न्यायाधीश सुपरमैन नहीं हैं- काटजू

By: | Last Updated: Thursday, 3 July 2014 3:09 AM
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भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मार्कंडेय काटजू

नई  दिल्ली: भारत के प्रधान न्यायाधीश आर एम लोढा के अदालतों के साल भर काम करने के सुझाव पर असहमति जताते हुए उच्चतम न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश ने आज कहा कि न्यायाधीश ‘‘सुपरमैन’’ नहीं होते और उन्हें भी कुछ आराम की जरूरत पड़ती है.

 

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कन्डेय काटजू ने अपने ब्लाग में लिखा है, ‘‘भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा है कि अदालतें वर्ष में 365 दिन खुलनी चाहिए. यह कैसे संभव हो सकता है. क्या न्यायाधीशों को थोड़े आराम की जरूरत नहीं होती. क्या वे मनुष्य नहीं होते जिन्हें परिवार की देखभाल भी करनी हाती है .’’ प्रस्ताव का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न पक्ष शामिल हैं तथा यह विचार करने का काम जनता पर छोड़ देना चाहिए कि न्यायपालिका किस स्थिति में काम करे.

 

उन्होंने कहा, ‘‘यह सत्य है कि कई न्यायाधीश मेहनत से काम करते हैं और अन्य नहीं. लेकिन मेहनत से काम करने वालों को भी कुछ आराम की जरूरत है और उनका भी परिवार होता है.’’ न्यायमूर्ति काटजू ने कहा, ‘‘इसी प्रकार, वकील एवं रजिस्ट्री अधिकारियों के भी परिवार होते हैं जिनकी उन्हें देखभाल करनी होती है . मनुष्य होने के कारण उन्हें भी आराम करने की जरूरत है. मैं उन न्यायाधीशों के बारे में नहीं कह रहा जो कड़ी मेहनत नहीं करते. मैं तो बस यही अनुरोध कर रहा हूं कि जनता स्थिति पर विचार करे.’’

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