IN DEPTH: सियाचिन के जाबांज हनमनथप्पा की हालत और बिगड़ी

By: | Last Updated: Wednesday, 10 February 2016 11:33 PM
Lance Naik Hanamanthappa Koppad who was rescued and brought to Delhi for treatment at Siachen

नई दिल्ली: 35 फीट बर्फ के नीचे से छह दिन बाद जिंदा निकले लांस नायक हनुमनथप्पा कोप्पड़ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है. आर्मी रिसर्च और रेफरल अस्पताल में उनका इलाज करने वाले डॉक्टर ने बुधवार को यह बात कही. डॉक्टर ने आईएएनएस से कहा, “सैनिक की हालत अभी भी नाजुक है. हम उनकी देखभाल अच्छे तरीके से कर रहे हैं.”

डॉक्टर ने हालांकि उनके चमत्कारिक रुप से बचने पर टिप्पणी करने पर यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उन्हें नहीं पता वहां वास्तव में क्या हुआ था. उन्होंने कहा, “जब लांस नायक होश में आ जाएंगे तभी पता चलेगा की वह कैसे बचने में कामयाब रहे.”

तीन फरवरी को कोप्पड़ और नौ अन्य सैनिक करीब 19,500 फुट की ऊंचाई पर सियाचिन ग्लेशियर में आए हिमस्खलन दब गए थे. सोमवार को कोप्पड़ चमात्कारिक रुप से जिदा निकाले गए थे.

लांस नायक की हालात उस समय काफी नाजुक थी. उनमें अत्यधिक निर्जलीकरण, हाइपोथर्मिया की समस्या पैदा हो गई थी.

कोप्पड़ का रक्तचाप काफी घट गया था और उन्हें इस समय आईसीयू में वेंटीलेटर पर रखा गया है. उन्हें निमोनिया की शिकायत भी बताई गई है साथ ही उनका किडनी और लीवर भी खराब हो गया है.

 

पुरी समुद्र तट पर रेत की मूर्ति बनाकर सियाचिन के जांबाज के लिए प्रार्थना की

प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने सियाचिन ग्लेशियर से सुरक्षित जीवित बाहर निकाले गए जांबाज लांस नायक हनुमनथप्पा कोपड़ के लिए आज शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उनकी रेत की मूर्ति बनायी.

पांच फीट लंबी मूर्ति बनाकर पटनायक ने हनुमनथप्पा के लिए प्रार्थना की और लिखा, ‘‘जल्दी से अच्छा हो जाइए.’’ मूर्ति निर्माण के लिए सियाचिन के ग्लेशियर को प्रदर्शित करते हुए करीब चार टन रेत का प्रयोग किया गया.

पटनायक ने बताया, ‘‘मैं भगवान जगन्नाथ से उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं. हमारे रेत कला संस्थान के कई छात्र और सैकड़ों स्कूली बच्चे भी हमारे नायक के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.’’ लांस नायक कोपड़ की तबियत आज और बिगड़ गयी. छह दिनों तक बर्फ के नीचे दबे रहने के बावजूद कोपड़ ने मौत को मात दी है.

 

हिमस्खलन में जीवित बचे जवान को किडनी दान करेगी महिला

सियाचिन ग्लेशियर में हुए हिमस्खलन में पांच दिन तक दबे होने के बाद भी जीवित निकले जवान के जज्बे से प्रभावित उत्तर प्रदेश की एक महिला ने उसकी जान बचाने के लिए किडनी दान करने का फैसला किया है.

राजधानी लखनऊ से 167 किलोमीटर दूर लखीमपुर खीरी की गृहणी निधि पांडे ने एक स्थानीय न्यूज चैनल के हेल्पलाईन नंबर पर फोन कर जिन्दगी और मौत से जूझ रहे जवान के लिए किडनी दान करने की ख्वाहिश जाहिर की.

पांडे लखीमपुर के पदारिया तुला इलाके में रहती हैं और उनके पति भी पहले अंग दान पहल में शामिल होते रहे हैं.

