व्यक्ति विशेष: आईपीएल का तिलिस्मी तांत्रिक!

By: | Last Updated: Saturday, 4 July 2015 2:37 PM
व्यक्ति विशेष:  आईपीएल का तिलिस्मी तांत्रिक!

रुतबा, शोहरत और ऐसी इज्जत भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कम लोगों को नसीब हुई है. कम वक़्त में कामयाबी की लंबी छलांग लगाने वाला एक शख्स बतौर खिलाड़ी कभी क्रिकेट के मैदान पर तो नहीं उतरा लेकिन अपनी हुनरमंदी से इसने देश में क्रिकेट की चाल और चेहरा बदल कर रख दिया. क्रिकेट के गलियारों में गूंजने वाला ललित मोदी वो नाम है जिसने आज सत्ता के गलियारों में भूचाल खड़ा कर दिया है. कानून के लंबे हाथों से दूर, सात समंदर पार इंग्लैड में बैठे हैं ललित मोदी औऱ वो वहीं से देश के दिग्गजों पर बरसा रहें है ट्विटर के तीर. तरह – तरह के काले धन से जगमग आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग के जनक ललित मोदी की करतूतों और उनके ट्वीटों से जहां सत्तारुढ़ बीजेपी सरकार की जान सांसत में है वहीं गांधी परिवार और शरद पवार जैसे विपक्ष के दिग्गज खुद पर लगे आरोपों की सफाई देते फिर रहे हैं.

 

ललित मोदी के लगाए आऱोपो की जद में पक्ष औऱ विपक्ष दोनों नजर आ रहे हैं लेकिन ज्यादा दबाव बीजेपी पर है क्योंकि मोदी के आरोपों में विपक्ष के नेताओं के नाम बताए जा रहे हैं तो वहीं बीजेपी नेताओं से जुड़े दस्तावेज कैमरों पर लहराए जा रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में सामने आए ललितगेट ने मानों भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में पैसे और राजनीति का पूरा पिटारा ही खोल कर रख दिया है. दरअसल आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी ने क्रिकेट को पैसे कमाने की एक ऐसी मशीन में तब्दील कर दिया जिस तक हर प्रभावशाली व्यक्ति अपनी पहुंच बनाना चाहता था. और यही वजह है कि ललितगेट में कई दलों के नेताओं के नाम सामने आ रहे है.

 

आईपीएल, महज ये एक नाम नहीं है. ये एक जलवा और जूनून भी है जो एक नशा बनकर साल 2008 में क्रिकेट के आसमान पर छा गया था. आईपीएल क्रिकेट के करोडों चाहने वालों के लिए आज एक शुरुर बन चुका है तो वहीं सैकड़ों खिलाड़ियों का नसीब भी. क्योंकि इसमें जहां दौलत की खान है तो वहीं शोहरत की नई पहचान भी है. यूं तो आईपीए के इस साये में कई लोगों की किस्मत परवान चढ़ी है लेकिन इनमें भी कुछ बेहद ही खास है. कुछ बड़े उद्योगपति हो या फिर बॉलीवुड के सुपर सितारे, इन सभी ने आईपीएल के सहारे अरबों का कारोबार किया है. आईपीएल के जनक ललित मोदी ने इसे एक ऐसी मनी मशीन में तब्दील कर दिया जिसने करोड़ो रुपये उगले लेकिन साथ ही आईपीएल के गर्भ ने कई संगीन इल्जाम भी निकले हैं और इन इल्जामों के सबसे बड़े शिकार बने हैं खुद ललित मोदी.

 

 

साल 2008 में आईपीएल की कामयाबी ने ललित मोदी को एक ही झटके में क्रिकेट के दिग्गजों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया था लेकिन आज उसी आईपीएल में हुए घोटालों की वजह से वो देश से बाहर भागे–भागे फिर रहे हैं. दरअसल सितंबर 2010 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से बाहर निकाले जाने के कुछ महीनों बाद ललित मोदी के खिलाफ कई मुकद्दमें दर्ज किए हुए थे. और इसके बाद इनफोर्समेंट डिपार्टमेंट के पूछताछ करने की आशंका के डर से वो लंदन चले गए थे. आखिर क्यों ललित मोदी देश छोड़कर भागे इस कहानी की पडताल से पहले बात उनके ट्विटर के तीरों की जिनका निशाना देश के कई दिग्गज बने हैं.

 

