आपके किसी मंत्री ने इस पर माना तब मैं आपसे ये पूछ रहा हूं चूंकि आप मध्य प्रदेश से ही आते हैं किसानों की हालत सुधारने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जो आपने वादा किया था वो पूरा क्यों नहीं करती बीजेपी किसानों की कभी तो सोच लीजिए पर क्यों नहीं करते 20 महीने हो गए कब आएंगे उनके अच्छे दिन.

विजयवर्गीय – किसानों की जो बीमा पॉलिसी अभी आई है दिबांग जी आप उसको देख लीजिएगा ये क्रांति है ये किसानों के तरह से बहुत बड़ा कवच है अगर किसान की फसल खराब होगी तो तत्काल जो भी समस्याएं जिसके वजह से उन्हें बीमा नहीं मिल पाता था वो सारे समाप्त कर दिये गए हैं छोटी छोटी बातों का ध्यान रखके यदि 5 एकड़ के किसान की फसल भी खराब हुई तो उसको मुआवजा मिलेगा.

सवाल – कैलाश जी मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान का मतलब बीजेपी हो गया शायद इसी रणनीति के तहत मध्य प्रदेश से आपको केंद्र की राजनीति में लाया गया कि आपका कद ऊंचा करके शिवराज सिंह चौहान का विकल्प खड़ा किया जा सके पर बिहार की जो सियासी हार है उसने इस योजना पर शायद पानी फेर दिया और फिलहाल मध्य प्रदेश में शिवराज का ही राज चलेगा अब आपके लिए मध्य प्रदेश में क्या है?

विजयवर्गीय – पार्टी जो काम देगी वो मुझे करना है पार्टी ने मुझे वहां मंत्री के रूप में उपयोग किया वहां मैं मंत्री रहा पार्टी ने यहां महामंत्री बनाकर बुला लिया यहां महामंत्री की हैसियत से काम कर रहा हूं वापस जाउंगा ये आपने सोचा होगा मैंने तो ऐसा सोचा नहीं कभी मध्य प्रदेश जाउंगा अब दिल्ली आ गया तो दिल्ली में ही डटकर रहूंगा आप चिन्ता मत कीजिए .

सवाल – मुख्यमंत्री बनने का आपका कोई इरादा नहीं है?

विजयवर्गीय – मैं हमेशा भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता बना रहा मैं वही बना रहना चाहता हूं.

दिबांग – ऐसे आपने कभी अपनी इच्छा प्रकट की कि आप राज्य के मुख्यमंत्री बनना चाहेंगे राज्य को नई उंचाइयों पर ले जाना चाहेंगे इस बारे में सोचा आपने कभी.

विजयवर्गीय – कभी भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा नहीं रही पर जहां पार्टी जो काम दे वो इतनी कर्मठता से करूं की लोग कहें भारतीय जनता पार्टी का अच्छा कार्यकर्ता है. मुख्यमंत्री बनना चाहिए कभी इसकी इच्छा नहीं रही और ना ही कभी इच्छा प्रकट की.

दिबांग – कैलाश जी इसमे जो जानकार है इसमें वो बताते हैं कि दरअसल इच्छा तो है पर जांच की बेड़ियां लगी हुई हैं आपको. सुगनी देवी घोटाला है पेँशन घोटाला है जब आप महापौर थे इतने पुराने मामले हैं वो ठंडे बस्ते में कहीं ना कहीं रखे हुए हैं आप थोड़ी सी हरकत करेंगे आपको पकड़ने के लिए कभी भी गरम कर सकते हैं वो उस मामले को क्या ये बात है कैसे देखते हैं आप इस मामले को?

