JNU: उमर खालिद सहित 5 फरार छात्र कैंपस लौटे, गिरफ्तारी पर सस्पेंस

By: | Last Updated: Monday, 22 February 2016 1:21 PM
Khalid and other absconding students attend meet in JNU

नई दिल्ली : जेएनयू कांड के जिस आरोपी उमर खालिद की पुलिस तलाश कर रही थी वो कल शाम खुद ही जेएनयू पहुंच गया. उमर समेत जेएनयू कांड के पांच आरोपी भी जेएनय़ू कैंपस पहुंच गए. शाम करीब 6 बजे से लेकर रात के आठ बजे के बीच ये लोग जेएनयू पहुंचे.

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उमर खालिद और बाकी आरोपियों ने जेएनयू में छात्रों को संबोधित भी किया. जेएनयू के बाहर पुलिस वाले मौजूद थे लेकिन फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. कल रात करीब 20 मिनट तक पुलिस की 5 गाड़ियां जेएनयू के मुख्य गेट पर खड़ी रही और फिर वापस आ गईं.

इन छात्रों ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया बल्कि ‘डॉक्टर्ड वीडियो’ का इस्तेमाल कर उन्हें फंसाया गया.

umar khalid

इस दौरान उमर खालिद ने कहा कि उसके पास पासपोर्ट नहीं है ऐसे में दो बार पाकिस्तान जाने की बात गलत है. साथ ही उसने कहा कि खाड़ी देशों में बातचीत का पुलिस सबूत पेश करे. यही नहीं खालिद ने यह भी कहा कि आदिवासियों को माओवदी करार दिया जा रहा है और मुसलमानों को आतंकवादी.

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साथ ही छात्रों ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया बल्कि ‘डॉक्टर्ड वीडियो’ का इस्तेमाल कर उन्हें फंसाया गया. छात्रों ने कहा, ‘वे आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, बल्कि पुलिस आकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है.’ ये पांच छात्र हैं उमर खालिद, अनिर्बन भट्टाचार्य, रामा नागा, आशुतोष कुमार और अनंत प्रकाश.

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ये राजद्रोह के मामले में जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की 12 फरवरी को गिरफ्तारी के बाद से लापता हो गए थे. आशुतोष के अनुसार, ‘वे जांच में मदद के मद्देनजर वापस आए हैं. छात्रों और दुनियाभर से हमें जो अपार समर्थन मिला है उसने हमें ताकत दी है. मैं, रामा, अनिर्बन और अनंत आस-पास ही थे लेकिन भीड़ के पीट-पीटकर मारने पर उतारू होने के माहौल की वजह से हम सामने नहीं आए.’

जांच में सहयोग की पेशकश

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आशुतोष के अनुसार, ‘‘वे जांच में मदद के मद्देनजर वापस आए हैं. छात्रों और दुनियाभर से हमें जो अपार समर्थन मिला है उसने हमें ताकत दी है. मैं, रामा, अनिर्बन और अनंत आस-पास ही थे लेकिन भीड़ के पीट-पीटकर मारने पर उतारू होने के माहौल की वजह से हम सामने नहीं आए.’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि वे चारों उमर खालिद के संपर्क में नहीं थे और उससे उनकी कार्यक्रम के दिन नौ फरवरी को बातचीत हुई थी.

आशुतोष ने कहा कि छात्र दिल्ली में ही थे और रविवार की शाम को लौटने का फैसला व्यक्तिगत तौर पर किया गया, न कि सामूहिक तौर पर.

उन्होंने कहा, ‘‘हमने कुछ भी गलत नहीं किया, बल्कि डॉक्टर्ड वीडियो का इस्तेमाल करके हमें फंसाया गया. हम अब कहीं नहीं जाएंगे और विश्वविद्यालय को राष्ट्रविरोधी के तौर पर पेश किए जाने के खिलाफ आंदोलन का हिस्सा बनेंगे.’’ इस बीच विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीश कुमार ने कहा कि फिलहाल पुलिस और मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है और इस संबंध में फैसला कल सुबह किया जाएगा.

विश्वविद्यालय के सूत्रों ने बताया कि कुछ अन्य छात्रों जिनके बारे में पुलिस ने अधिकारियों से सूचना मांगी थी वो भी कैंपस में दिखाई पड़े. इन छात्रों में रियाज और रूबीना शामिल हैं.

क्या है जेएनयू कांड?

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नौ फरवरी को जेएनयू में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन की तरफ से अफ़ज़ल गुरु की बरसी पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. सांस्कृतिक संध्या के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में कश्मीर की आजादी पर चर्चा होनी थी और अफजल गुरु से जुड़ी एक फिल्म भी दिखाई जानी थी. सांस्कृतिक संध्या के लिए के लिए पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इजाजत दी थी लेकिन कार्यक्रम शुरु होने से बीस मिनट पहले उसे रद्द कर दिया गया. बावजूद इसके डीएसयू के उमर खालिद की अगुवाई में कार्यक्रम हुआ और उसमें देश विरोधी नारे लगे. वहां मौजूद ABVP के लोगों ने इसका विरोध किया और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन के खिलाफ नारेबाजी की.

कार्यक्रम के दौरान वहां पुलिस मौजूद थी लेकिन वो मूकदर्शक बनी रही.

ABVP ने अगले दिन थाने में शिकायत दर्ज करवाई और यूनिवर्सिटी कैंपस में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया. ग्यारह फरवरी को बीजेपी सांसद महेश गिरी ने वसंतकुंज थाने जाकर FIR दर्ज करवाई. पुलिस ने अज्ञात लोगों पर धारा 124 A के तहत केस दर्ज किया. बारह फरवरी को जांच के लिए पुलिस जेएनयू पहुंची और छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया.

कन्हैया के अलावा FIR में कार्यक्रम के आयोजक उमर खालिद समेत पांच और लोगों के नाम हैं. दिल्ली पुलिस का दावा है कि उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कन्हैया ने भी देश विरोधी नारे लगाए थे.

15 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया की पेशी के दौरान वकीलों ने पत्रकारों और कोर्ट में मौजूद जेएनयू के छात्रों के साथ मारपीट की. कोर्ट में कन्हैया की पेशी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा निर्देश के बावजूद 17 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में फिर हंगामा हुआ. वकीलों ने पेशी के दौरान कन्हैया पर हमला किया. पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी हुई.

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