यूं तो पिछले कुछ दिनों से चर्चित ललितगेट में कई नामों का खुलासा हुआ है. लेकिन ललितगेट में ललित मोदी के अलावा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, एनसीपी नेता शरद पवार, और कांग्रेस नेता शशि थरुर के अलावा राजीव शुक्ला ये छह अहम किरदार सामने आए हैं. अब ललितगेट में इन छह किरदारों का कथित रोल भी समझ लीजिए. सबसे पहले बात ललित मोदी की. देश में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी मोदी के खिलाफ 16 मामलों की जांच कर रहा  है. ललित मोदी और अन्य लोगों के द्वारा 1,681 करोड़ रुपये की कर चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों की जांच जारी हैं लेकिन क्रिकेट के इस पूर्व प्रशासक के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात वो मामला हैं जो सोनी – एमएसएम के साथ 1.02 अरब डॉलर के प्रसारण सौदे से संबंधित हैं. ललित मोदी पर आरोप है कि उन्होंने आईपीएल के ग्लोबल टीवी अधिकारों से हटने के लिए मॉरीशस की कंपनी वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप (डब्ल्यूएसजी) को 8 करोड़ डॉलर के भुगतान के लिए प्रावधान तैयार किए. दरअसल डब्ल्यूएसजी ने 10 साल के लिए 2008 में 91.8 करोड़ डॉलर में अनुबंध हासिल किया था. लेकिन ये सौदा रद्द हो गया था और फिर सिंगापुर की सोनी –एमएसएम (मल्टी स्क्रीन मीडिया सैटेलाइट) के साथ नया अनुबंध किया गया था. जबकि डब्ल्यूएसजी का बीसीसीआई से ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं था लिहाजा, इसमें फेमा यानी फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट का उल्लंघन माना जा रहा है. ईडी के अधिकारियों को ये भी संदेह है कि इन दो कंपनियों के बीच 125 करोड़ रुपये के लेन – देन से लाभ उठाने वालों में ललित मोदी का नाम भी हो सकता है. इसके अलावा मैच फिक्सिंग में आरोपी ललित मोदी पर मनी लॉन्ड्रिंग केस में भी एक एफआईआर दर्ज हुई है.

 

फेमा मामले में फंसे ललित मोदी साल 2010 में देश छोड़ कर ब्रिटेन चले गए थे जिसके बाद भारत सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था. इसीलिए ललित मोदी ने ब्रिटेन की इमिग्रेशन अदालत में अपील की कि उन्हें ब्रिटेन में रहने की इजाजत दी जाए और यही आकर ललितगेट मामले के दूसरे किरदार वसुंधरा राजे सिंधिया की एंट्री होती है.

 

वसुंधरा राजे सिंधिया पर आरोप है कि ब्रिटेन की अदालत को दिए अपने बयान में उन्होंने ललित मोदी को इमिग्रेशन दिए जाने का समर्थन किया. आरोप ये भी है कि मोदी ने एक कथित फर्जी कंपनी के नाम से वसुंधरा और उनके बेटे की कंपनी में 11 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया. ललितगेट के तीसरे किरदार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर आरोप है कि उन्होंने बिना विदेश सचिव को बताए ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज मुहैया कराने का अनुरोध ब्रिटेन की सरकार से किया. सुषमा के पति और बेटी ललित मोदी के वकील रहे हैं यही नहीं मोदी की कंपनी इंडोफिल में सुषमा के पति स्वराज कौशल को आलटरनेट डायरेक्टर का पद ऑफर करने की बात भी सामने आई है. ललितगेट के चौथे किरदार शरद पवार हैं जो हाल तक क्रिकेट की राजनीति में असली खिलाड़ी थे उन्होंने लंदन में ललित मोदी से मुलाकात की थी. ललितकांड के पांचवे किरदार कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला हैं ललित ने आईपीएल की बैठक के ड्राफ्ट मिनिट्स जारी कर कहा कि क्रिकेट साउथ अफ्रीका के साथ हुए करार को 11 लोगों ने मिलकर मंजूरी दी थी उनमें अरुण जेटली के साथ राजीव शुक्ला भी थे. ईडी ने इन दोनों को नोटिस क्यों नहीं भेजा. क्या ये आर्थिक अपराध के आरोपी नहीं है. राजीव शुक्ला, अऱुण जेटली, अनुराग ठाकुर, जगमोहन डालमिया और श्रीनिवासन को ललित मोदी ने एक गैंग बताया है. ललितगेट के छटे पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरुर है. मोदी का आरोप है कि थरुर की पत्नी सुनंदा पुष्कर और आईपीएल की कोच्ची टीम का संबंध उजागर करने की सजा उन्हें यूपीए सरकार ने दी और उन पर तमाम आरोप लगाए गए.

 

ललित मोदी ने 2010 में हुए आईपीएल के बाद भारत छोड़ दिया था. लगभग उसी समय केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आईपीएल से जुड़े कुछ मुद्दों की जांच शुरु करा दी थी. बीसीसीआई की अनुशासन समीति ने आठ मामलों में ललित मोदी को अनियमितता का दोषी पाते हुए उन पर आजीवन प्रतिबंध भी लगा दिया था. बीसीसीआई की अनुशासन समिति के अध्यक्ष अरुण जेटली थे और अब उनका वित्त मंत्रालय इस पूरे मामले की जांच कर रहा है.

 

एमसीए के पूर्व कार्यकारी सदस्य रवि मांद्रेकर बताते हैं कि उन्होंने सब गलत काम किया, आईपीएल का फायदा हो गया. बीसीसीआई का फायदा हो गया लेकिन खुद का भी फायदा हो गया. उदाहरण के लिए अपने ही आदमी को बहुत से काम पर लगवाया. फ्रैंचाइजी में भी उनके ही आदमी थे. कोलकाता नाईट राइडर में भी उनका ही आदमी था. राजस्थान रायल में उनके ब्रदर इन लॉ का शेयर था. ऐसे ही अपने 7 फैमिली मेंबर को अलग-अलग काम दे दिए उन्होने आईपीएल के. उनके अगेंस्ट आरोप था. उसके बाद में उन्होंने कंडीशन बदली कि वो दो एक्ट्रा लेने वाले थे फ्रैंचाइजी उनके लिए उन्होंने अडानी और वीडियोकोन को लेने के लिए उन्होंने कंडीशन्स अलग बनाए वो बीसीसीआई को निकालने पड़े. उन्होंने एक भी अप्रूवल नहीं लिया. उन्होंने जो कांट्रेक्टस लिए टीवी के वो काम में बहुत गलतियां की. उसके ऊपर आरोप लगाया ऐसे 22 आरोप उन पर लगे. उनमें एक बहुत सीरियस आरोप ऐसा था.

