जानें- दुनिया के किन-किन शहरों में है ऑड-इवेन फॉर्मूला, क्या रहे नतीजे

By: | Last Updated: Saturday, 5 December 2015 2:20 PM
Know: Which cities have adopted Odd-even formula

नई दिल्ली : सड़कों पर गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार जिस फॉर्मुले का इस्तेमाल करने जा रही है, उसे इसके पहले दुनिया के कई बड़े शहरों में आजमाया जा चुका है. लगभग सभी जगह इसकी वजह से प्रदूषण में कमी तो आई लेकिन फिर भी ज्यादातर जगहों पर अभी तक इस प्रयोग को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है. क्योंकि लोगों ने इसकी तोड़ के तौर पर दूसरे रास्ते निकाल लिए हैं.

 

दुनिया के नक्शे पर बीजिंग, पेरिस, लंदन, मेक्सिको सिटी, साओ पाउलो (ब्राजील) वो बड़े शहर हैं जहां एक दिन ऑड और दूसरे दिन इवेन नंबर वाली गाड़ियों को चलाने का नियम किसी न किसी रूप में लागू किया गया है.

 

माना जाता है कि इनमें से चीन में यह व्यवस्था सबसे ज्यादा सफल रही. चीन की राजधानी बीजिंग में रोजाना करीब 40 लाख प्राइवेट कारें सड़कों पर दौड़ती हैं. इसी को देखते हुए 2008 में ओलंपिक के दौरान बीजिंग में यह प्रयोग किया गया कि एक दिन ऑड और दूसरे दिन इवेन नंबर वाली गाड़ियां चलेंगी. इसका असर यह हुआ कि उन दिनों गाड़ियों से होने प्रदूषण में करीब 40% की कमी हुई. जिसका नतीजा यह हुआ कि सरकार ने ओलंपिक खत्म होने के बाद भी हफ्ते में एक दिन इस व्यवस्था को जारी रखा. यानी ऐसा सिस्टम बनाया जिसमें हर गाड़ी हफ्ते में कम से कम एक दिन सड़क पर नहीं चल सकती.

 

इसके बावजूद बीजिंग में प्रदूषण और उसकी वजह से होने वाली धुंध एक बड़ी समस्या बनी रही. इस प्रदूषण को कम करने के लिए बीजिंग में 2013 में एक बार फिर ऑड और इवेन नंबर वाली गाड़ियों के चलने का सिस्टम शुरू किया गया. इस बार यह व्यवस्था सिर्फ उन दिनों के लिए लागू की गई जब शहर में प्रदूषण और धुंध सामान्य से ऊपर पहुंच जाए.

 

फ्रांस की राजधानी पेरिस में 2014 में प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने यह नियम लागू किया कि कुछ समय के लिए सोमवार के दिन केवल ऑड नंबर वाली गाड़ियां ही सड़क पर उतरेंगी. सरकारी सूत्रों का दावा था कि इससे प्रदूषण में कमी आई. इसके बाद इस साल 23 मार्च को फिर एक दिन के लिए यह प्रयोग किया गया. लेकिन इसे अभी तक स्थायी व्यवस्था नहीं बनाया गया है.

 

मेक्सिको सिटी में 1989 में गाड़ियों के नंबर की आखिरी संख्या के आधार पर ऐसी व्यवस्था शुरू की गई जिसमें हर गाड़ी पर हफ्ते में कम से कम एक दिन के लिए सड़क पर निकलने पर रोक लगी. दावा किया जाता है कि इसकी वजह से वहां प्रदूषण में कमी आई और हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा 11% कम हो गई. लेकिन लोगों ने इस नियम से बचने के लिए दूसरी गाड़ी के तौर पर सेकेंड हैंड गाड़िया खरीदनी शुरू कर दीं. जिसका नतीजा यह हुआ कुछ समय बाद हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा औसतन 13% बढ़ गई.

 

लंदन में 2012 के ओलंपिक के समय ऐसा ही प्रयोग किया गया. इसका फायदा होते देख 2013 में सेंट्रल लंदन में सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे के बीच आने वाली गाड़ियों पर कंजेशन टैक्स लगा दिया गया. पार्किंग भी इतनी महंगी कर दी गई कि लोगों के लिए गाड़ियां निकालना आसान नहीं रह गया.

 

ब्राजील के शहर साओ पाउलो में 1996 में पहली ऑड और इवेन नंबर वाली गाड़ियों का प्रयोग किया गया, इसके बाद 1997 से इस व्यवस्था को स्थायी तौर पर लागू कर दिया गया. वहां पर इस नियम को तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है.

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017