विजयवर्गीय – दिबांग जी आजतक मैंने कभी इस विषय में किसी को कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया पर मैं आज देना चाहता हूं कि आपने ये जितने भी बताए ये मेरे मेयर काल के हैं और इसमें जांच किसी विरोधियों ने नहीं की हमारे ही मुख्यमंत्री ने जांच करवाई उसमें एक बात जो सबके लिए लागू होती है की कभी भी दूसरे नंबर पर नहीं रहना चाहिए व्यक्ति को उमा जी जब मुख्यमंत्री थी तो उसके बाद मैं अगला उमा जी माना जाता था पहले वाल भी चोट देता है और दूसरे वाला भी दबाता है तो बीच में वो सैंडविच हो जाते हैं वो तो मैं बहुत ऐसी बात उजागर कर रहा हूं कि साधारणत: एक नंबर को कोई मार नहीं पाता और दो नंबर वाले पर लोग हमला करते हैं जैसे कि मैं उदाहरण दूं मोदी जी हैं और अमित शाह जी है मोदी जी को कोई हाथ नहीं लगा सकता तो लोग अमित शाह पर हमला करते हैं यदि वो पहले हैं और मैं सेकेंड नंबर पर हूं यदि आप माने तो उनको कोई हाथ नहीं लगाएगा लोग मुझे मारेंगे तो ये साधरणत: होता है जो दो नंबर वाला होता है उसको ऊपर वाला भी झटका देते हैं और नीचे वाला भी झटका देता है तो ये जितनी भी जांचे है सब में जांच हो गई और इसमें सब में बरी हूं मैं तो मेरे बारे में इसमें ऐसी कोई बात नहीं है कि अगर मैं आगे बढूंगा तो आकर मुझे दिखा देगा सबमें जांच हो गई है.

सवाल – आप मंत्री थे वहां पर बीजेपी में पहली बार अमित भाई की टीम ने किसी मंत्री को हटाकर उसे संगठन में लेकर आए हैं ये शिवराज सिंह चौहान और आपके लिए राहत की बात है या फिर दोनों के लिए ताकत इकट्ठा करने का नया मौका है.

विजयवर्गीय – देखिए ना राहत है ना ताकत एक दूसरे के लिए हमदोनों एक दूसरे की ताकत हैं मैं आपको बता दूं सुजित भाई शिवराज जी और मैंने अपना राजनीतिक जीवन एक साथ शुरू किया जब वो भोपाल के विद्यार्थी परिषद के मंत्री थे और मैं इंदौर का था लगातार वो हमारे नेता रहे युवा मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष बने मैं उनके साथ उपाध्यक्ष था वो केंद्र में आए मैं केंद्र में उनके साथ उपाध्यक्ष था तो हमलोग हमेशा साथ में रहे और आज भी साथ में हैं पता नहीं लोगों के बीच ये गलतफहमी क्यों है कि हमारे बीच दूरियां है बिल्कुल भी दूरियां नहीं हैं कैलाश और शिव एक ही हैं.

सवाल – कैलाश जी आप मालवा क्षेत्र से आते हैं मालवा क्षेत्र में जो पिछले दिनों सांप्रदायिक घटना घटी हैं जो तनाव पैदा हुआ उसके लिए सौहाद्र लाने के लिए आप क्या कर रहे हैं?
विजयवर्गीय – वहां पर एक भोजशाल धार्म है भोजशाला में साधारणत: वसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ हो जाता है तो थोड़ी सी दिक्कत हो जाती है वहां पर मुस्लिम भाई सोचते हैं कि हम भी नमाज अदा करेंगे हिन्दू भाई सोचते हैं कि हम पर हम दोनों को बिठाकर दोनों काम कर देते हैं वहां सरस्वती माता का पूजन भी हो जाता है और मुस्लिम भाई नमाज भी अदा कर लेते हैं.

दिबांग – कैलाश जी जो हमने बहुत गर्मागर्म बहस में आपको देखा टीवी पर और एक जगह तो आप बहस छोड़कर भी चले गए वो आसाराम बापू वाला मुद्दा था आप कहते हैं कि ये राजनीतिक मुद्दा है और जितने भी जो टीवी के एंकर है वो जब आपसे पूछते हैं कि आपके पास सबूत क्या है तो आप कहते हैं सबूत तो नहीं है मेरे पास फिर आप भिड़ते हैं उससे.

विजयवर्गीय – मुझे ऐसा लगता है कि मैं जितना संत आसाराम बापू जी को पहचानता हूं कि वो ऐसा नहीं कर सकते हैं ऐसा मेरा आज भी मानना है मेरा दिल नहीं कहता ये बात और इसलिए मैंने उस दिन भी कहा था कि वो ऐसा कर सकते हैं मुझे इस बारे में थोड़ी सी शंका है जो घटना कहां की है रिपोर्ट कहां की गई है इस बात को कहा था मैंने पर मैं इसपर ज्यादा बहस करना नहीं चाहता अब.