 

उद्योग, क्रिकेट, ग्लैमर और पॉलिट्क्स का एक दिलचस्प कॉकटेल तैयार करने वाले ललित मोदी आज हजारों करोड़ों की हेराफेरी के इल्जाम में फंस चुके हैं लेकिन उनका संबंध एक ऐसे औद्योगिक घराने से रहा हैं जिसका हजारों करोड़ रुपये का कारोबार है. एक गुमनाम बिजनेस मैन से सुर्खियों का सरताज बनने वाले ललित मोदी की ये कहानी जितनी दिलचस्प है उससे कहीं ज्यादा हैरतअंगेज भी है.

 

दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश का शहर मोदीनगर. ये ललित मोदी का शहर भी है क्योंकि इस औद्योगिक शहर को उनके दादा राय बहादुर गुजरमल मोदी ने सन 1933 में बसाया था. मोदीनगर में ललित मोदी के परिवार का कारोबारी साम्राज्य चारों तरफ फैला हुआ है. कम से कम दर्जन भर प्रतिष्ठित ब्रांड का स्वामित्व इस परिवार के पास है. तंबाकू उत्पादों के कारोबार में तो मोदी घराना देश में दूसरे नंबर पर आता है खास बात ये है कि ललित मोदी के पिता कृष्ण कुमार मोदी यानी के के मोदी अपने नाम से इस पूरे मोदी ग्रुप का संचालन करते हैं.

 

 

वरिष्ठ पत्रकार अशोक ओझा बताते हैं कि 1933 में स्वर्गीय राय बहादुर गूजर मल मोदी हरियाणा के महेंद्रगढ़ नगर से मोदीनगर आए थे. और उन्होंने 1933 में सबसे पहले मोदी चीनी मिल की स्थापना की थी. ये उस समय गांव बेगमाबाद हुआ करता था. बेगमाबाद गांव की जमीन पर किया. मोदी चीनी मिल के बाद मोदी कपड़ा मिल, फिर मोदी इंडस्ट्रीज की स्थापना हुई मोदी स्टील की स्थापना हुई.

 

ललित मोदी के दादा राय बहादुर मोदी का जन्म 1902 में हरियाणा के महेंद्रगढ़ में हुआ था. उनकी पहली शादी राजस्थान के झुंझनू जिले के सिंघाना कस्बे में हुई थी लेकिन जब वो मोदीनगर में आकर बस गए तो उन्होनें संतान ना होने की वजह से हाथरस की दयावती से दूसरा ब्याह कर लिया था. राय बहादुर मोदी को दवायती से पांच बेटे कृष्णकुमार मोदी, विनय कुमार मोदी, भूपेंद्र कुमार मोदी, सतीश कुमार मोदी और उमेश कुमार मोदी हुए. इनमें से बड़े बेटे कृष्ण कुमार मोदी की शादी वीना मोदी से हुई जिनके बेटे ललित मोदी है. और फिर इस तरह आगे मोदी खानदान के साथ – साथ उनका आर्थिक साम्राज्य भी फैलता चला गया.

 

वरिष्ठ पत्रकार अशोक ओझा बताते हैं कि के के मोदी जी के तीन बच्चे हैं. जिसमें ललित मोदी, समीर मोदी और इनकी बड़ी बहन है चारु मोदी.

 

ललित मोदी का बचपन गाजियाबाद के मोदीनगर में ही गुजरा है. उनकी प्रारंभिक पढाई – लिखाई भी मोदीनगर के इसी दयावती मोदी पब्लिक स्कूल में हुई है लेकिन उन्होंने शिमला के बिशप कॉन्वेंट स्कूल और नैनीताल के सेंट जोसफ कॉलेज में भी स्कूल की पढाई की है और आगे कॉलेज की पढाई करने वो अमेरिका चले गए थे. मोदीनगर के लोग बताते हैं कि ललित मोदी अब कभी कभार ही मोदी नगर में आते हैं.

 

वरिष्ठ पत्रकार अशोक ओझा बताते हैं कि यहां तो वो बचपन में रहे थे. और या फिर कोई कार्यक्रम मोदी परिवार के होते हैं. खासकर राय बहादुर गूजरमल मोदी जी की पुण्यतिथि, जन्मदिन, दयावती मोदी जी की पुण्यतिथि जन्मदिन. उस समय पूरा मोदी परिवार मोदी नगर में जुटता है. मोदी मंदिर के एक हिस्से में इनकी समाधि बनी हुई है. जहां कार्यक्रम आयोजित होते हैं उस समय यहां पूरा परिवार जुटता है.

