एलजीबीटी टिप्पणी: गोवा के मंत्री ने लिया यू-टर्न, मुख्यमंत्री ने कहा ,सहयोगी को जानकारी नहीं

By: | Last Updated: Tuesday, 13 January 2015 1:03 PM
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पणजी: एलजीबीटी समुदाय का चिकित्सकीय इलाज कराने के बयान पर बवाल के बाद, गोवा के मंत्री रमेश तावड़कर ने आज यूटर्न लेते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया जबकि मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने इस मामले को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा कि उनके सहयोगी को जानकारी नहीं है . मुख्यमंत्री ने कहा कि समलैंगिकता कोई ‘‘बीमारी’’ नहीं हैं.

 

तावड़कर ने कहा, ‘‘मुझे गलत समझा गया और बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. मैं एलजीबीटी (युवाओं) के बारे में बात नहीं कर रहा था. मैं तो नशीली दवाओं के सेवन के आदी और यौन उत्पीड़न के शिकार युवाओं की बात कर रहा था.’’

 

हालांकि स्थानीय चैनल लगातार उस फुटेज को चला रहे थे, जिसमें वह एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बायसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर्स) युवाओं को ‘सामान्य’ बनाने के लिए चिकित्सीय उपचार उपलब्ध करवाने का आश्वासन देते दिखाई दे रहे थे.

 

खेल एवं युवा मामला मंत्री तावड़कर ने कल राज्य की युवा नीति की घोषणा करते हुए कहा था, ‘‘हम उन्हें सामान्य बनाएंगे. हम उनके लिए एक केंद्र बनाएंगे. जिस तरह से शराब छुड़वाने के केंद्र होते हैं, उसी तरह हमारे भी केंद्र होंगे. हम उन्हें प्रशिक्षित करेंगे और उन्हें दवाइयां भी देंगे.’’

 

तावड़कर की टिप्पणियों की कड़ी आलोचनाओं के बाद, मुख्यमंत्री पारसेकर ने यह मामला शांत करने का प्रयास करते हुए कहा कि मंत्री को इस मुददे के बारे में जानकारी नहीं होगी और उनकी लैंगिक तरजीह ‘‘सामान्य ’’ हैं.

 

पारसेकर ने कहा, ‘‘उन्हें इस मुददे के बारे में जानकारी नहीं होगी. वे (एलजीबीटी) सामान्य हैं. उन्हें किसी इलाज की जरूरत नहीं है.’’ उन्होंने कहा कि मंत्री ने इस मामले में खुद स्पष्टीकरण दे दिया है और ‘‘कोई विवाद नहीं है.’’

 

तावड़कर ने कहा, ‘‘युवा नीति नशीली दवाओं के आदी युवाओं और यौन उत्पीड़न का शिकार हुए युवाओं को एक समूह विशेष के तौर पर लेते हुए उनके बारे में बात करती है. केंद्र सरकार की प्रायोजित सामाजिक न्याय योजना में इन युवाओं के लिए प्रावधान हैं, जिन्हें गोवा में लागू किया जा सकता है.’’

 

उन्होंने कहा कि जब पत्रकारों ने मुझसे एलजीबीटी के बारे में पूछा तो मैंने उन्हें कहा, ‘‘मैं इस मुद्दे का विशेषज्ञ नहीं हूं.’’ मंत्री ने एलजीबीटी को एक केंद्रित समूह मानने से भी इंकार कर दिया जबकि फिलहाल चर्चा का विषय बना युवा नीति दस्तावेज इस समुदाय को एक केंद्रित समूह मानता है.

 

उन्होंने कल यह भी कहा था , ‘‘बाल अपराधियों, नशीली दवाओं से प्रभावित युवा, हाशिये पर मौजूद या प्रवासी युवा, भौगोलिक तौर पर सुविधाहीन युवाओं जैसे लक्षित समूहों के मामलों की ही तरह राज्य के एलजीबीटी समुदाय के बीच भी एक विस्तृत सर्वे करवाया जाएगा ताकि उनकी समस्याओं का विशेष तौर पर हल निकाला जा सके .’’

 

ऐसे दिन जब गोवा के मंत्री की टिप्पणियों ने विवाद पैदा किया, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने समलैंगिकता के अपराधीकरण का विरोध किया. उन्होंने कहा कि निजता और आजादी के अधिकारों का उल्लंघन करने से असहिष्णुता पैदा होती है.

 

बान ने संयुक्त राष्ट्र के 70 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में नयी दिल्ली में कहा, ‘‘मैं पूरी तरह से समलैंगिकता को अपराध बनाने का विरोध करता हूं. ये निजता तथा आजादी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. ये कानून असहिष्णुता पैदा करते हैं.’’

 

तावड़कर के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए चर्चित फैशन डिजायनर वेंडेल रोड्रिक ने कहा कि मंत्री इस तरह की बातें करके मुख्य मुददों से ध्यान हटाने का प्रयास कर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी ने भी मंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की.

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