ज़मीन बिल के मॉनसून सत्र में आने की संभावना कम

By: | Last Updated: Tuesday, 4 August 2015 5:17 PM

नई दिल्ली: ज़मीन अधिग्रहण बिल के संसद के मॉनसून सत्र में आने की संभावना कम होती जा रही है. बिल की समीक्षा कर रही संसद की संयुक्त समिति अब 10 या 11 अगस्त तक ही अपनी रिपोर्ट दे पाएगी जबकि मॉनसून सत्र 13 अगस्त तक ही है.

 

हालांकि समिति में सहमति और सामाजिक प्रभाव आकलन संबंधी विवादित मुद्दों पर सरकार ने पीछे हटने के संकेत दिए हैं. मोदी सरकार ने ये भी संकेत दिए हैं कि समिति की रिपोर्ट में जिन बातों पर आम सहमति बन जाएगी उनको बिल में शामिल कर लिया जाएगा.  ज़मीन अधिग्रहण बिल पर मोदी सरकार को यू टर्न लेने पर मज़बूर होना पड़ा है.

 

विपक्ष के साथ-साथ सहयोगियों के विरोध और राज्य सभा में अल्पमत में होने के चलते सरकार को अपने पैर खिंचने पड़े हैं. बिल की समीभा कर रही संसद की संयुक्त समिति में इस बात पर सहमति बन गई है कि बिल के उन प्रावधानों को हटा दिया जाएगा जिन पर सबसे ज्यादा आपत्ति है.  बिल के क्लॉज 10  ( a) को हटाने पर समिति में सहमति बन गई है. इसी प्रावधान पर सबसे ज्यादा आपत्ति थी. 

 

इस क्लॉज में 5 ऐसे क्षेत्रों को शामिल किया गया था जिसके लिए ज़मीन अधिगृहित करने पर ज़मीन मालिकों की सहमति की ज़रूरत नहीं होगी.  इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, ग्रामीण विद्युतीकरण, सस्ते मकान, औद्योगिक कॉरिडोर और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल थे. इतना ही नहीं इन प्रोजेक्ट के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन की भी ज़रूरत नहीं थी जिसका प्रावधान 2013 के यूपीए के क़ानून में क्लॉज 3 में की गई थी.

 

इन बदलावों के बाद अब 2013 के यूपीए के ज़मीन अधिग्रहण क़ानून के ज्यादातर प्रावधान एक फिर बिल में शामिल कर लिए गए हैं. सरकार ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वो समिति के सुझावों को मानने के लिए तैयार है.  दिलचस्प बात ये है कि इन विवादित मुद्दों को बिल से हटाने का सुझाव समिति के बीजेपी सदस्यों की तरफ से ही दिया गया था.

 

समिति में कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बन गई जिनपर कई दलों को आपत्ति थी. जैसे बिल के उस प्रावधान को हटा दिया गया है जिसमें ज़मीन अधिग्रहण से जुड़े अधिकारियों द्वारा अनियमितता की स्थिति में उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार की मंज़ूरी को अनिवार्य बनाया गया था.

 

इसी तरह बिल से ‘ प्राइवेट एंटीटी ‘ शब्द को भी हटा दिया गया है. समिति की आज हुई बैठक में बिल के बचे हुए प्रावधानों पर चर्चा होनी थी लेकिन बैठक में आए कांग्रेस के सदस्य के वी थॉमस ने दलील दी कि समिति के सदस्य राजीव साटव कांग्रेस के उन 25 सदस्यों में शामिल हैं जिनको लोकसभा से सस्पेंड किया गया है.

 

लिहाजा वो समिति की बैठक में नहीं आ सकते और इसलिए समिति की बैठक बाद में बुलाई जाए. ऐसे में समिति की बैठक 10 अगस्त को बुलाई गई है. उम्मीद की जा रही है कि समिति के अध्यक्ष एस एस अहलुवालिया 10 या 11 अगस्त को समिति की रिपोर्ट लोकसभा में प्रस्तुत कर देंगे. पहले 7 अगस्त तक ही समिति को अपनी रिपोर्ट देनी थी. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या ये बिल अब इसी सत्र में आ पाएगा ?

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Web Title: Land Acquisition Bill
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