 

दरअसल गुजरते वक्त के साथ अपनी कारोबारी जरुरतों के चलते मोदी परिवार के लोग दूसरी जगहों पर भी चले गए. बावजूद इसके उनका जुड़ाव हमेशा मोदीनगर से भी बना रहा. रिश्ते में ललित मोदी के चाचा और स्थानीय उद्योगपति डी के मोदी ने अंग्रेजी अखबार को दिए बयान में कहा है कि ‘मैं यह नहीं कहूंगा कि ललित मोदी दोषी है या निर्दोष हैं हम लोग एक ही परिवार से आते हैं लेकिन उसका मुझसे कोई संपर्क नहीं है यह एक राजनीतिक मुद्दा है और मैं इससे दूर रहूं यही सबसे अच्छा है.’ कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ललित मोदी घरेलू समारोह में भी अपने करीबी रिश्तेदारों और मेहमानों से एक दूरी बनाये रखते थे और उनका रवैया थोड़ा रुखा और अहंकारी होता था. मोदी नगर का बिरला मंदिर भी मोदी परिवार ने ही बनवाया है. यहां लिखी मोदी परिवार की वंशावली के मुताबिक ललित मोदी का जन्म 29 नवम्बर 1963 को हुआ था. इस फैमली ट्री में उनकी पत्नी मीनल कि जन्म तारीख 9 जून 1954 दर्ज है. यानी ललित मोदी की पत्नी मीनल मोदी उनसे करीब 9 साल बड़ी है. बिरला मंदिर में करीब 30 साल से काम कर रहे रविंदर का कहना है कि जब ललित मोदी शादी के बाद पत्नी के साथ मंदिर में देवी दर्शन के लिए आए थे तब उनके साथ एक बच्ची भी थी. 

 

मोदीनगर के बिरला मंदिर के कर्मचारी रविंद्र बताते हैं कि दरअसल ललित मोदी का पूरा मामला जो मीडिया में सुर्खिया बना हुआ है. उसकी शुरुआत उनकी पत्नी मीनल के कैंसर के इलाज से ही हुई थी. आरोप है कि ललित मोदी इलाज के लिए इंग्लैंड से लिस्बन जाना चाहते थे जिसके लिए मोदी को कथित तौर पर यात्रा दस्तावेज दिलाने में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मदद की थी. ललित मोदी की मीनल मोदी से शादी की ये कहानी भी बेहद दिलचस्प बताई जाती है. ऐसा कहा जाता है कि विदेश में पढ़ाई के दौरान ललित मोदी का दिल उनकी मां की सहेली मीनल पर आ गया था हालांकि मीनल उम्र में उनसे नौ साल बड़ी थी बावजूद इसके मोदी और मीनल के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं.

 

कहा ये भी जाता है कि जब मीनल की शादी नाइजीरिया के बिजनेसमैन जैक सागरानी से हो रही थीं तब शादी से ठीक पहले ललित मोदी ने उनसे अपने प्यार का इजहार किया था. शादी से पहले आए प्यार के इस प्रस्ताव पर मीनल गुस्सा हो गई थीं और इसीलिए उन्होंने चार साल तक ललित मोदी से बातचीत तक बंद कर दी थी.

 

मीनल की जैक सागरानी से शादी तो हुई लेकिन ये शादी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी और जल्द ही दोनों में तलाक हो गया था. और इस तलाक ने ललित मोदी को मीनल के और ज्यादा करीब ला दिया. हालांकि ललित मोदी के परिवार में दोनों के इस रिश्ते को लेकर विरोध भी खूब हुआ था लेकिन मोदी ने आखिरकार 17 अक्टूबर 1991 को मीनल के साथ शादी कर ली. बताया जाता है कि ललित मोदी से विवाह के पहले मीनल, करीमा नाम की बेटी की मां भी बन चुकी थीं. ललित मोदी ने मीनल के साथ उनकी बेटी करीमा को भी अपनाया और उनकी शादी गौरव बर्मन से करवाई जो कि डाबर ग्रुप के मालिक विवेक बर्मन के बेटे हैं. खास बात ये है कि गौरव के भाई मोहित बर्मन आईपीएल टीम किंग्स इलेवन पंजाब के को ऑनर भी हैं. मोदीनगर के बिरला मंदिर में मोदी घराने की वंशावली के मुताबिक ललित मोदी और मीनल के दो बच्चों आलिया मोदी 9 मार्च 1993 और रुचिर मोदी का 9 जुलाई 1994 को जन्म हुआ. स्विटजरलैंड में पढ़ाई कर रही है आलिया मोदी आईपीएल के दौरान स्टेडियम में भी कई बार देखी जा चुकी हैं. ललित मोदी के बेटे रुचिर अमेरिकन स्कूल ऑफ बॉम्बे के स्टूडेंट हैं और वो भी आईपीएल नाइट पार्टीज में नजर आ चुके हैं.

 

ललित मोदी ने साल 1993 में मोदी एंटरटेनमेंट नेटवर्क नाम से अपनी कंपनी शुरु की थी इसके बाद कुछ सालों तक वाल्ट डिजनी पिक्चर के साथ मिल कर उन्होंने काम भी किया लेकिन बाद में वो अपनी पारिवारिक कंपनी से जुड़ गए थे. लेकिन स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर उनके करियर की शुरुआत तब हुई जब वो साल 1999 में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन से जुडे थे.

 

एमसीए के पूर्व कार्यकारी सदस्य रवि मांद्रेकर बताते हैं कि ये ललित मोदी जी सीखने के लिए अमेरिका गए थे. तो उन्होंने स्पोर्टस में कैसे पैसा आता है, कैसे पैसा आ सकता है, कितना पैसा आता है. वो उन्होंने जब स्टडी किया तो उन्हें लगा कि स्पोर्ट इवेंट मैनेज करने में बहुत पैसा मिल सकता है. और उस समय में उन्होंने भारत में आने का निश्चय किया. और इसी प्रकार उन्होंने पहले क्रिकेट लीग पहले हिमाचल में चालू करने का सोचा था. जिसका नाम है इंडियन क्रिकेट लीग. 50 ओवर गेम और जो प्रस्ताव उन्होंने बोर्ड के सामने रखा वो बोर्ड में समझ में नहीं आया शायद इसलिए वो नहीं हो सका. पर उनको पैसा है क्रिकेट में उनको वो पता था.

