जमीन की जंग: देश का विकास या फिर किसान का हक?

By: | Last Updated: Tuesday, 24 February 2015 4:32 PM

नई दिल्ली: अन्ना हजारे जंतर मंतर पर जमीन के लिए धरना दिए बैठे हैं. किसानों के लिए जमीन अधिग्रहण अध्यादेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं. अन्ना का साथ देने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उनके मंच पर नजर आए और मोदी सरकार पर जमकर हमला किया. लेकिन जमीन पर हो रही जंग की इस कहानी दूसरा पहलू क्या है. कितना चौंकाने वाला है. देश का विकास या फिर किसान का हक.

 

भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर सड़क से संसद तक विरोध की आवाजें सुनाई दे रही थीं. सड़क पर अन्ना और केजरीवाल की जोड़ी मोर्चा संभाले हुए थी तो संसद में विपक्ष ने. लोकसभा में बिल पेश होने को लेकर विपक्ष पहले तो हंगामा करता रहा और फिर वॉकआउट कर दिया . विपक्ष के रुख पर सरकार ने कहा कि अल्पमत सदन में बहुमत की ताकत को कुचल नहीं सकता .

 

लोकसभा में तो सरकार ने बहुमत का हवाला देकर विपक्ष को चुप कराने की कोशिश भी की लेकिन राज्यसभा में तो सरकार अल्पमत में है. वहां तो विपक्ष ने तीखे हमले किए. ऐसा लग रहा था कि सरकार पर हमला करने के लिए तमाम पार्टियां मिलकर हमलें कर रही हैं.

 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पुरानी सरकारों का हवाला देकर अध्यादेश के पक्ष में तर्क पेश किये तो कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने मोदी सरकार के अध्यादेशों पर सवाल उठा दिए . अन्ना से लेकर केजरीवाल तक और जेडीयू से लेकर बीएसपी तक हर कोई एक सुर में मोदी सरकार को आरोपों के घेरे में खड़ा कर रहा है. लेकिन सच क्या है.

 

सरकार क्या करना चाहती है और ये अध्यादेश कानून बनकर अमल में आता है तो क्या होगा इसे समझने के लिए जरा इन आंकड़ों पर नजर डालिए.

 

Centre for Monitoring Indian Economy (CMIE) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 में अक्टूबर से दिसंबर के मुकाबले साल 2014 में अक्टूबर से दिसंबर के बीच फंसे हुए प्रोजेक्ट में 55 फीसदी की कमी आई है यानी मोदी सरकार के राज में प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ी है.

 

2013 की तीसरी तिमाही में देश में 2 लाख 50 हजार करोड़ के करीब 155 प्रोजेक्ट फंसे हुए थे. जबकि साल 2014 की तिमाही में रफ्तार पकड़ने के बाजवूद भी 1 लाख 20 हजार करोड़ के 128 प्रोजेक्ट फंसे हुए हैं. अकेले भूमि अधिग्रहण की समस्या की वजह से साढ़े 26 हजार करोड़ के 11 प्रोजेक्ट अटके हुए हैं.

 

स्टील सेक्टर में 32 हजार करोड़ के निवेश वाले 6 प्रोजेक्ट रोके जा चुके हैं जिसमें से 3 प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण की समस्या से जुड़े हुए हैं. ओडीशा में Amtek Metal & Mining का 2 मिलियन टन स्टील का प्रस्तावित प्लांट रुका हुआ है क्योंकि प्लांट के लिए जरूरी जमीन मुहैया नहीं हो पाई. 6800 करोड़ के 10 सीमेंट प्लांट फंसे हुए हैं जबकि राजस्थान की श्री सीमेंट ने कच्छ में मांग ना होने की वजह से 1500 करोड़ का अपना प्रस्तावित प्रोजेक्ट रोक दिया है.

 

इतना ही नहीं जिस भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर हर तरफ विरोध हो रहा है उसी जमीन से जुड़ी समस्याओं को लेकर ओडीशा में एएसएस एनर्जी का 3 मिलियन टन स्टील का प्लांट रुका हुआ है.

 

इन आंकड़ो को देखकर ऐसा लगता है कि देश में मानो विकास थमा हुआ है. प्रोजेक्ट की घोषणा तो हो जाती है लेकिन एलान से कुछ आगे जाने के बाद तमाम प्रोजेक्ट जमीन से लेकर मंजूरी तक के जाल में फंस जाते हैं.

 

भूमि अधिग्रहण बिल पर बहस के दौरान सरकार को घेरने के लिए विपक्ष भले खेती को देश की रीढ़ बता रहा हो लेकिन हकीकत ये है कि आजादी के बाद जिस खेती का जीडीपी में योगदान 52 फीसदी था वो अब घटकर 2012-13 में 14 फीसदी रह गया था. दस साल पहले यानी 2004-05 में भी ये सिर्फ उन्नीस फीसदी ही था. इसमें खेती से जुड़े क्षेत्रों का योगदान शामिल है. यानी किसानों की जमीन को लेकर हल्ला तो मच रहा है लेकिन देश के विकास में उद्योगों की बढ़ती भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिसके लिए जमीन की जरूरत पड़ती है.

 

खेती पर क्यों नहीं निर्भर हैं हम ?

 

आजादी के बाद पिछले 67 सालों में अर्थव्यवस्था में बदलाव हुआ है. 30 करोड़ की आबादी सवा अरब तक पहुंच चुकी है. खेती और जुड़े क्षेत्रों का योगदान जहां घटा है वहीं आजादी के वक्त जिस उद्योग और सर्विस सेक्टर का हिस्सा सिर्फ 20-20 फीसदी था उसमें सर्विस सेक्टर अब 50 फीसदी तक पहुंच गया है. 

 

स्टील सेक्टर में 32 हजार करोड़ के निवेश वाले 6 प्रोजेक्ट रोके जा चुके हैं जिसमें से 3 प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण की समस्या से जुड़े हुए हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि मोदी सरकार जिस भूमि अधिग्रहण कानून को लाने जा रही है क्या उससे नौकरियां बढ़ेंगी?

 

प्रधानमंत्री मोदी ने भी साफ कर दिया है कि सरकार इस अध्यादेश पर पीछे नहीं आएगी. बिल बिल्कुल ठीक है हालांकि सरकार ने ये भी साफ किया कि वो किसान संगठनों से इस मुद्दे पर चर्चा को तैयार है . बीजेपी ने भी अपनी ओर से 8 नेताओं की एक कमेटी बनाई है जो किसानों और उससे जुडे संगठनों की शिकायत सुनेगी.

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Web Title: land acquisition bill
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