शिकागो भाषण की 125वीं वर्षगांठ, मोदी बोले- गंदगी फैलानेवालों को वंदे मातरम् कहने का हक नहीं

शिकागो भाषण की 125वीं वर्षगांठ, मोदी बोले- गंदगी फैलानेवालों को वंदे मातरम् कहने का हक नहीं

इस सम्मेलन का विषय (थीम) 'यंग इडिया, न्यू इंडिया' है. छात्रों का यह सम्मेलन ऐसे दिन हो रहा है, जिस दिन स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो में अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था.

By: | Updated: 11 Sep 2017 01:01 PM
नई दिल्ली:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण की 125वीं वर्षगांठ  और बीजेपी विचारक दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशती समारोह के मौके पर राजधानी दिल्ली में विज्ञान भवन में छात्रों के एक सम्मेलन को संबोधित किया. पीएम मोदी ने अपने इस भाषण मेें कई अहम बातें कहीं. उन्होंने सफाई पर जोर देते हुए कहा कि गंदगी फैलानेवालों को वंदे मातरम् बोलने का कोई हक नहीं है. पीएम मोदी ने यह भी कहा कि क्या खाएं और क्या नहीं, ये हमारी परंपरा नहीं है.

पीएम मोदी ने कहा, ''कॉलेज- युनिवर्सिटी के चुनाव में छात्र नेता कहते हैं कि हम ये करेंगे, हम वो करेंगे, लेकिन क्या उन्होंने कभी ये कहा है कि हम कैंपस साफ करेंगे.'' उन्होंने कहा, ''कॉलेज में रोज़ डे का मैं विरोधी नहीं हूं. केरल पंजाब दिवस मनाए और पंजाब केरव दिवस मनाए. विविधता ही हमारे देश की पहचान है.''

सफाई का काम करने वालों को ही वंदे मातरम बोलने का हक- पीएम मोदी

मोदी ने कहा, ''आज हम सफाई करें या ना करें, लेकिन गंदगी करने का हक हमें नहीं है. एक बार मैंने बोला था कि पहले शौचालय, फिर देवालय. आज कई बेटियां हैं जो कहती हैं कि शौचालय नहीं तो शादी नहीं करेंगे.'' मोदी ने वंदे मातरम पर कहा, ''यहां वंदे मातरम सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. मैं पूछना चाहता हूं क्या हमें वंदे मातरम कहने का हक नहीं है?'' उन्होंने कहा, ''लोग पान खाकर भारत मां पर पिचकारी मारते हैं और फिर वंदे मातरम बोलते हैं. आज सफाई का काम करने वालों को ही वंदे मातरम बोलने का हक है.''

मुझे गर्व है कि टैगोर ने श्रीलंका और बांग्लादेश का राष्ट्रगान लिखा- पीएम मोदी

मोदी ने कहा, ''क्या कभी दुनिया में किसी ने सोचा था कि किसी लेक्चर के 125 वर्ष मनाए जाएंगे?  मुझे गर्व होता है जब मैं किसी से कहता हूं कि मेरे देश के रवींद्र नाथ टैगोर ने पड़ोसी देश श्रीलंका और बांग्लादेश का राष्ट्रगान लिखा है.''

मोदी ने कहा, ''जब विवेकानंद ने ब्रदर्स एंड सिस्टर्स कहा था तो दो मिनट तक तालियां बजी थीं. विश्व को तब पता चला था कि लेडीज एंड जेंटलमैन के अलावा भी कुछ होता है.'' उन्होंने कहा, ''अमेरिका में ब्रदर्स ऐंड सिस्टर्स कहने पर हम नाच उठे, पर हम नारी का सम्मान करते हैं क्या?''

विवेकानंद की हर बात आज हमें नई ऊर्जा प्रदान करती है- पीएम मोदी

मोदी ने कहा, ''जो उनके भीतर मानव नहीं देख पाते, तो क्या स्वामी विवेकानंद के उन शब्दों पर ताली बजाने का हमको हक है, यह सोचने का विषय है.'' उन्होंने कहा, ''स्वामी विवेकानंद ने अपने अल्प जीवन में दुनिया में अपनी छाप छोड़ी थी. प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की हर बात आज हमें नई ऊर्जा प्रदान करती है.''

इस सम्मेलन का विषय (थीम) 'यंग इडिया, न्यू इंडिया' है. छात्रों का यह सम्मेलन ऐसे दिन हो रहा है, जिस दिन स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो में अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था. यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन(यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों को पीएम मोदी का यह भाषण लाइव दिखाने की व्यवस्था करने को कहा गया है.

कौन थे स्वामी विवेकानंद?

स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे. उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था. उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में साल 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था. भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुंचा था. भारत में विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है और इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है.

स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है. वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे. उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत मेरे अमरीकी भाइयो और बहनों के साथ करने के लिये जाना जाता है. उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था. आज पीएम ने भी अपने भाषण में इसका जिक्र किया है.

स्वामी जी के पांच अनमोल वचन

  •  'उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक मंज़िल प्राप्त न हो जाये'

  • 'तुम अपनी अंत:स्थ आत्मा को छोड़ किसी और के सामने सिर मत झुकाओ. जब तक तुम यह अनुभव नहीं करते कि तुम स्वयं देवों के देव हो, तब तक तुम मुक्त नहीं हो सकते'

  • मानव - देह ही सर्वश्रेष्ठ देह है, एवं मनुष्य ही सर्वोच्च प्राणी है, क्योंकि इस मानव - देह तथा इस जन्म में ही हम इस सापेक्षिक जगत से संपूर्णतया बाहर हो सकते हैं - निश्चय ही मुक्ति की अवस्था प्राप्त कर सकते हैं, और यह मुक्ति ही हमारा चरम लक्ष्य है'

  • मैं चाहता हूँ कि मेरे सब बच्चे, मैं जितना उन्नत बन सकता था, उससे सौगुना उन्न्त बनें. तुम लोगों में से प्रत्येक को महान शक्तिशाली बनना होगा- मैं कहता हूँ, अवश्य बनना होगा. आज्ञा-पालन, ध्येय के प्रति अनुराग तथा ध्येय को कार्यरूप में परिणत करने के लिए सदा प्रस्तुत रहना. इन तीनों के रहने पर कोई भी तुम्हे अपने मार्ग से विचलित नहीं कर सकता.

  • यदि तुम स्वयं ही नेता के रूप में खडे हो जाओगे, तो तुम्हे सहायता देने के लिए कोई भी आगे न बढेगा. यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले 'अहं' ही नाश कर डालो.

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