दिबांग – पर आप इंतजार क्यों नहीं करते आसाराम वाले मुद्दे पर क्यों आप मन की बात जो सिर्फ आपके मन की बात है क्योंकि जब आपसे इस पर सबूत मांगे जाते हैं तो आप उसका जवाब नहीं दे पाते हैं सबूत हैं नहीं आपके पास अगर सबूत होते तो आप उसको कोर्ट में पेश करते तो अगर आपके पास सबूत नहीं है तो आप इसपर धैर्य क्यों नहीं रखते तो आपको क्यों लगता है कि नहीं इसपर बोलना जरूरी है अपने मन की बात.

विजयवर्गीय – दिबांग जी अगर मैं अपने मन की बात कहता हूं तो इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है बिल्कुल भी नहीं है आप मुझे बहुत अच्छे लग रहे हैं आप बहुत स्मार्ट हैं अब मैं ऐसा कहता हूं मेरे दिल में ऐसा लगता है कि आप बहुत स्मार्ट पत्रकार हैं बहुत अच्छे पत्रकार है बहुत गंभीर पत्रकार हैं तो ये मेरे मन की बात है तो मैं कह रहा हूं अब इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है?

दिबांग – पर आप जानते हैं कि ये मामला न्यायालय में लंबित है इसपर लंबी चौड़ी लड़ाई चल रही है तमाम कोशिशों के बावजूद भी सुब्रमण्यम स्वामी भी वहां पैरवी करने गए उनको अभी तक बेल नहीं मिली है गंभीर मसला है कई कई गवाह मारे गए हैं इसमें तो आपकों नहीं लगता कि इसपर आपकों थोड़ा सा अपना बयान रोक लेना चाहिए था.

विजयवर्गीय – मैंने कमेंट करना बंद कर दिया है आपने प्रश्न पूछा तो मैंने कहा दिया मैं तो कमेंट करता ही नहीं

दिबांग – आपने क्यों रोक दिया कमेंट करना?
विजयवर्गीय – इसलिए की आपके जैसे समझदार व्यक्ति ने कहा की नहीं करना चाहिए तो मैंने रोक दिया करना.

दिबांग – तो आप मानते हैं कि ये सलाह ठीक है.
विजयवर्गीय – हां अच्छी सलाह है पर आपने सलाह के विपरीत सवाल पूछ लिया और मुझसे जबरदस्ती उस पर जवाब उगलवा लिया.

दिबांग – पर ये बाबाओं का आपको प्रेम रहा है आप राम रहीम के पास भी गए थे जब पार्टी ने समझौता किया हरियाणा के लिए.

विजयवर्गीय – देखिए मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि ये है कि मेरे माता पिता बहुत धार्मिक हैं बचपन से हमारे इंदौर में एक गीता भवन मंदिर था मैं वहां रोज जाता था रोज सुबह प्रवचन सुनता थो तो मेरी संतों को देखकर मैं बड़ा विनम्र हो जाता हूं. और इसलिए आप इसे कुछ भी मान लीजिए मेरे संस्कार मान लीजिए यदि आपको ऐसा लगता है की मेरी प्रवृति ठीक नहीं है तो आप वो मान लीजिए इसको आप मेरी कमी मान लीजिए या मेरी अच्छाई मान लीजिए आप स्वतंत्र है मानने के लिए कि मैं संतों को देखकर बहुत विनम्र हो जाता हूं ये मेरा स्वभाव है और ये मुझे परंपरा के रूप में मेरे माता-पिता से मिला है इसके लिए आप मुझे कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं तो कर सकते हैं.