 

साल 2008 में आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत करने वाले ललित मोदी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में अपनी जगह बनाने के लिए कई रास्ते आजमाए हैं. हिमाचल प्रदेश के बाद वो पीसीए यानी पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन में भी उपाध्यक्ष बने लेकिन पीसीए के अध्यक्ष ए एस बिंद्रा की वजह से जब उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता नहीं सूझा तो उन्होंने राजस्थान की राह पकड़ ली थी.

 

एमसीए के पूर्व कार्यकारी सदस्य रवि मांद्रेकर बताते हैं कि ललित मोदी को जो पैसा बनाना था खुद के लिए या बोर्ड के लिए उसके लिए उनको बोर्ड में आना जरुरी था. उसका रास्ता उन्होंने निकाला पहला पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन. उधर वाईस प्रेसिडेंट बन गए. फिर उधर तो बिंद्र थे तो वो रास्ता तो उनको बोर्ड में आने के लिए बंद हो गया. इसलिए वो राजस्थान गए. राजस्थान में उन्होंने वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ फ्रेंडशिप यूज की.

 

बतौर क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर ललित मोदी के करियर में उस वक्त अहम मोड़ आया जब वो राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े थे. मुख्यमंत्री  वसुंधरा राजे ने ललित मोदी के बारे में सार्वजनिक तौर पर तो कभी खुलकर बात नहीं की है लेकिन मोदी से पारिवारिक रिश्ते होने की बात जरुर कुबूल की है. मोदी और राजे के इस रिश्ते की गहराई ललित मोदी के उस बयान से भी पता चलती है. जो उन्होंने ब्रिटिश आव्रजन अधिकारियों के सामने दिया था. मोदी ने अपने बयान में लिखा – “वसुंधऱा का परिवार और मेरा परिवार कई साल से नजदीकी रहा है उनकी मां और मेरी दादी बहुत करीबी दोस्त थीं.“ लेकिन जयपुर के राजनीतिक गलियारों में ललित मोदी का नाम साल 2004 में पहली बार सुनाई दिया था. इससे कुछ महीनों पहले ही दिसंबर 2003 के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे ने अपनी पार्टी बीजेपी को राजस्थान में जबरदस्त जीत दिलाई थीं.

 

ललित मोदी 1999 में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में अपने पैर जमाने की कोशिश में लगे थे. लेकिन साल 2003 में जब वसुंधरा राजे पहली बार राजस्थान की मुख्यमंत्री बनीं थी तो मोदी के भी क्रिकेट में अच्छे दिन आ गए. वसुंधरा के सत्ता में आते ही ललित मोदी ने राजस्थान की क्रिकेट राजनीति में कदम रखा और देखते ही देखते वो भारतीय क्रिकेट राजनीति में भी छा गए थे.

 

ऐसा कहा जाता है कि करीब 12 साल पहले ललित मोदी को वसुंधरा राजे सिंधिया ही राजस्थान में लेकर आईं थी. इसके पीछे एक वजह राज्य क्रिकेट एसोसिएशन पर कब्जा करना था तो दूसरी वजह कारोबार को आगे बढ़ाना भी था. साल 2004 में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक अध्यादेश के जरिए राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को भंग कर दिया था. नए चुनाव का ऐलान हुआ और राजस्थान की क्रिकेट में करीब 30 सालों से दखल रखने वाले किशोर रुंगटा, कमल मुरार्का और राज सिंह डूंगरपुर की तिकड़ी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. इसी दौरान ललित मोदी अचानक विदेश से राजस्थान की जमीन पर अवतरित हुए थे और नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बन गए.

 

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के तत्काली अध्यक्ष किशोर रुंगटा बताते हैं कि मेरे पास नौगार क्रिकेट एसोसिएशन का सेकेट्री आया ये कहते हुए कि उन लोगों के इलेक्शन हुए हैं. और एक मिस्टर ललित कुमार को उन्होंने प्रेसीडेंट इलेक्ट किया है. जिसको मैं अप्रूवल दूं. नार्मल कोर्स में कोई भी इलेक्शन अगर होते हैं तो उसमें राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का आब्जर्वर जरुर जाता है. क्योंकि डिस्ट्रिक एसोसिएशन एक रिस्पासिंबल बाडी थी तो मैंने ये विश्वास किया उस समय जो सेक्रेटरी थे उनका कि इन्होंने जो नए इलेक्शन किए है इसमें कोई ललित कुमार को इन्होंने इलेक्ट किया है. उन्होंने मेरे को बताया कि वो कोई बिजनेसमैन हैं और नागौर के ही हैं. और जो सिगनेचर थी वो भी ललित कुमार के नाम से सिग्नेचर की गई थी. जो लेटर उन्होंने मुझे बताया और जो अटेंडेंस रजिस्टर मुझे बताया उसमें भी उन्होंने ललित कुमार का नाम दिया. मैने अपने क्लीग्स उस समय जो थे उनसे बातें की और उन्होंने कहा कि साहब हमें इसे अप्रूव्ल देने में कोई एतराज नहीं होना चाहिए  जिसमें से बाद में पता चला कि जिन लोगों से मैने बात की उन लोगों को इस चीज का ज्ञान था कि ये ललित मोदी हैं. तो मुझे मिस लीड किया गया उस पार्टिकुलर एस्पेक्ट में. और ललित मोदी इलेक्शन जीत के वहां प्रेसीडेंट बन गए.

