जस्टिस काटजू का दावा-यूपीए की सरकार बचाने के लिए भ्रष्टाचार के आरोपी जज का प्रमोशन, पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने नकारे आरोप

By: | Last Updated: Monday, 21 July 2014 2:09 PM
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नई दिल्ली : सुबह मीडिया में जस्टिस काटजू का दावा सामने आया . इसके बाद जैसे ही संसद की कार्यवाही शुरू हुई दोनों सदनों में ये मुद्दा उठ गया . लोकसभा में तो उस वक्त मामला संभल गया लेकिन राज्यसभा में मनमोहन सिंह से जवाब की मांग को लेकर हंगामा होने लगा और नतीजा हुआ की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी .

 

‘यूपीए की सरकार बचाने के लिए भ्रष्टाचार के आरोपी जज का प्रमोशन’, संसद में हंगामा 

काटजू का कहना है कि कुछ हफ्ते बाद जस्टिस लाहोटी ने उन्हें बताया कि उनके आरोप सही हैं. जस्टिस काटजू के मुताबिक एडिशनल जज के तौर पर दो साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उस जज को मिला एक साल का एक्सटेंशन. पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने आरोप नकार दिए हैं.

 

जस्टिस मार्कंडेय काटजू जो कि मद्रास हाईकोर्ट के जज रह चुके हैं उन्होंने दावा किया है कि तमिलनाडु की एक पार्टी ने साल 2004 में सरकार गिराने की धमकी देकर सरकार से भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे एक जज का प्रमोशन कराया था .

 

 

तमिलनाडु की पार्टी ने कहा हम सरकार गिरा देंगे तब मंत्री ने कहा कि मैनेज कर लेंगे. मद्रास हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति को गलत बताते हुए जस्टिस मार्कंडेज काटजू ने सुप्रीम कोर्ट के तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों पर भी सवाल उठाए हैं.

 

जस्टिस काटजू को सुप्रीम कोर्ट के तीन मुख्य न्यायाधीशों के नाम लेने में तो कोई हिचक नहीं हुई . लेकिन भ्रष्टाचार के कथित आरोपी मद्रास हाईकोर्ट के जज का नाम लेने से वह बचते रहे . हालांकि एबीपी न्यूज़ से बातचीत में जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने उस जज का नाम अशोक कुमार बताया है.

 

काटजू ने दावा किया है कि यूपीए की सहयोगी पार्टी जज की नियुक्ति का दबाव इसीलिए बना रही थी क्योंकि उस जज ने तमिलनाडु में उस पार्टी के बड़े नेता को जमानत दे दी थी . जस्टिस काटजू ने कहा है कि राजनीतिक पहुंच की वजह से भ्रष्टाचार के आरोपी को पहले सीधे डिस्ट्रिक्ट जज बना दिया गया गया और बाद में मद्रास हाईकोर्ट का एडिशनल जज .

 

अब कांग्रेस कह रही है कि इतने दिन तक काटजू चुप क्यों थे . सवाल ये है कि काटजू अब ये दावा क्यों कर रहे हैं . यूपीए सरकार में पीसीआई के अध्यक्ष बने जस्टिस मार्कंडेय काटजू का कार्यकाल अक्टूबर में खत्म हो रहा है. काटजू इससे पहले नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं इसलिए काटजू के खुलासे पर सवाल उठ रहे हैं. और उससे भी बड़ा सवाल ये कि क्या सच में मनमोहन सिंह ने सहयोगी की धमकी के आगे सरेंडर कर सरकार बचाने के लिए प्रमोशन किया था ?

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