दिबांग – मैं सिर्फ ये पूछ रहा हूं कि जिस तरह से बाबा राम रहीम के बारे में चर्चाएं हुईं पिछले दिनों क्या समझते हैं क्योंकि हरियाणा में चुनाव जितवाने में उनका रोल रहा.
विजयवर्गीय – इतना सेवा कार्य करते हैं वो मैंने इंजीनियरों को नालियों में उतरते देखा है साफ करते देखा है उनके निर्देश पर जो बड़े बड़े इंजीनियर हैं बड़े बड़े डॉक्टर हैं अब ये आपके कहने से मेरे कहने से तो कोई कचड़ा नहीं उठा सकता आखिर कुछ तो बात है कि एक बड़ा इंजीनियर एक बड़ा उद्योगपति नाली में धुसकर साफ कर रहा है जिस नाली को हम देख भी नहीं सकते उसके पास खड़े नहीं रह सकते वो नाली साफ कर रहा है वो ड्रेनेज साफ कर रहा है तो कुछ है उनके पास.

दिबांग – और आपको ये भी मालूम है की उनके संगठन पर तरह तरह के आरोप हैं.

विजयवर्गीय – हां आरोप लगे हैं मैंने सुना है कुछ ऐसा लेकिन उस बारे में मुझे बहुत जानकारी नहीं है अखबारों में पढ़ा है मैंने.

दिबांग – तो ये फंस कहां जाते हैं बाबाओं पर ये संगीन आरोप लग क्यों जाते हैं और इतने गंभीर और संगीन आरोप कि लोग मारे जाते हैं.

विजयवर्गीय – क्या होता है कि मुझे आप जैसे एक पत्रकार ने कहा था कि मैं ने कहा कि देखो भाई तुम हमारे बारे में उल्टा सीधा छापते हो तो उसने कहा देखो भाई कुत्ता अगर आदमी को काटता है तो न्यूज नहीं बनती है पर आदमी जब कुत्ते को काट लेता है तो न्यूज बनती है तो बाबा लोगों से लोग अपेक्षा बहुत करते हैं जब उनसे कोई भूल हो जाती है तो लोगों को बोलने का मौका मिल जाता है शायद वैसा कुछ होगा मुझे उस प्रकरण के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और ना ही मैंने जानकारी लेने की कोशिश की.

सवाल- जैसे आपने दादरी कांड के बारे में बोला वैसे ही अभी जो हैदराबाद में दलित विद्यार्थी की मौत हो गई उसके ऊपर बीजेपी वालों ने पहले बहुत स्टेटमेंट निकाला था कि एंटीनेशनल है उसके दो तीन दिन के बाद प्रधानमंत्री ने बोला भारत मां ने एक बेटा खो दिया आप क्या मानते हैं ऐसे बयानों से बीजेपी का नुकसान हुआ है.

विजयवर्गीय – इससे देश का नुकसान होता है पर एक ऐसा नौजवान आत्महत्या करता है जो मतलब मुझे आश्चर्य हुआ कि जो उसने फांसी का विरोध किया. मतलब नमाज पढ़ी जो धारा के बिल्कुल विपरीत चलने वाला नौजवान यदि आत्महत्या कर लेता है तो मुझे लगता है इसके पीछे कुछ बड़ा कारण होना चाहिए आप इसके ऊपर बिल्कुल मत जाइए राजनीति के ऊपर मैं क्षमा चाहता हूं इसके ऊपर राजनीति ना हो तो ज्यादा अच्छा है.

सवाल – बाद में जो बीजेपी की प्रतिक्रिया थी आप उसको सही मानते हैं.

विजयवर्गीय – मैं किसी के भी प्रतिक्रिया को भी सही नहीं मानता, किसी के भी इस प्रकार के घटनाओँ पर कम से कम देश में राजनीति ना हो.

दिबांग – क्या आप एक दलित छात्र के लिए इसतरह से चिट्ठी लिखें और उसमे उसको एंटीनेशनल लिखें क्या ये सही है
विजयवर्गीय – देखिए ऐसा है कि किन परिस्थतियों में लिखा ये तो आप मंत्री जी से ही पूछेंगे तो वो बता सकते हैं मैं ऐसा मानता हूं कि एक प्रक्रिया समझ लीजिए आप हमलोग जब सुबह बैठते हैं 2 घंटे 4 घंटे अपने ऑफिस में हमारे पास जनता आती है विकास जी जरा सा इसका पत्र लिख देना पत्र लिखा और हमने साइन कर दिया.

