अखिलेश के शेर हो रहे हैं ढेर

By: | Last Updated: Thursday, 4 February 2016 10:59 PM
Lions die in Uttar Pradesh

नई दिल्ली: बब्बर शेर….उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोदी के गृह राज्य गुजरात से 11 शेर यूपी तो बुला लिए लेकिन उनकी देखरेख उनसे नहीं हो पा रही. 8 शेरों की मौत के बाद हडकंप मचा हुआ है.

क्या उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से नहीं पाले जा रहे शेर?
क्यों अखिलेश यादव नहीं करवा पा रहे बीमार शेरों का इलाज?
आखिर क्यों इटावा के लॉयन सफारी में नहीं बच पाई 8 शेरों की जान?
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में शेरों की मौत का ये सिलसिला कहीं कटवा न दे अखिलेश की नाक

उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब ढ़ाई सौ किलोमीटर दूर इटावा के लॉयन सफारी में जिन 8 बब्बर शेरों की मौत हुई है उनमें पांच शेर के बच्चे भी शामिल हैं. शेरों के जोड़े विष्णु और लक्ष्मी को गुजरात से डेढ़ साल पहले ही यहां लाया गया था . न जाने क्या बीमारी हुई कि पिछले साल तीस अक्टूबर को पहले शेरनी लक्ष्मी की जान गई और फिर सोलह दिनों बाद उसका जोड़ीदार विष्णु भी चल बसा . इसके बाद शेरनी हीर का एक बच्चा और फिर दूसरे बच्चे की भी जान चली गई. इसके बाद शेरनी गरिश्मा के एक बच्चे की मौत. दूसरे बच्चे की और फिर तीसरा बच्चा भी नहीं बच पाया. तीन साल की शेरनी तपस्या पिछले ही साल 28 दिसंबर को लाई गयी थी. लेकिन नौ जनवरी को ही चल बसी. अब भी दो शेरों की हालात ठीक नहीं है.

शुरू में जब लायन सफारी में शेरों की मौत हुई तो वन विभाग के अफसरों ने सीएम अखिलेश यादव को समझा दिया कि गुजरात ने बीमार शेर दिए थे, जो बूढ़े भी हो चुके थे. लेकिन जब तीन साल की शेरनी तपस्या की जान गई तो सबकी पोल खुल गयी. अखिलेश ने अपने कई अफसरों को हटा दिया.

उत्तर भारत के पहले शेर प्रोजेक्ट और 800 एकड़ में फैले इटावा के लॉयन सफारी में जब शेरों की मौत का सिलसिला नहीं थमा तो मुख्यमंत्री अखिलेश ने लंदन से एक्सपर्ट्स को बुला लिया.

जोनाथन क्रैकनेल ने यूपी के सीएम अखिलेश यादव से इसी सोलह जनवरी ओ लखनऊ में मुलाक़ात की. इटावा लायन सफारी को लेकर यूपी सरकार उनसे एक समझौता करने की तैयारी में है.

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने दस साल पहले इटावा में लायन सफारी बनाने का सपना देखा था. उन दिनों वे उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री थे. लेकिन मुलायम का सपना अधूरा रहा . फिर मायावती सीएम बनी और उन्होंने सफारी की फाईल ही बंद कर दी. लेकिन 2012 में अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री बनते ही पिता के ड्रीम प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया.

सेंट्रल जू ऑथोरिटी ने अखिलेश सरकार को लायन सफारी की मंजूरी के लिए एक शर्त रखी. शर्त ये थी कि पहले शेर का प्रजनन केंद्र बनाया जाए. फिर शेरों के बच्चे होने पर उन्हे जंगल में छोड़ा जाए. बस यही से गड़बड़ शुरू हो गयी. पहले शेर-शेरनी मरे और फिर उनके बच्चे. इटावा के लिए शेर गुजरात से लाये गए हैं. लेकिन 15 महीने में 8 शेरों की मौत के बाद विपक्षी दल लॉयन सफारी को बंद करने की मांग कर रहे हैं. लेकिन यूपी के वन मंत्री का कहना है कि गुजरात ने बीमार शेर दिए थे इसीलिए उनकी मौत हो गई.

इटावा के लॉयन सफारी में शुरू में गुजरात से 11 शेर लाए गए थे लेकिन 3 शेरों की मौत के बाद सिर्फ 8 बड़े शेर ही यहां जिंदा बचे हैं. 11 शेरों से 5 शावक पैदा हुए थे लेकिन बदकिस्मती से एक भी बच्चा जिंदा नहीं बच पाया. अब सिर्फ यहां शेरों के 4 जोड़े मौजूद हैं इनमें पटौदी-जेसिका, कुआंरी-कुबेर, मनन हीर और गीगो-ग्रीस्मा की जोड़ियां शामिल हैं.

अखिलेश यादव चाहते हैं कि अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव से पहले हर हाल में लायन सफारी पब्लिक के लिए खोल दी जाए.

वैसे भी शेर के बहाने अखिलेश और मोदी पहले ही आपस में भिड़ चुके हैं. पीएम बनने से पहले यूपी के बहराइच की चुनावी रैली में मोदी ने तंज कसते हुए कहा था कि गुजरात के शेर संभालना अखिलेश के बसकी बात नहीं है तो अखिलेश ने भी पलटवार करते हुए कहा कि मोदी ने उन्हें शेर दिए हैं तो उन्होंने भी लकड़बग्घा जैसे जानवर गुजरात को दिए हैं.

नरेंद्र मोदी ने अखिलेश यादव का ये कह कर मजाक उड़ाया था कि काश उनसे शेर के बदले बिजली मांग ली होती, या फिर अमूल का दूध मांग लिया होता. ये बातें भले ही दो साल पुरानी हो गई है, लेकिन यूपी की सियासी हवा फिर शेर की तरफ घूमने लगी है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Lions die in Uttar Pradesh
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Lions die in Uttar Pradesh
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017