 

साल 2003 में वसुंधरा राजे का मुख्यमंत्री बनना ललित मोदी के करियर में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ. राजस्थान की राजनीति मे वसुंधरा राजे किसी ताजा हवा के झोंके की तरह थीं. वो एक ऐसे नेता की तरह आईं जो राज्य के पर्यटन उद्योग और खंडहर हो चुके स्मारकों को दुरुस्त करने, जर्जर बिजली उत्पादन को बढाने और बेतरतीब शहरों को ठीक करने के लिए नए विचारों से भरी थीं लेकिन इसी दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण के गलियारों में ललित मोदी का नाम भी गूंजने लगा था. कहा जाता है कि सरकारी नियुक्तियों, तबादलों और जमीन के सौदों के लेन – देन में अपनी पूरी पकड़ कायम करके ललित मोदी कथित तौर पर सुपर मुख्यमंत्री की तरह काम करने लगे थे.

 

कहा ये भी जाता है कि उन दिनों जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम के पड़ोस में बना पांच सितारा होटल रामबाग पैलेस ललित मोदी का स्थायी निवास बन गया था जहां से वो क्रिकेट की अपनी पूरी गतिविधियों को अंजाम दिया करते थे. बताया ये भी जाता है कि ललित मोदी उन दिनों राजस्थान सरकार के अफसरों पर अपना हुक्म भी चलाते थे.

 

भारतीय क्रिकेट की राजनीति में ललित मोदी का उदय साल 2005 में तब हुआ जब वो राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन यानी आरसीए के अध्यक्ष चुने गए थे. राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में इससे पहले कांग्रेस से जुड़े जिस किशोर रुंगटा परिवार का दबदबा था उसे हटाने और उसकी जगह लेने के लिए उस वक्त पूरी चुनाव प्रक्रिया को इतनी सफाई और गोपनीयता से अंजाम दिया गया था कि खुद सरकारी अफसर भी हैरान रह गए थे. साल 2005 में आरसीए का वो चुनाव ललित मोदी के खिलाफ किशोर रुंगटा ने लड़ा था.

 

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष किशोर रुंगटा बताते हैं कि अगर वो डेमोक्रेटली इलेक्ट होकर राइट तरीके से आए तो किसी को कोई आब्जेक्शन नहीं होता है. सवाल ये उठता है कि क्या ललित मोदी राजस्थान के थे. जिसका जवाब नहीं है. क्या ललित मोदी इलेजिबल थे राजस्थान के लिए. लीगली अगर हम बात करें तो शायद थे क्योंकि उन्होंने नागौर क्रिकेट एसोसिएशन के सेकेट्री की कोई दो सौ तीन सौ गज की प्रापर्टी अपने नाम करी. और उसके बेसेस पर अपनी इलेजिबेलिटी बनाई. तो लीगली स्पीकिंग तो ठीक है मगर मोरली स्पीकिंग ये बिल्कुल गलत था. उसके बेसिस पर ललित मोदी इलेक्ट होकर नागौर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट बने. और उसके बाद उन्होंने मुझे चैलेंज किया प्रेसीडेंशियल इलेक्शन में जो वो जीते उस पर्टिकुलर इलेक्शन में. उसमें भी मैने ये क्वेशचन रेज किया क्योंकि उनकी जो एप्लीकेशन थी जिसके अंदर इन लोगों ने अपना नामी नेशन फाइल किया था. वो भी साइन ललित कुमार की थी. मैं उस वक्त आब्जर्वर जो सुप्रीम कोर्ट के एपाइंटेड से उनके सामने भी प्वाइंटआउट किया था. मगर उसका कोई कनक्लूजन नहीं निकला और नहीं निकल कर उनको इस बात की इलेजिबिलिटी दी गई कि वो इलेक्शन लडे. और इस हिसाब से वो इलेक्शन लड़े और मेरे से वो इलेक्शन जीते.

 

ऐसा बताया जाता है कि ललित मोदी के प्रशासनिक हुनर ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी मंत्रमुग्ध कर दिया था. ललित मोदी के विरोधी भी ये बात मानते हैं कि आरसीए का अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने राज्य में क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढाने में काफी काम किया और जयपुर के खस्ताहाल सवाई मानसिंह स्टेडियम को उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के लिए एक पसंदीदा स्थल में भी बदल कर रख दिया था. लेकिन इसी के साथ जब ललित मोदी का फोकस अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की तरफ ज्यादा हुआ तो राजस्थान का क्रिकेट कहीं पीछे छूट गया.

 

वरिष्ठ पत्रकार ओम सैनी बताते हैं कि ललित मोदी को ये राजस्थान क्रिकेट में लेकर आईं तो उन्होंने क्रिकेट को ही बदल दिया और साथ साथ में देश का क्रिकेट बदल गया जिन क्रिकेट के खिलाड़ियों की हैसियत नहीं थी उनको बहुत आराम से बहुत कुछ मिला है साथ साथ आप राजस्थान में जो जगह जगह क्रिकेट का चांव देख रहे हैं खेल के प्रति जो रुझान बनने लगा युवाओं को वो इन्हीं के मित्र की वजह से बनने लगा ललित मोदी का कांट्रिब्यूशन को तो हम इंकार नहीं कर सकते वर्ना राजस्थान में राज सिंह और रुंगटार्ज के सिवाए कुछ नहीं था. औऱ क्रिकेट कुछ भी नहीं था उस तरीके से ये कांट्रिव्यूशन तो निश्चित रुप से नजर आता है.