दिबांग – मैं आपसे ये पूछ रहा हूं इतने सालों में आपने अबतक कितने लोगों को एंटी नेशनल लिखा होगा.

विजयवर्गीय – मैं कहा रहा हूं ना कि हम तो पत्र भी नहीं पढ़ते हैं राजनीति में कभी कभी ऐसा हो जाता है कि आप कुछ करते नहीं है और आप बदनाम भी हो जाते हैं ये एक राजनीति का हिस्सा है इसलिए हम समय का इंतजार करते हैं जब इसके दूरगामी परिणाम आएंगे तो आप देखेंगे कि लाभ हमें ही होगा उससे और राजनीति करने वाले चेहरे बेनकाब हो जाएंगे.

दिबांग – इसमें भी अगर आप लाभ शब्द बोल देते हैं तो आपकी बात हल्की हो जाती है ना कैलाश जी.

विजयवर्गीय – मैं अपना शब्द वापस ले लेता हूं अगर आपको हल्की लग रही है तो…

सवाल – कैलाश जी आप बड़े अच्छे गायक भी हैं क्या कभी प्रधानमंत्री ने आपके गाने की तारीफ की है या कभी कहा है कि वो आपका गाना सुनना चाहते हैं.

विजयवर्गीय – प्रधानमंत्री जी जब युवा मोर्च के प्रभारी थे हमलोगों के . मैं गाता हूं ये प्रधानमंत्री जी को मालूम है और कई बार मुझे ये सौभाग्य मिला कि मैंने उनके सामने गाया.

दिबांग – और ये दौर है रैपिड फायर का

सवाल – कैलाश जी आपको बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है . बंगाल में बीजेपी का डब्बा गोल रहा है क्या लगता है आपको बंगाल की जनता ने बीजेपी की नीति को शुरू से ठुकराया हुआ है या वहां की जनता को राजनीतिक समझ ही नहीं है. आप बहुत गंभीर हो जाएंगे तो नहीं चलेगा ये.

विजयवर्गीय – प्रश्न बहुत गंभीर है. जवाब – पास

दिबांग – भविष्य में आप खुद को कहा देखते हैं बीजेपी का अध्यक्ष या मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री.

विजयवर्गीय – जवाब – पास

दिबांग – पर ये तो आसान है यहां तो दोनों हाथों में लड्डू है
विजयवर्गीय – आपको दे दिए दोनों लड्डू

दिबांग – प्रधानमंत्री भड़काऊ बयान देते नहीं है आप भड़काऊ बयान देते है क्या प्रधानमंत्री की मौन स्वीकृति है या आप प्रधानमंत्री की नीतियों में विश्वास ही नहीं रखते.

विजयवर्गीय- जवाब – पास
यहां फेल हो गया तो अच्छा है वहां फेल हो गया तो

दिबांग – क्या कभी शाहरुख खान और आमिर खान बीजेपी में शामिल होना चाहें तो आपने शामिल होने देंगे हां या ना.

विजयवर्गीय – स्वागत करेंगे

दिबांग – यूपी चुनाव में बड़ा मुद्दा क्या होगा दलित मुद्दे पर चुनाव लड़ना या रामजन्म भूमि मुद्दे पर चुनाव लड़ना

विजयवर्गीय – जवाब – पास
दिबांग – ये तो बहुत आसान सवाल है
विजयवर्गीय – आपके लिए हो सकता है
दिबांग – राम मंदिर तो आपका कोर मुद्दा है
विजयवर्गीय – हम सबका साथ सबका विकास पर ही चुनाव लड़ेगे और राम मंदिर तो बनकर रहेगा और मैं आपके साथ जाकर दर्शन करूंगा ये मैं वादा करता हूं.

दिबांग – आप बयानों को वापस भी लेते हैं आप में तोल मोल के बोल वाला भाव क्यों नहीं है?

विजयवर्गीय – मैं बड़ा मस्तानी जिंदगी जीता हूं मुझे जो अच्छा लगता है मैं वो बोल देता हूं और लगता है कि कुछ गलत निकल गया तो माफी भी मांग लेता हूं.

दिबांग – आपको क्या लग रहा है कि मस्तानी जिंदगी का मतलब गैर जिम्मेदार होना है?

