काले चश्मे से चर्चा में आए दंबग डीएम अमित कटरिया की पूरी कहानी

By: | Last Updated: Saturday, 16 May 2015 5:45 PM
Know the ‘Dabang’ DM who was given notice for wearing sunglasses while receiving PM Modi

नई दिल्ली: एबीपी न्यूज आज आपको बताने जा रहा है छत्तीसगढ़ के उस दंबंग डीएम की पूरी कहानी जो पीएम से मुलाकात के वक्त काला चश्मा पहनने की वजह से चर्चा में आए और प्रोटोकॉल तोड़ने के लिए सीएम ने उन्हें नोटिस भेज दिया.

 

लेकिन नीचे दिए गए वीडियो में आप देखेंगे कि उन्हीं डीएम अमित कटारिया के काम करने का अंदाज जिन्होंने बीजेपी एमएलए को अपने दफ्तर से बाहर निकाल दिया.

 

आप चौंक जाएँगे कि जिस बीजेपी नेता को इस वीडियो में बस्तर के डीएम अमित कटारिया ने बाहर निकाला था वो भी उनकी तारीफ करते हैं. ये उसी अमित कटारिया की कहानी है जो पीएम मोदी के सामने काला चश्मा पहनने की वजह से प्रोटोकॉल तोड़ने के दोषी करार दे दिए गए हैं.

 

प्रोटोकॉल के इस पेंच में फंसने से पहले अमित कटारिया को देश में कोई नहीं जानता था लेकिन अब चर्चा शुरू हुई है तो कटारिया के करियर में हुए करिश्माई कामों की चर्चा भी हो रही है वो भी बताएंगे लेकिन पहले ये वीडियो देखिए.

‘दबंग’ डीएम अमित कटरिया की पूरी कहानी 

ये तस्वीरें उस वक्त की हैं जब अमित कटारिया बस्तर के नहीं बल्कि रायगढ़ के कलेक्टर थे. साल 2013 के इस वीडियो में अमित शहर में एक नई सड़क बनाने को लेकर आम जनता से राय ले रहे थे. इसी बैठक में बीजेपी के बड़े नेता रोशनलाल भी मौजूद थे. अब रोशनलाल रायगढ़ से बीजेपी के विधायक भी बन चुके हैं. बात शुरू हुई तो जनता के हक की बात उठी और रौशनलाल अतिक्रमण करने वालों का पक्ष लेने लगे.

 

अमित कटारिया ने भी उन्हें समझाने की कोशिश की कि बिना अतिक्रमण तो नई सड़क बनेगी नहीं. बहस शुरू हुई और जिद के पक्के अमित कटारिया को आ गया गुस्सा. देखिए फिर क्या हुआ.

 

बीजेपी नेता को अमित कटारिया ने बाहर का रास्ता दिखा दिया. ना विकास से समझौता किया और ना ही नेता के खौफ ने सताया. अब बारी है चौंकने की क्योंकि वही नेता रौशनलाल आज रायगढ़ की तस्वीर चमकाने के लिए अमित कटारिया की तारीफ कर रहे हैं.

 

कटारिया की तारीफ आपको हर उस जगह सुनने को मिल जाएगी जहां उन्होंने काम किया है. रायगढ़ के लोग तो रायगढ़ में विकास की सिर्फ एक वजह जानते हैं और वो हैं अमित कटारिया सबका यही कहना है की अमित कटारिया ने ही रायगढ़ की तस्वीर बदलकर रख दी.

 

रायगढ़ के लोगों की माने तो रायगढ़ में कटारिया के कार्यकाल में करीब 4 करोड़ का गरीबों का मुफ्त इलाज भी हुआ. जिला अस्पताल के सिविल सर्जन भी इस बात को मान रहे हैं की कटारिया साहब ने हमेशा अस्पताल प्रबंधन का साथ दिया.

 

रायगढ़ से पहले यानी साल 2009 में वो रायपुर में तैनात थे. पहले बतौर नगर निगम के कमिश्नर के तौर पर और फिर रायपुर डेवलपमेंट अथारिटी के सीईओ के तौर पर. ये तस्वीरें उसी दौर की हैं जब अमित कटारिया ने रायपुर की तस्वीर बदलने की जिद ठान ली थी.

 

रायपुर को उसके ही अतिक्रमण ने निगल लिया था और अमित कटारिया बुलडोजरों के जरिए रायपुर में सड़कों को खाली करवा रहे थे. तरीका ये था कि अतिक्रमण हटाने का काम शुक्रवार या शनिवार को ही किया जाता था ताकि अमित कटारिया के इरादों के आड़े कोर्ट का स्टे ऑर्डर ना लिया जा सके. जिद पूरी हुई तो रायपुर का नक्शा भी बदल गया.

 

अमित कटारिया 2010 में रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के सीईओ बनते ही उन्होंने छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट को लांच किया. कमला विहार नाम का ये प्रोजेक्ट आज भी रायपुर के विकास की पहचान बना हुआ है.

 

धर्मेंद्र और भी बहुत कुछ बताते हैं. अमित कटारिया ने आरडीए के कर्मचारियों के 15 साल से रुके हुए प्रमोशन्स को दोबारा शुरू करवाया था यही नहीं कर्मचारियों को अच्छे कपडे पहनने और सलीके से रहना भी अमित कटारिया की ही देन थी.

 

अमित कटारिया की मेहनत का एक और नतीजा भी देख लीजिए. ये है छत्तीसगढ़ सरकार का सपना– नया रायपुर. एक ऐसा योजनाबद्ध शहर जो छत्तीसगढ़ की पहचान बदल दे. सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को परवान चढ़ाने की अहम जिम्मेदारी के लिए जिस शख्स को चुना गया वो भी अमित कटारिया ही थे.

 

इसके बाद ही अमित कटारिया 2 मार्च को बस्तर के कलेक्टर बनाये गए जहां एक काले चश्मे ने उन्हें चर्चा में ला दिया है. लेकिन लोगों का कहना है कि ऐसा पहला अफसर जगदलपुर आया है जो दरभा घाटी और झीरम घाटी जैसी जगहों में जाकर ग्रामीणो की समस्या सुनता है. वो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाकर जन शिविर में खुद शामिल हो रहे हैं और ग्रामीणो की समस्या सुन रहे हैं. जगदलपुर के लोगों का कहना है की उन्हें इस कलेक्टर से काफी उम्मीद है.

 

कलेक्टर बनना अमित का सपना था. पहले दिल्ली के डीपीएस आरके पुरम से स्कूली पढ़ाई और फिर दिल्ली आईआईटी जैसे संस्थान में दाखिला लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित कर दी थी. आईएएस की नौकरी की शुरुआत में बतौर वेतन सिर्फ एक रुपया लिया करता था कहते हैं वो तनख्वाह के लिए नहीं जुनून के लिए काम करते हैं.

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Web Title: Know the ‘Dabang’ DM who was given notice for wearing sunglasses while receiving PM Modi
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