क्या केजरीवाल अपने पार्टी का इलाज करेंगे?

By: | Last Updated: Monday, 16 March 2015 4:13 PM
kejriwal come delhi

नई दिल्ली: 12 दिन तक बैंगलोर में नैचुरोपैथी से अपना इलाज करवाने के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल वापस लौट आए हैं केजरीवाल की शुगर भी कंट्रोल में है और खांसी भी. इलाज के बाद केजरीवाल तो फिट हो गए हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी काफी बीमार हो गई है. पार्टी को कई  रोग लग गए हैं. अब सवाल ये है कि केजरीवाल अपनी पार्टी का इलाज कैसे करेंगे?

 

बैंगलोर में केजरीवाल योग और प्राणायाम से अपना इलाज करवा रहे थे. और दिल्ली में पार्टी के भीतर हड़कंप मचा हुआ था. केजरीवाल जलनेति क्रिया से नाक की सफाई कर रहे थे और दिल्ली में पार्टी के ही नेता एक दूसरे पर कीचड़ उछालकर पार्टी की नाक कटवा रहे थे.

 

बेकाबू शुगर और खांसी से परेशान केजरीवाल ने 12 दिनों के इलाज से खुद को तो फिट कर लिया है लेकिन केजरीवाल की गैरमौजूदगी में उनकी आम आदमी पार्टी बीमार हो गई है.

 

तय है कि प्रृकति की गोद में बिना दवा के इलाज करा रहे केजरीवाल को सोचने का वक्त भी मिला है और काम करने की ऊर्जा भी. लेकिन सवाल ये है कि केजरीवाल की ये ऊर्जा दिल्ली के लिए काम करने में लगेगी या फिर अपनी बीमार पार्टी का इलाज करने में. क्योंकि पार्टी को दुरुस्त किए बिना केजरीवाल के लिए काम करना मुश्किल हो सकता है.

 

5 मार्च को केजरीवाल इलाज के लिए रवाना हुए थे 12 दिन बाद वापस लौटे हैं लेकिन इन 12 दिनों में आम आदमी पार्टी को कई रोग लग गए हैं.

 

स्टिंग का रोग

 

आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ा रोग स्टिंग का लगा है. और स्टिंग में सबसे पहले पार्टी का किंग फंसा है. लोकसभा चुनाव के बाद पिछले साल जब दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा था तब यहां सरकार बनाने को लेकर सरगर्मी तेज थी . आप के पूर्व विधायक राजेश गर्ग ने पिछले दिनों एक रिकॉर्डिंग जारी कर दावा किया कि केजरीवाल ने उनसे तब कांग्रेस के 6 विधायकों को तोड़ने के लिए कहा था .

 

केजरीवाल- मैं बताऊं आपको ..अब आप इसको.. 6 को अलग करवाने का ही शुरू करवाओ. 6 लोग अलग करके अपनी पार्टी बनाकर हमें बाहर से समर्थन कर दें. 

राजेश गर्ग- मैं प्लान करता हूं..मैं आज

केजरीवाल- ये 6 लोग अगर अलग टूटकर…ये बीजेपी को जा रहे थे..बीजेपी में जा नहीं पाए क्योंकि इनमें तीन मुसलमान हैं.

राजेश गर्ग- तीन मुस्लिम हैं वो नहीं जाएंगे बीजेपी में. वो कह रहे हैं कि…

केजरीवाल- वो जा नहीं पाए तो वो 6 फिर हमें ही समर्थन कर दें बाहर से

 

राजेश गर्ग को पार्टी से बाहर कर दिया गया है. ये फैसला केजरीवाल के बिना जानकारी के तो हुआ नहीं होगा. लगता है कि इस रोग का यही इलाज ढूंढा है केजरीवाल ने.