विजयवर्गीय – ये आपका मानना है ये मेरा मानना नहीं है मैं जिम्मेदारी से अपनी बात कहता हूं और कभी लगता है कि मुझसे गलती हो तो क्षमा भी मांग लेता हूं क्षमा मांगना कोई गैर जिम्मेदार बात नहीं है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: kailash vijayvargiya in press confrence
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: kailash vijayvargiya press confrence
First Published:

Related Stories

एबीपी न्यूज़ की खबर का असर, गायों की मौत के मामले में बीजेपी नेता गिरफ्तार!
एबीपी न्यूज़ की खबर का असर, गायों की मौत के मामले में बीजेपी नेता गिरफ्तार!

रायपुर: एबीपी न्यूज की खबर का असर हुआ है. छत्तीसगढ़ में गोशाला चलाने वाले बीजेपी नेता हरीश...

जानिए क्या है फिजिक्स के प्रोफेसर की बाइक में बम का सच
जानिए क्या है फिजिक्स के प्रोफेसर की बाइक में बम का सच

नई दिल्लीः आजकल सोशल मीडिया पर एक टीचर की वायरल तस्वीर के जरिए दावा किया जा रहा है कि वो अपनी...

19 अगस्त को गोरखपुर में होंगे राहुल गांधी, खुद के लिए नहीं लेंगे एंबुलेंस और पुलिस
19 अगस्त को गोरखपुर में होंगे राहुल गांधी, खुद के लिए नहीं लेंगे एंबुलेंस और...

लखनऊ: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 19 अगस्त को यूपी के गोरखपुर जिले के दौरे पर रहेंगे. राहुल...

नेपाल से बातचीत के जरिए ही निकल सकता है बाढ़ का स्थायी समाधान: सीएम योगी
नेपाल से बातचीत के जरिए ही निकल सकता है बाढ़ का स्थायी समाधान: सीएम योगी

सिद्धार्थनगर/बलरामपुर/गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को...

पीएम मोदी ने की नेपाल के प्रधानमंत्री से बात, बाढ़ से निपटने में मदद की पेशकश की
पीएम मोदी ने की नेपाल के प्रधानमंत्री से बात, बाढ़ से निपटने में मदद की पेशकश...

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नेपाल के अपने समकक्ष शेर बहादुर देउबा से...

एबीपी न्यूज पर दिनभर की बड़ी खबरें
एबीपी न्यूज पर दिनभर की बड़ी खबरें

1. डोकलाम विवाद के बीच पीएम नरेंद्र मोदी का चीन जाना तय हो गया है. ब्रिक्स देशों के सम्मेलन के लिए...

सरकार के रवैये से नाराज यूपी के शिक्षामित्रों ने फिर शुरू किया आंदोलन
सरकार के रवैये से नाराज यूपी के शिक्षामित्रों ने फिर शुरू किया आंदोलन

मथुरा: यूपी के शिक्षामित्र फिर से आंदोलन के रास्ते पर चल पड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद...

बाढ़ से रेलवे की चाल को लगा 'ग्रहण', सात दिनों में करीब 150 करोड़ का नुकसान
बाढ़ से रेलवे की चाल को लगा 'ग्रहण', सात दिनों में करीब 150 करोड़ का नुकसान

नई दिल्ली: असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में आई बाढ़ की वजह से भारतीय रेल को पिछले सात...

डोकलाम विवाद पर विदेश मंत्रालय ने कहा- समाधान के लिए चीन के साथ करते रहेंगे बातचीत
डोकलाम विवाद पर विदेश मंत्रालय ने कहा- समाधान के लिए चीन के साथ करते रहेंगे...

नई दिल्ली: बॉर्डर पर चीन से तनातनी और नेपाल में आई बाढ़ को लेकर शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने...

15 अगस्त को राष्ट्रगान नहीं गाने वाले मदरसों के खिलाफ होगी कार्रवाई, यूपी सरकार ने मंगवाए वीडियो
15 अगस्त को राष्ट्रगान नहीं गाने वाले मदरसों के खिलाफ होगी कार्रवाई, यूपी...

लखनऊ: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योगी सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में राष्ट्रगान गाए जाने का...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017