 

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष बनने के बाद साल 2005 में ही ललित मोदी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की राजनीति में भी पहली बार निशाना साधा. उन्होंने जगमोहन डालमिया के खिलाफ एनसीपी के नेता शरद पवार को बीसीसीआई का अध्यक्ष बनने में मदद की. और जब शरद पवार अध्यक्ष बने तो ललित मोदी को बीसीसीआई का उपाध्यक्ष बना दिया गया. 

एमसीए के पूर्व कार्यकारी सदस्य रवि मांद्रेकर बताते हैं कि एक तो मानना ही पड़ेगा ललित मोदी जी बहुत स्मार्ट थे. उन्होंने विनिंग साईड बराबर चुन ली, शायद एक साल शरद पवार जी हारे होंगे पर कोई जीतने वाला है वो उन्होंने बराबर किया. शरद पवार जी को मदद किया और उनसे शरद पवार जी प्रसन्न हो गए तब वो वाईस प्रेसीडेंट बोर्ड के बन गए. अभी वाईस प्रेसीडेंट बनने के बाद उन्होंने बोर्ड का फाइनेंस संभालने का शुरु किया. और उन्होंने 2008 में बोर्ड का इंकम 6000 करोड़ तक लेके गए. 6000 करोड़ तक लेके गए इसलिए उनका जो ब्रेन चाइल्ड था आईपीएल उसको बोर्ड के मेंबर ने मान्यता दी. क्योंकि उनका जो पहला परफोरमेंस जो इतना अच्छा था इसलिए उनको सबको कांफीडेस हो गया कि आईपीएल या मोदी जी अच्छी तरह से मैनेज कर सकेंगे इसलिए उन्हें आईपीएल का होल एंड सोल फ्रेंजाइजी बना दिया. सब राइट्स उन लोगों को दे दिया.

 

साल 2008 जब दुनिया ने पहली बार भारत में हुए आईपीएल का जलवा देखा था. क्रिकेट के मैदान पर मौजूद ये रवानियां. ये अंगडाईयां औऱ दिलो में आग लगा देने वाली ये चिंगारियां जिन्हें आईपीएल की जुबान में चीयरलीडर्स के तौर पर प्रचारित किया गया था. मैदान पर सितारों की तरह चमकने वाली इन चीयरलीडर्स और रंगीन जर्सियों में बल्ला घुमाते इन खिलाडियों ने क्रिकेट के इस नए अवतार को दौलत के एक नए आसमान पर पहुंचा दिया और आईपीएल की इस कामयाब शुरुआत ने ललित मोदी को भी क्रिकेट के दिग्गजों की कतार में शुमार करा दिया था.

 

क्रिकेट के करोड़ों चाहने वालों ने आईपीएल के इस जुनून को सिर आंखों पर बैठाया लेकिन गुजरते वक़्त के साथ इसकी चमकती कामयाबी के दामन पर कई बदनुमा दाग भी लगते चले गए. आरोप लगे कि आईपीएल अय्याशी, काले धन और हवाला जैसी गंदगी और बीमारी का एक आउटलेट बन गया है. कहा ये भी गया कि क्रिकेट के खेल से ज्यादा ये एक गंदा धंधा बनकर रह गया है. आईपीएल में खिलाडियों की नीलामी को लेकर भी संगीन इल्जाम लगते रहे हैं लेकिन इन इल्जामों के प्रहार के बीच बीसीसीआई पर पैसों की बौछार भी होती रही.

 

एमसीए के पूर्व कार्यकारी सदस्य रवि मांद्रेकर बताते हैं कि ललित मोदी का हाथ तो बहुत है. उन्होंने सब कांट्रक्ट ड्राफ्ट किए. उन्होंने सब एंगल देखे. क्रिकेट का मतलब सिर्फ मैचिज कंडक्ट करना ही नहीं है. उसका मार्केटिंग देखा. उसका फाइनेंस देखा. उसका सपोर्ट देखा प्लेयर को पैसा कितना देना है वो सब ऐंगल उन्होंने लेके उन्होंने आईपीएल का मॉडल तैयार किया. किसी भी वक्त विवाद हो सकता है. विवाद हो सकता है कि मॉडल कितना सही थी कितना गलत था पर फैक्ट ये है कि तीन साल में 2008 साल से बीसीसीआई का प्रोपर्टी 24000 करोड़ हो गया. अभी उस में किसी का कितना फायदा हुआ ये बात में मैं नहीं जाना चाहता हूं. ये तो सही है कि 2008 से 2010 तक ऑफिशियल रिकॉर्ड बताता है कि बीसीसीआई का टोटल टर्नओवर 24000 करोड़ हुआ अब ये आईपीएल की वजह से हुआ है.

 

आईपीएल की कामयाबी से ललित मोदी की शोहरत भी आसमान चूम रही थी. साल 2009 में लोकसभा चुनाव की वजह से सरकार ने आईपीएल को सुरक्षा देने से इंकार कर दिया था लेकिन बेहद कम वक्त में दक्षिण अफ्रीका में आईपीएल का सफल आयोजन करवा कर ललित मोदी ने एक बार फिर मैदान मार लिया और इस दौरान उनकी पूरी दुनिया में ना सिर्फ शान बढ़ी बल्कि दुनिया भर के ऊंचे और असरदार लोगों के बीच उनकी पहुंच और पहचान भी बनी. लेकिन साल 2010 का तीसरा आईपीएल ललित मोदी के लिए जैसे मुसीबतों का पैगाम लेकर आया.

