भूमि अधिग्रहण अध्यादेश: राज्यसभा में विपक्ष ने घेरा, सरकार ने दिए बातचीत के संकेत

By: | Last Updated: Tuesday, 24 February 2015 8:32 AM

नई दिल्ली: भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को किसान विरोधी करार देते हुए आज एकजुट विपक्ष ने राज्यसभा में सरकार पर चौतरफा हमला किया हालांकि सरकार ने संकेत दिया कि इस मुद्दे का समाधान ढूंढने के लिए सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बातचीत की जा सकती है.

उच्च सदन में आज कांग्रेस, वाम, जदयू, सपा, तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों को तबाह करने वाला तथा कापरेरेट समूहों के हितों वाला करार देते हुए इसके विवादास्पद प्रावधानों को वापस लेने की मांग की. वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विभिन्न पार्टियों के साथ बातचीत के संबंध में दिये गये सुझाव से संबद्ध मंत्री को अवगत करायेंगे.

 

सदन के नेता के इस आश्वासन के बाद सदन में सामान्य ढंग से कामकाज होने लगा क्योंकि इससे पहले करीब एक घंटे इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से तीखी बहस हुई.

 

जेटली ने यह बात सपा नेता रामगोपाल यादव के इस सुझाव के जवाब में कही कि सरकार को भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के मुद्दे पर गतिरोध समाप्त करने के लिए सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत करनी चाहिए ताकि किसानों के हितों का संरक्षण भी हो जाये और विकास गतिविधियों को भी जारी रखा जा सके.

 

जदयू के के. सी. त्यागी ने यादव के सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलानी चाहिए.

 

इस मुद्दे को अन्य नेताओं द्वारा उठाये जाने की मांग किये जाने पर उपसभापति पी. जे. कुरियन ने कहा कि जब सदन के नेता जेटली यह कह चुके हैं कि सरकार इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बातचीत करेगी तो फिर इस पर सदन में अभी चर्चा की जरूरत नहीं है.

 

इससे पहले आज बैठक शुरू होने पर कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने यह मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने इस पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने मौजूदा कानून में किसी से बातचीत किये बिना संशोधन करने के लिए अध्यादेश लाने का मनमाने ढंग से काम किया है जिससे किसानों एवं गरीबों के हितों को भारी नुकसान पहुंचेगा. उन्होंने सरकार पर संसद की अनदेखी करने का आरोप लगाया. शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने भूमि अधिग्रहण विधेयक बनाते समय तत्कालीन विपक्षी दल बीजेपी सहित सभी दलों एवं किसान संगठनों से व्यापक बातचीत के आधार पर सहमति बनाई थी. उन्होंने कहा कि सरकार को विधेयक लाने से पहले इस मुद्दे पर सदन में व्यापक चर्चा करनी चाहिए और तब तक इन अध्यादेशों के अमल पर रोक लगा देनी चाहिए.

 

संसद की अनदेखी के शर्मा के आरोपों को खारिज करते हुए जेटली ने कहा कि किसी भी अध्यादेश को कानून का रूप देने के लिए संसद के दोनों सदनों से उसे पारित कराना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि संसद की अनदेखी कर कोई कानून नहीं पारित किया जा सकता.

 

कांग्रेस सहित विभिन्न पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए जेटली ने कहा कि अब तक देश में 636 अध्यादेश जारी किए जा चुके हैं जिनमें से 80 प्रतिशत अध्यादेश कांग्रेस की सरकारों के दौरान जारी किए गए. उन्होंने कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री के कार्यकाल में 70 अध्यादेश लाए गए थे जबकि वाम समर्थित संयुक्त मोर्चा के 18 महीनों के कार्यकाल में 77 अध्यादेश लाए गए थे.

 

उन्होंने कहा कि यह विधेयक लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध है और वहां से पारित होने के बाद यह उच्च सदन में आएगा. इसलिए अभी इस विधेयक पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है.

 

जेटली ने कहा कि अध्यादेश के जरिए सरकार ने किसानों को उन 13 क्षेत्रों में भी भूमि अधिग्रहण के लिए चार गुना मुआवजे का प्रावधान किया है जिन्हें पूर्ववर्ती सरकार ने अलग रखा था.

अध्यादेश के प्रावधानों का बचाव करते हुए जेटली ने विपक्ष के नेताओं को नसीहत दी कि वे अध्यादेश का फिर से पढें क्योंकि इसके प्रावधानों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में ढांचागत विकास होगा, ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा तथा सिंचाई सुविधाओं का विकास होगा. उन्होंने कहा कि ग्रामीण आधारभूत ढांचा गरीबों के लिए आवास योजना तथा औद्योगिक कोरिडोर सहित पांच मकसदों के लिए भूमि अधिग्रहण करने के मामले में सामाजिक प्रभाव सर्वेक्षण के प्रावधान को हटाने से ग्रामीण क्षेत्र को लाभ मिलेगा. पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि जेटली ने सदन को यह कहकर ‘‘गुमराह’’ किया है कि 13 अन्य कानूनों के तहत किसानों को मिलने वाला मुआवजा चार गुना कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा कर किसी के साथ कोई एहसान नहीं किया है क्योंकि 2013 में पारित कानून में इसके लिए एक अलग से अनुसूची है जिसके तहत यह काम एक साल के अंदर किया जाना था.

 

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने जेटली पर चुनिंदा सूचना देने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार अपने नौ महीने के कार्यकाल में विधेयक से ज्यादा अध्यादेश लेकर आयी है.

 

उन्होंने याद किया कि 2013 में भी जब यह विधेयक पारित हुआ था, उस समय भी उनकी पार्टी ने इसका विरोध किया था.

 

जदयू के शरद यादव ने कहा कि सरकार अध्यादेश के जरिए संसदीय समीक्षा को कुचलने का प्रयास कर रही है क्योंकि उनके पास पूर्ण बहुमत है. लेकिन सरकार के प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि मौजूदा अध्यादेश किसानों के हित में नहीं है और यह केवल उद्योगपतियों के हित में है.

 

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