जानें आंकड़ें- आखिर क्यों कहा जा रहा है अबकी बार मंदी लाई सरकार?

जानें आंकड़ें- आखिर क्यों कहा जा रहा है अबकी बार मंदी लाई सरकार?

आपको जानकर हैरानी होगी कि चालू खाते के घाटा पिछले चार साल में सबसे ज्यादा हो गया है. दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ सालों के मुकाबले निचले स्तर पर हैं लेकिन भारत में पेट्रोल की कीमतों में आग लगी हुई है.

By: | Updated: 27 Sep 2017 09:17 PM

नई दिल्ली: मंदी को लेकर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पार्टी के अंदर ही घेरने की कोशिश की गई है.  बीजेपी के बड़े नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं. सिन्हा ने मंदी, नोटबंदी और जीएसटी को लेकर सरकार की आलोचना की है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मोदी सरकार को मंदी लाई सरकार क्यों कहा जा रहा है?


सबसे पहले बात करते हैं आर्थिक विकास दर की. जीएसटी लागू होने से पहले यानी जुलाई से सितंबर 2016 में ये 7 फीसदी थी, लेकिन जीएसटी के बाद अप्रैल से जून 2017 की तिमाही में गिरकर 5.7 फीसदी पर पहुंच गयी.


विकास दर को लेकर अलग-अलग कंपनियों का अनुमान


यही नहीं दुनिया की अलग-अलग कंपनियां जो विकास दर का अनुमान लगाती हैं, उनके मुताबिक भी भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत ठीक नहीं रहने वाली. 2017-18 के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक ने विकास दर को 7.4% से घटाकर 7% कर दिया है,.  क्राइसिल ने भी 7.4% से घटाकर 7% रहने का अनुमान जताया है. ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी यूबीएस के मुताबिक भारत की विकास दर 7.2% से घटकर 6.6% होने वाली है.


भारत में पेट्रोल की कीमतों में लगी आग


आपको जानकर हैरानी होगी कि चालू खाते के घाटा पिछले चार साल में सबसे ज्यादा हो गया है. दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ सालों के मुकाबले निचले स्तर पर हैं लेकिन भारत में पेट्रोल की कीमतों में आग लगी हुई है.


दिल्ली की बात करें तो जून 2014 में यहां पर 71 रूपए 51 पैसे का पेट्रोल था लेकिन सितंबर 2014 में इसकी कीमत 70.41 रू है. आपको फर्क ज्यादा नहीं लग रहा होगा लेकिन आपको हैरानी होगी कि जून 2014 में कच्चा तेल करी 6750 रूपए प्रति बैरल था, जबकि इस महीने फिलहाल 3200 रूपए प्रति बैरल है.


यूपीए के वक्त पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9 रूपए 48 पैसे थी, जबकि एनडीए सरकार में फिलहाल ये 21 रूपए 48 पैसे हो चुकी है. मोदी सरकार में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9 बार बढ़ चुकी है.


नौकरियों की बात करें तो प्रधानमंत्री मोदी ने हर साल एक करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन नौकरियों का ये वादा हकीकत से मीलों दूर है.




  • 2014 में 2 लाख 75 हजार नौकरियां मिलीं

  • 2015 में 1 लाख 35 हजार नौकरियां मिलीं

  • 2016 में 2 लाख 31 हजार नौकरियां मिलीं


यानी अब तक मोदी सरकार में कुल 6 लाख 41 हजार नौकरियां ही मिल पायी हैं.


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