 

एमसीए के पूर्व कार्यकारी सदस्य रवि मांद्रेकर बताते हैं कि गवर्निंग काउंसिल में उन्होंने इतना इटरेस्ट नहीं लिया क्योंकि किसी को भी पता नहीं चला कि इसमें इतना पैसा आ सकता है. जो मोदी जी को पता था कि वो कितना पैसा ला सकते है इसलिए उन्होंने खुद सारा कंट्रोल अपने हाथ में लिया. किसी ने आबजेक्शन नहीं लिया. किसी को भी नहीं पता था कि 6000 करोड़ का 24000 करोड़ हो सकता है इसलिए मोदी जी अकेले काम करने में सक्सेसफुल हो गए. अभी लोगो को जब पता चला 24000 करोड़ तो सबकी आंखे खुल गई और उन्होंने देखा कि 24000 करोड़ ये तो सच है.

 

आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी पर मनी लॉन्डरिंग और आईपीएल में वित्तीय गड़बड़ियों और कर चोरी के संगीन इल्जाम लगे हैं. इसीलिए सितंबर 2010 में उन्हें बीसीसीआई से भी निकाल दिया गया और इसी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी उनके खिलाफ जांच का शिकंजा कसना शुरु कर दिया था. ललित मोदी मई 2010 से ही इंग्लैड में रह रहे हैं इधर भारत में अब प्रवर्तन निदेशालय फेमा उल्लंघन और मनी लॉन्डरिंग मामलों को जोड़कर उन पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है लेकिन आरोपों के चक्रव्यूह में घिरे ललित मोदी विदेश में बैठकर देश के दिग्गजों पर बरसा रहे हैं आरोपों के ट्विटर तीर.

 

First Published:

Related Stories

IN DETAIL: आखिर विपक्ष ने क्यों चुना मीरा कुमार का नाम, जानें तीन बड़ी वजह
IN DETAIL: आखिर विपक्ष ने क्यों चुना मीरा कुमार का नाम, जानें तीन बड़ी वजह

नई दिल्ली: विपक्ष ने राष्ट्रपति चुनाव में तीन वजहों से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना...

फिर सुलगी जाट आंदोलन की आग, राजस्थान में किया रेलवे ट्रैक जाम
फिर सुलगी जाट आंदोलन की आग, राजस्थान में किया रेलवे ट्रैक जाम

जयपुर: धौलपुर और भरतपुर में ओबीसी में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समाज के लोगों ने आज भरतपुर जिले...

शुक्रवार सुबह नामांकन भरेंगे राम नाथ कोविंद, बीजेपी ने की ये खास तैयारी
शुक्रवार सुबह नामांकन भरेंगे राम नाथ कोविंद, बीजेपी ने की ये खास तैयारी

नई दल्ली: एनडीए के रामनाथ कोविंद के मुकाबले आज विपक्ष ने भी राष्ट्रपति पद के लिए मीरा कुमार को...

LoC पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे एक आतंकी को सेना ने ढेर किया
LoC पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे एक आतंकी को सेना ने ढेर किया

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में LoC के पास केरन सेक्टर में सेना ने एक आतंकी को मार गिराया...

किसानों के लिए एक दिन की सैलरी दान करें सरकारी कर्मचारी: महाराष्ट्र सरकार
किसानों के लिए एक दिन की सैलरी दान करें सरकारी कर्मचारी: महाराष्ट्र सरकार

मुंबई: महाराष्ट्र की सरकार ने अपने कर्मचारियों से अपील की है कि वे आत्महत्या करने वाले किसानों...

कांग्रेस ने मीरा कुमार को बनाया 'बलि का बकरा' : बीजेपी
कांग्रेस ने मीरा कुमार को बनाया 'बलि का बकरा' : बीजेपी

नई दिल्ली: बीजेपी ने आज कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करके मीरा कुमार को...

जाधव को जबरदस्ती कैद करने के मामले में पाकिस्तान फिर बेनकाब
जाधव को जबरदस्ती कैद करने के मामले में पाकिस्तान फिर बेनकाब

नई दिल्ली: एक बार फिर पाकिस्तान की घिनौनी करतूत का वीडियो सामने आया है. पाकिस्तान की जेल में...

केशरी नाथ त्रिपाठी ने ली बिहार के राज्यपाल पद की शपथ, बने 37वें गवर्नर
केशरी नाथ त्रिपाठी ने ली बिहार के राज्यपाल पद की शपथ, बने 37वें गवर्नर

पटना: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने आज बिहार के राज्यपाल पद की शपथ ली है....

सुशील मोदी ने की मांग, बिहार के किसानों का 'कर्ज' माफ करें CM नीतीश
सुशील मोदी ने की मांग, बिहार के किसानों का 'कर्ज' माफ करें CM नीतीश

पटना: बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने राज्य सरकार से दूसरे राज्यों की तर्ज पर बिहार...

पुंछ: BAT के हमले में दो जवान शहीद, एक बैट कमांडो भी मारा गया, एक जख्मी
पुंछ: BAT के हमले में दो जवान शहीद, एक बैट कमांडो भी मारा गया, एक जख्मी

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी BAT कमांडो ने एक बार फि नापाक हरकत को अंजाम...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017