 

सवाल पर सजा का रोग

 

पार्टी के दो वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को लेकर खूब हंगामा हुआ. 4 मार्च को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पीएसी से बाहर कर दिया गया था .  केजरीवाल इस मुद्दे पर बिना कुछ बोले इलाज के लिए बैंगलोर चले गए लेकिन दिल्ली में प्रशांत और योगेंद्र के खिलाफ बोलने वालों की आवाज नहीं रुकी .

 

आरोप लगे कि सब कुछ केजरीवाल के इशारे पर हो रहा है और सवाल ये उठे कि डेमोक्रेसी का ढोल पीटने वाली आम आदमी पार्टी में क्या सवाल उठाने वाले को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है. दोनों को पार्टी से बाहर करने की आवाजें भी उठने लगी हैं. तो क्या योगेंद्र और प्रशांत को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाएंगे केजरीवाल ?

 

एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का रोग

 

अरविंद केजरीवाल दिल्ली के रामलीला मैदान से लेकर बैंगलोर तक तीन बार ये गाना जनता को सुना चुके हैं संदेश भाईचारे का लेकिन आम आदमी पार्टी में एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का सिलसिला शुरू हुआ उसने पार्टी की खूब किरकिरी करवाई.

 

योगेंद्र और प्रशांत को पीएसी से बाहर करने के बाद मीडिया में पार्टी के फैसले खिलाफ माहौल बनने लगा तो पार्टी के चार नेताओं ने चिट्ठी लिखकर ये बात सार्वजनिक कर दी कि योगेंद्र और प्रशांत को पीएसी से बाहर क्यों किया गया है.

 

दिल्ली से बाहर पैर पसारने का रोग

 

दूसरी बार दिल्ली के सीएम पद की शपथ लेते वक्त ही केजरीवाल ने साफ कर दिया था कि पांच साल तक वो पूरा ध्यान सिर्फ दिल्ली पर देंगे. लेकिन पार्टी के कई नेताओं को ये मंजूर नहीं था क्योंकि वो दिल्ली के बाहर आम आदमी पार्टी का झंडा फहराना चाहते थे.

 

योगेंद्र और प्रशांत भूषण पार्टी को दिल्ली से बाहर ले जाने के पक्षधर हैं और पार्टी में विवाद की एक बड़ी वजह ये भी है. शायद इसीलिए बैंगलोर में भी केजरीवाल ने योगेंद्र और प्रशांत को अपना संदेश दे दिया है

 

पार्टी की साख पर सवाल

 

सबसे ज्यादा चिंता करने वाला रोग पार्टी की साख से जुड़ा हुआ है क्योंकि इस पार्टी की नींव ही अलग तरह की ईमानदार राजनीति है लेकिन जब पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव शाहिद आजाद ने केजरीवाल पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया तो साख को धक्का पहुंचा . शाहिद का दावा है का पार्टी की एक बैठक में केजरीवाल धर्म के नाम पर टिकट की बात कह रहे थे. हालांकि पार्टी ने टेप को नकारते हुए शाहिद की मंशा पर ही सवाल उठाए हैं.

 

लेकिन पहले स्टिंग में नाम फिर धर्म के नाम पर राजनीति जैसे आरोप पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं इन विवादों की वजह से ही उनकी प्रशंसक रही अंजलि दमानिया ने पार्टी से ही इस्तीफा दे दिया  .

 

चुनौती गंभीर है एक तरफ केजरीवाल को दिल्ली से किए वादे पूरे करने हैं और दूसरी तरफ पार्टी के इन रोगों का इलाज करना है क्योंकि रोग ज्यादा दिन तक ठहर जाएं तो शरीर में घर बना लेते हैं. केजरीवाल की तरह ही पार्टी को भी प्राणायाम की जरूरत है. लेकिन उसके लिए पार्टी बैंगलोर तो जा नहीं सकती. देखते हैं वापस आने के बाद केजरीवाल कौन सी दवा का इस्तेमाल करके पार्टी को पटरी पर लेकर आएंगे.

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