 

मैं भी लांसनायक हनुमंथप्पा के लिए प्रार्थना कर रही हॅूं: सुमित्रा महाजन

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज यहां कहा कि लांसनायक हनुमंथप्पा कोडप्पा के लिए वह भी प्रार्थना कर रही हैं. वह सियाचिन की 25 फुट मोटी बर्फ के नीचे से मौत को मात देकर जीवित बचे हैं. वृन्दावन में चल रहे एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने आईं लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संवाददाताओं से कहा कि वह चाहती हैं कि हनुमंथप्पा जल्द स्वस्थ हो. वे उसके लिए ईश्वर से प्रार्थना भी कर रही हैं कि उन्हें अति शीघ्र ठीक अपने परिवार से मिलाये.

उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि पूरा देश चाहता है कि वह जिंदा बच जाए. उन्हें पूरा विश्वास है कि जिस प्रकार उसने इतनी मोटी बर्फ के नीचे लगातार छह दिन तक दबे रहकर भी वह सकुशल निकल आया तो वह अब भी मौत को मात देकर अवश्य खड़ा होगा.

उन्होंने आगे कहा कि उसने अपनी जान की बाजी लगाकर देश की सुरक्षा का दायित्व पूरा किया है. वह देश के लिए मौत से लड़ रहा है. पूरा देश उसके साथ है. वह पुन: चंगा होकर देश की सेवा करेगा.

इस बीच, मथुरा में भारतीय जनता युवा मोर्चा सहित अनेक संगठनों ने वीर जवान हनुमंथप्पा के जीवन लिए भगवान से दुआ मांगी. भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने नगर अध्यक्ष सुमित शर्मा के नेतृत्व में उसकी सलामती के लिए विश्राम घाट पर यमुना की पूजा-अर्चना कर नदी में दीप प्रवाहित किए.

उन्होंने कहा कि हनुमंथप्पा युवाओं के लिए एक मिसाल हैं कि किस प्रकार सेना के जवान विपरीत परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं. उन्होंने शून्य से नीचे 45 डिग्री सेल्सियस में भी मौत से डटकर सामना किया. परमात्मा से प्रार्थना हैं कि उन्हें दीर्घायु प्रदान करें.

सियाचिन जवान के लिए नवीन ने की प्रार्थना

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सियाचिन ग्लेशियर में छह दिनों तक बर्फ के नीचे दबे रहने के बाद जीवित बच निकले जवान के शीघ्र स्वस्थ्य होने के लिए प्रार्थना की. इस बीच लांस नायक हनुमनथप्पा की हालत गंभीर बनी हुयी है.

पटनायक ने ट्वीट किया है, ‘‘हमारे बहादुर सैनिक हनुमनथप्पा के लिए हमारी प्रार्थना’’ सेना के बचाव प्रयास की सराहना करते हुये उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘इस उत्कृष्ट प्रयास के लिए हमारे सैनिकों को सैल्यूट.’

हिमस्खलन में जीवित बचे सैनिक के लिए मुंबई के डब्बावालों ने मांगी दुआ

सियाचिन हिमनद में बर्फ की मोटी परत के नीचे दबने के बावजूद जीवित बचे सैनिक हनमनथप्पा कोप्पड़ के लिए मुंबई के डब्बावालों ने आज दुआ मांगी.

परेल में यहां इस मौके पर डब्बावालों ने बैनर लिया हुआ था जिसपर लिखा था – ‘‘हे प्रभु, हनमनथप्पा को लंबी उम्र दें.’’ एक डब्बावाला ने कहा, ‘‘हमने उनकी लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए दुआ मांगी है. बर्फ के नीचे दबे होने के बावजूद उन्होंने जो साहस और आत्मबल दिखाया है उससे हम अचंभित हैं.’’ उन्होंने कहा कि वह एक बहुत जीजीविषा वाले सैनिक हैं.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सैनिक के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए ट्वीट किया, ‘‘महाराष्ट्र लांसनायक हनमनथप्पा के जोश और बहादुरी को सलाम करता है और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करता है.’’ पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा :एलओसी: के पास 19,600 फुट की उंचाई पर स्थित चौकी के हिमस्खलन की चपेट में आ जाने के बाद मूल रूप से कर्नाटक के निवासी थप्पा छह दिन तक 25 फुट मोटी बर्फ के नीचे दबे रहे. सोमवार को उन्हें जीवित पाया गया. वहां पर तापमान शून्य से 45 डिग्री नीचे था.

