7 साल पहले पाकिस्तान में घुसकर लश्कर को तबाह कर देता भारत?

By: | Last Updated: Wednesday, 7 October 2015 4:25 PM
lashkar e taiba_pakistan_Mehmood Kasuri

नई दिल्ली: क्या भारत ने सात साल पहले ही पाकिस्तान में घुसकर लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर को तबाह करने की तैयारी कर ली थी. अगर हां तो फिर सवा सौ करोड़ भारतीयों के दिल को सुकून देने वाली वो योजना पूरी क्यों नहीं हुई? 

 

पहली बार पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री महमूद कसूरी ने ये बड़ा खुलासा किया है. इसके साथ ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री कसूरी की नई किताब में 26/11 के हमले का बदला लेने की सबसे बड़ी तैयारी का पूरा ब्यौरा भी दिया गया है.

 

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री महमूद कसूरी की किताब ”नाईदर ए हॉक नॉर ए डव.”(ना बाज और ना कबूतर) में कसूरी ने भारत-पाक के बीच साल 2014 तक की तमाम घटनाओं का जिक्र किया है.

 

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने अपनी इस किताब में भारत के हर नागरिक के लिए सबसे अहम सवाल का जवाब दिया है कि क्या वाकई भारत ने लश्करे तैयबा से मुंबई हमले का बदला लेने की कोई ठोस योजना कभी नहीं बनाई?

 

किताब में इस सवाल का जवाब दिया गया है कि योजना भी बनी थी और पाकिस्तान डर से कांप भी उठा था.

महमूद कसूरी की किताब नाईदर ए हॉक नॉर ए डव में साल 2008 के दिसंबर महीने की एक मुलाकात का जिक्र है. कसूरी लिखते हैं कि वो तब विदेश मंत्री पद से मुक्त हो चुके थे, उन्हें एक अमेरिकी डिप्लोमेट का फोन आया कि कुछ लोग अमेरिका से आ रहे हैं और वो उनसे मुलाकात करना चाहते हैं. पहले थोड़ी देर के लिए बातचीत होगी और फिर वो दोपहर का खाना साथ खाएंगे.

 

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के मुताबिक जिस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ दोपहर के खाने पर उनकी मुलाकात हो रही थी वो बेहद ताकतवर लोगों का समूह था और उन्हें तभी लग गया था कि कुछ बेहद संवेदनशील है जिसके बारे में वो उनसे बात करने आ रहे हैं.

 

दरअसल उस मुलाकात में अमेरिका के सांसद जॉन मेक्कन, सांसद लिंडसे ग्राहम और अफगानिस्तान-पाकिस्तान में ओबामा की सेलेक्ट कमेटी के सदस्य रिचर्ड हॉलब्रूक शामिल हुए थे.

 

हालांकि इस किताब में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी और तीन अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच मुलाकात कहां और कब हुई इसका खुलासा खुद कसूरी ने नहीं किया है.

 

लेकिन जो बात हुई उसका नाता भारत के उस तैयारी से था जिसके मुताबिक भारत लश्कर को मिटाने की योजना बना रहा था. कसूरी की किताब नाईदर ए हॉक नॉर ए डव में इस मुलाकात का विस्तार से जिक्र किया है.

 

इस किताब में आगे की बातचीत में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने क्या धमकी दी ये बताने से पहले आपको बता दें कि जिस पाकिस्तान के जिस मुरीदके नाम की जगह पर हमले का जिक्र हो रहा था वो दरअसल लाहौर से एक घंटे की दूरी पर लश्कर-ए-तैयबा का हेडक्वार्टर था.

 

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी जिस मुरीदके का जिक्र अपनी किताब में करते हैं वो लश्कर ए तैयबा का मुख्य ठिकाना था जहां लश्कर का मुखिया हाफिज सईज भारत के खिलाफ आतंक की फसल तैयार करता था. उसके भाषण पाकिस्तान के युवाओं के जहन में नफरत भरते थे.

 

एक बार ब्रेन वाश हो जाने के बाद आईएसआई के आला अधिकारी उस नफरत को हथियार और गोला-बारूद थमा देते थे और फिर भारत की धरती को खून से रंगने के लिए निकल पड़ते थे पाकिस्तान के पाले-पोसे आतंकवादी.

 

26/11  के बाद पकड़े गए इकलौते जिंदा आतंकवादी अजमल आमिर कसाब ने पूछताछ में मुंबई हमले में लश्कर की भूमिका, नेटवर्क और तैयारी के ढेरों सबूत भी दिए थे. कसाब ने ये भी बताया था कि आतंक की ये फैक्ट्रियां कैसे भारत के खिलाफ आतंक की घटनाओं को अंजाम देती हैं.

 

मुंबई हमले के गुनहगार अजमल आमिर कसाब जिसे अब फांसी दी जा चुकी है उसके खुलासे के बावजूद पाकिस्तान लगातार इस बात पर जोर दे रहा था कि मुंबई हमले से उसका कोई लेना देना नहीं है. यहां तक कि उसने कसाब को पाकिस्तानी मानने से भी इंकार कर दिया था. इसके बाद सिर्फ एक चारा था कि पाकिस्तान को उसके किए की सजा दी जाए.

 

इसके बाद ही भारत की सुरक्षा एजेंसियों आतंक की उस पनाहगाह को हमेशा के लिए मिटाने की तैयारी कर ली थी. सीमाओं पर सेना की तैनाती तो कर ही दी गई थी लेकिन इरादा था एक गोपनीय हवाई हमले का जिसके एक ही वार से भारत के अमन चैन का दुश्मन लश्करे तैयबा की कमर हमेशा के लिए टूट जाए.

