लालू ने लिया बीजेपी को निशाने पर, कहा- चौराहे पर खड़ा देश

By: | Last Updated: Friday, 23 January 2015 9:05 AM
Laloo Yadav write up

नई दिल्ली: आरजेडी  प्रमुख लालू यादव ने लेख लिखकर बीजेपी को निशाने पर लिया है. लालू यादव ने इस लेख को सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर पोस्ट किया है. लालू ने अपने इस लेख में कहा है कि  राज्यपालों समेत कुछ प्रशासनिक फेर-बदल के अलावा स्वच्छता अभियान, लव ज़िहाद, गुड-गवर्नेंस डे, घर वापसी, हिंदू औरतों के लिए बच्चे पैदा करने का कोटा निर्धारित करना आदि ही हैं कि जिन्हें सरकार अपनी उपलब्धि बता सकती है.

ये है लालू यादव का पूरा लेख. इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.

 

चौराहे पर खड़ा देश-

केंद्र में बनी भाजपा की सरकार ने तक़रीबन आठ महीनों में देश को ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ देश की संप्रभुता एवं अखंडता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. छदम विकास के नारे तले देश की गंगा-जमुनी तहजीब को तोड़ने का घिनौना खेल खेला जा रहा है. जनता-जनार्दन इस बात की गवाह है कि सभी समस्याएं वहीं की वहीं ही नहीं अपितु उनमें इज़ाफ़ा हुआ है. किसानों की दयनीय स्थिति एवं आत्महत्या, गरीबी,कुपोषण, बेरोजगारी, सरकार का अहंकार और अकुशलता, महंगाई, सीमा विवाद,काला धन इत्यादि अनेकों ऐसे विषय है. आम आवाम के सरोकारों से संबंधित कृषि,शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रक्षा जैसे अहम मंत्रालयों की बजट राशि में बेतहाशा कटौती की जा रही है. लोकसभा और राज्यसभा मे विपक्ष से दो-दो हाथ करने के बजाए पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने वाली नीतियाँ आनन-फानन में अध्यादेशों के ज़रिये बनायी जा रही है,भूमि अधिग्रहण जैसे अहम कानून बनाने में संसद को बाइपास किया जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय मार्केट के अनुरूप पेट्रोल डीज़ल के दाम में कटौती करने की बजाय सरकार दनादन एक्साइज ड्यूटी बढा कर आम जनता की जेब काट रही है.प्रचार और धनबल के बुते देश के 3 प्रतिशत प्रभावशाली लोगों द्वारा 97 प्रतिशत लोगों को दबाने की योजना बनाई जा रही है. लोकतंत्र में लोक-लजा को दरकिनार कर सिर्फ मुट्ठीभर लोगों को फायदा पहुँचाया जा रहा है .

 

विगत कुछ महीनों में नागरिकों की अभिव्यक्ति की आजादी पर असंख्यक हमले किए जा रहे है. सरकार और भाजपा द्वारा अघोषित रूप से मान्यता प्राप्त संगठनों और लोगों द्वारा निष्पक्ष पत्रकारों,लेखकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों, फिल्म निर्माताओं एवं अभिनेताओं को डराने एवं धमकाने का एक अघोषित एजेंडा मुल्क में बेखौफ चलाया जा रहा है. इन सब अति-गंभीर मुद्दों पर प्रधानमंत्री महोदय मौन व्रत रख गुप्त रूप से अपनी स्वीकृति देते हुए दिखते है.

 

सत्ता के नशे में चूर ये लोग मुल्क पर अपना एजेंडा थोप देश की बहु-सांस्कृतिक पहचान को खत्म करना चाहते है. देश में जो हो रहा है उसके खिलाफ हम सभी विपक्षी पार्टीयों, युवाओं एवं बुद्धिजीवियों को देश की बहुरूपी,बहुधर्मी सुंदरता को बचाने के लिए अपनी आवाज बुलंद करनी होगी. देश के एक अग्रणी शिक्षा संस्थान IIT दिल्ली के डायरेक्टर को इस्तीफा देना पड रहा है. देश के अहम रिसर्च संस्थान DRDO के चीफ को रातों-रात हटा दिया जाता है. इनके एजेंडे पर नहीं चलने के कारण फिल्म सेंसर बोर्ड का पूरा स्टाफ इस्तीफा देकर चला जाता है. इनके अनुसार फिल्म नहीं बनाने वालों पर हमला किया जाता है. इन्हीं की सरकार के माननीय लोग गुंडे-मव्वालियों से भी बदतर एवं बेतुके बोल बोल कर देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर रहे है. राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और उनकी विचारधारा को नष्ट करने की कोशिशें हो रही है, यही नहीं गाँधी जी की हत्या करने वाले गोडसे को महिमामंडित किया जा रहा है. इन लोगों के काले मंसूबों को हम हरगिज सफल नहीं होने देंगे. देश कहाँ जा रहा है ये आप लोगों से बेहतर कोई नहीं जानता ?

 

बीते आठ माह में ज़मीनी स्तर पर काम की बातें करने की बजाय रेडियो पर मन की व्यर्थ बातों के अलावा नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज को लेकर कुछ बोलते नहीं हैं, और उनकी तरफ से जो दूसरे नेता बोलते हैं वे निम्नतम बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रतिभा का परिचय देते हैं. राज्यपालों समेत कुछ प्रशासनिक फेर-बदल के अलावा स्वच्छता अभियान, लव ज़िहाद, गुड-गवर्नेंस डे, घर वापसी, हिंदू औरतों के लिए बच्चे पैदा करने का कोटा निर्धारित करना आदि ही हैं कि जिन्हें सरकार अपनी उपलब्धि बता सकती है.

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