चौकी पर तैनात एक जूनियर कमीशंड अधिकारी और मद्रास रेजिमेंट के सैनिकों सहित कुल नौ सैनिकों की मौत हो गई है.

सियाचिन के जाबांज हनमनथप्पा की हालत और बिगड़ी

सियाचिन ग्लेशियर में छह दिनों तक बर्फ के नीचे दबे होने होने के बावजूद मौत को मात देने वाले लांस नायक हनमनथप्पा कोप्पड की हालत और बिगड़ गई है. इस बीच एम्स के विशेषज्ञों का एक दल उनका जीवन बचाने के प्रयास में शामिल हो गया है.

आज शाम जारी मेडिकल बुलेटिन में कहा गया है कि सीटी स्कैन में ऑक्सीजन के उनके मस्तिष्क तक नहीं पहुंचने का सबूत मिला है और इस तरह से उनकी हालत बहुत अधिक गंभीर बनी हुई है.

उसमें कहा गया है कि उनके दोनों फेफड़ों में न्यूमोनिया का सबूत मिला है.

बुलेटिन में कहा गया है, ‘‘उनके कई अंगों के काम नहीं करने की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. आक्रामक ढंग से थरेपी करने और सघन चिकित्सा के बावजूद उनकी हालत बिगड़ गई है.’’ सेना के चिकित्सकों का एक दल तथा एम्स के विशेषज्ञों का एक पैनल कोप्पड़ की सेहत पर नजर बनाए हुए है.

बुलेटिन में कहा गया कि अब तक इस जांबाज सैनिक को चिकित्सा मुहैया कराई गई उससे चिकित्सकों की पूरी टीम सहमत है और उन्होंने आगे की चिकित्सा पर भी सहमति जताई है.

कोप्पड़ को कल वायु सेना के एक विमान में दिल्ली लाया गया था. उनके साथ बल का एक गंभीर स्थिति देखभाल विशेषज्ञ और आधार शिविर से एक चिकित्सा विशेषज्ञ था.

कोप्पड़ का इंटेनसिविस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, नेफरोलॉजिस्ट, इंडोक्राइनोलॉजिस्ट और सर्जनों का एक दल उपचार कर रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग कल उन्हें देखने के लिए अस्पताल गए थे.

सियाचिन के जाबांज हनमनथप्पा की हालत नाजुक बनी हुई है: अस्पताल

सियाचिन ग्लेशियर में छह दिनों तक बर्फ के नीचे दबे होने के बाद जीवित बाहर निकाले गए 19 मद्रास रेजीमेंट के लांस नायक हनमनथप्पा कोप्पड की हालत बहुत नाजुक बनी हई है.

‘आर्मी रिसर्च एंड रेफर हास्पिटल’ की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में कहा गया है, ‘‘वह निरंतर संघर्ष कर रहे हैं और उनकी चिकित्सीय हालत बहुत नाजुक बनी हुई है.’’ इसमें कहा गया कि हनमनथप्पा कल अस्पताल में लाए जाने से वेंटिलेटर पर हैं.

बुलेटिन के अनुसार अस्पताल में चिकित्सा दल उनकी हालत निरंतर नजर अनाए हुए है और सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञता और उपलब्ध संशाधनों के साथ उनका उपचार कर रहा है.

अस्पताल ने कहा है कि फिर से गरमाहट के कारण पैदा हुई जटिलताओं एवं शरीर के ठंडे पड़ चुके हिस्सों में रक्त प्रवाह किए जाने के कारण अगले 24 घंटे उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं.

कोप्पड़ को कल वायु सेना के एक विमान में दिल्ली लाया गया था. उनके साथ बल का एक गंभीर स्थिति देखभाल विशेषज्ञ और आधार शिविर से एक चिकित्सा विशेषज्ञ था.

कोप्पड़ का इंटेनसिविस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, नेफरोलॉजिस्ट, इंडोक्राइनोलॉजिस्ट और सर्जनों का एक दल उपचार कर रहा है. उन्हें तरल पदार्थ, दवाएं और एंटीबायोटिक दिया जा रहा है ताकि उनका रक्त चाप बढ़ाया जा सके.

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग कल उन्हें देखने के लिए अस्पताल गए थे.

 

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