 

भारत की इस तैयारी के बारे में एक निजी खुफिया एंजेंसी 19 दिसंबर 2008 को एक रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी जिसके मुताबिक भारतीय सेना पाकिस्तान में हमले की पूरी तैयारी कर चुकी है और अब सिर्फ राजनीतिक फैसले का इंतजार कर रही है. इस बार भारतीय सेना की तैयारी पहले जैसी नहीं है बल्कि इस बार हमला तेज और गोपनीय तरीके से किया जाएगा.

 

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के मुताबिक इस रिपोर्ट के सामने आने के दो हफ्ते पहले ही यानी 7 दिसंबर साल 2008 के आसपास अमेरिकी सांसद जॉन मेक्कन ने भारत की ओर से हवाई हमले का जो इशारा किया था उससे वो चौंक गए थे.

 

किताब में ये भी ज़िक्र किया गया है कि इसके बाद कसूरी ने जॉन मेक्कन को जवाब दिया कि, ”मुझे पूरा यकीन है कि पाकिस्तान की सेना फौरन औप पूरी ताकत से मुरीदके पर होने वाले हमले का जवाब देगी. मैं आपको एक उदाहरण देता हूं.

 

मई 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण के बाद हमारे प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर पूरी दुनिया दबाव डाल रही थी कि हम परमाणु परीक्षण ना करें. खास तौर पर अमेरिका का दबाव था. यहां तक कि नवाज शरीफ को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने बदले में पाकिस्तान को ढेरों तोहफे देने का वादा भी किया था लेकिन क्या हुआ. दरअसल देश में माहौल था कि या तो नवाज बम फोड़ेगा या फिर बम उसको फोड़ेगा.”

 

कसूरी ने आगे कहा कि, ”क्या आप ये वादा कर सकते हैं कि इस जवाब के बाद भारत की सेना आगे कोई कार्रवाई नहीं करेगी?”

 

इस पर जॉन मेक्कन ने जवाब दिया कि, ”चलिए मान लीजिए भारत चुप नहीं बैठता तो फिर क्या होगा?”

 

कसूरी ने साफ कर दिया कि, ”इसके बाद जो होगा उस पर किसी का बस नहीं चलेगा. सब बेकाबू हो जाएगा. पाकिस्तान की सेना को अपनी विश्ववसनीयता बनाए रखनी है.”

 

पूर्व पाकिस्तानी विदेश मंत्री की लाहौर में 7 दिसंबर 2008 के आसपास हुई इस मुलाकात से ये साफ था कि भारत की ओर से लश्करे तैयबा के ठिकाने को मिटाने की तैयारी की जा रही थी और अमेरिका को भी इस बात का पता था. अमेरिका ने पाकिस्तान में कसूरी से मुलाकात करके सिर्फ ये जानने की कोशिश की थी इसके बाद क्या होगा और जवाब मिला था कि भारत और पाकिस्तान के बीच चौथी जंग होगी.

 

अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल के सामने जो तस्वीर थी वो बेहद भयावह थी. लगातार मीडिया में रिपोर्ट आ रही थी कि सरहद के दोनों तरफ सेना की तैनाती लगातार बढ़ रही है. दक्षिण एशिया में एक जंग की सारी आशंकाएं पलने लगी थीं. इसके बाद क्या हुआ किसी को नहीं पता लेकिन लश्कर के मुरीदके कैंप पर हवाई हमले करने का सपना कभी पूरा नहीं हुआ. भारत ने अपनी योजना को कभी जमीन पर नहीं उतारी.

 

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तब एक बयान देकर लश्कर पर सीधी कार्रवाई या फिर दोतरफा जंग जैसी दोनों आशंकाओं को खारिज कर दिया. मनमोहन सिंह ने कह दिया कि भारत 26/11  हमले में पाकिस्तान की कार्रवाई का इतंजार करेगा और अगर पाकिस्तान ऐसा नहीं करता तो भारत अपनी ओर से कोई और पहल करेगा.

 

 

पूरा 26/11 हमला:

साल 2008 की 26 नवंबर को मुंबई का एक तेज रफ्तार दिन बस गुजरने ही वाला था. रात के करीब 8 बजे थे कि अचानक एक खबर ने सिर्फ मुंबई शहर पर ही नहीं देश के हर दिल की धड़कनों पर ब्रेक लगा दिए थे. छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर दो आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी.

 

मुंबई के इस रेलवे स्टेशन पर ये पहली घटना थी लेकिन उन पलों में किसी को नहीं पता था कि ये सिलसिला अगले 80 घंटे तक यूं ही जारी रहने वाला है. मुंबई की शान गेटवे ऑफ इंडिया के ठीक सामने मौजूद पांचसितारा होटल ताज सुलग उठा.

 

दक्षिण मुंबई के कोलाबा का लियोपॉल्ड कैफे के फर्श का रंग खून से लाल हो उठा. इसके अलावा ओबराय ट्राइडेंड और नरीमन हाउस पर भी पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने कब्जा कर लिया.

 

इस हमले ने सिर्फ 166 बेगुनाह जानें हीं नहीं निगलीं, बल्कि 300 से ज्यादा लोग पाकिस्तान के इस हमले से छलनी हो गए.

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