केजरीवाल की कथनी और करनी में फर्क देखिए!

By: | Last Updated: Thursday, 12 March 2015 1:31 PM

नई दिल्ली: भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चला रहे अरविंद केजरीवाल ने जब राजनीति में आने का फैसला किया तो एक बात बहुत स्षष्ट की थी कि वे नई तरह की राजनीति करेंगे और व्यवस्था को बदलेंगे लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि वे कुछ नया कर रहे हैं. आज जो कुछ सामने आ रहा है उससे सवाल उठ रहा है कि क्या केजरीवाल की कथनी और करनी में फर्क है?

 

केजरीवाल कहते थे कि हम राजनीति में व्यवस्था को बदलेंगे. अरविंद केजरीवाल जब राजनीति में अपना पहला कदम रख रहे थे जो कुछ ऐसे वादे किए थे. लेकिन 49 दिनों तक सत्ता का सुख भोगने के बाद और फिर दोबारा सरकार बनाने से पहले केजरीवाल कुछ इस तरह से जोड़-तोड़ की राजनीति करते नजर आए.

 

‘केजरीवाल ने की थी कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की कोशिश’ इस लिंक पर क्लिक करके सुनिए पूरा ऑडियो…

 

जिसने सुना वो हैरान रह गया. नई तरह की राजनीति की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल विधायकों की जोड़-तोड़ का हिसाब लगा रहे थे. धर्म और जाति से ऊपर की राजनीति करने का दावा करने वाले केजरीवाल मुसलमान विधायकों की दिशा तय कर कर रहे थे.

 

दिल्ली में 49 दिनों तक सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने कुर्सी छोड़ दी थी और इस्तीफा इसी नाम पर दिया था कि लोगों का भला नहीं कर पा रहे. लेकिन आम आदमी पार्टी में जो हो रहा है औऱ जो दिख रहा है वो तो उसी राजनीति का हिस्सा है जो दशकों से होती रही है इसमें नया क्या है.

 

केजरीवाल की पार्टी के दो सदस्यों योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने पार्टी के फैसलों और नीतियों पर सवाल उठाए तो पार्टी के दो संस्थापक सदस्यों को राजनैतिक मामलों की समिति यानी पीएसी से बाहर निकाल दिया गया. बैठक में अरविंद केजरीवाल शामिल नहीं थे लेकिन पार्टी के दूसरे धड़े ने आरोप लगाया कि ये सब कुछ केजरीवाल के इशारे पर हो रहा है. और इसकी पुष्टि की महाराष्ट्र में पार्टी के सबसे बड़े नेता और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य मयंक गांधी ने. मयंक ने ब्लॉग में लिखा कि प्रचार के दौरान प्रशांत भूषण ने उम्मीदवारों के चुनाव को लेकर पार्टी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की कई बार धमकी दी थी. योगेंद्र पर पार्टी के खिलाफ साजिश रचने के आरोप लगे. 26 फरवरी की बैठक में केजरीवाल ने कहा था कि अगर प्रशांत और योगेंद्र पीएसी में रहे तो वे उनके साथ काम नहीं कर पाएंगे.

 

इसका मतलब ये है कि पार्टी में कोई भी सवाल उठाएगा तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा तो फिर केजरीवाल के पार्टी में डेमोक्रेसी के वादे का क्या हुआ?

 

केजरीवाल ने कहा था उम्मीदवारों की जांच होगी. केजरीवाल ने ईमानदार उम्मीदवारों को टिकट देने का फैसला किया था लेकिन योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि उनके दबाव डालने के बाद ही उम्मीदवारों की जांच हुई जिनके खिलाफ शिकायतें मिली थीं.

 

गंभीर सवाल उठ रहे हैं पार्टी में मचे घमासान से लेकर केजरीवाल के स्टिंग तक पर जवाब देने के लिए केजरीवाल मौजूद नहीं हैं क्योंकि वे तो बैंगलोर में अपना इलाज करवा रहे हैं अब लग ये रहा है कि पार्टी को भी ऐसे ही इलाज की जरूरत है.

 

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Web Title: kejriwal statement
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