225 साल पुराने ‘घंटेवाला’ को खरीदने की लगी होड़

By: | Last Updated: Wednesday, 8 July 2015 7:27 AM
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नई दिल्ली: मुगल के जमाने की दुकान ‘घंटेवाला’ को खरीदने की होड़ लग गई है. दुकान के बंद होने के बाद अब स्थानीय कारोबारियों के बीच इसे खरीदने की बैचेनी बढ़ गई. दुकान मालिक की मानें तो इसे खरीदने के लिए 10 करोड़ तक के ऑफर मिल रहे हैं, लेकिन वो इस पुरखों की दुकान को 100 करोड़ की कीमत पर भी नहीं बेचना चाहते है. वो इस दुकान का क्या करेंगे उन्होंने इस कोई फैसला नहीं लिया है.

 

क्या है मामला?

225 सालों से चली आ रही दुकान ‘घंटेवाला’ को उसके मालिक सुशांत जैन में कुछ दिनों पहले बंद कर दिया. जैन का कहना था कि उन्हें इस दुकान को चलाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं, लोकल अथॉरिटी के अनुसार दुकान से काफी कचरा निकलता है जिसकी वजह से अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. वहीं दुकान के मालिक ने ये भी बताया कि दुकान से कोई खास लाभ नहीं मिलने के कारण उन्हें दुकान पर ताला लगाना पड़ा. दुकान बंद होने के बाद इसकी खासी चर्चा हुई और लोगों ने काफी दुख भी जताया. पिछले कुछ दिनों से दुकान पर ताला लटका हुआ है.

 

खरीददारों के बीच मची होड़

दुकान के 225 साल पुराने नाम को भुनाने के लिए बाजार में कई कारोबारी आगे खड़े हैं. दुकान में ताला लगने के बाद कई कारोबारियों ने दुकान खरीदने की पेशकश की. वो इस दुकान के लिए 10 करोड़ रुपए तक की कीमत तक देने के लिए तैयार हैं. लोगों की मानें तो इस दुकान के बगल वाले दुकान के मालिक इस दुकान को खरीदने में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. वो इस दुकान को खरीदकर फिर से मिठाई की ही दुकान खोलना चाहते है. लेकिन दुकान के मालिक सुशांत जैन ने इसे बेचने से साफ मना कर दिया. सुशांत दुकान को अपने पास ही रखना चाहते हैं, हालांकि उन्होंने ये स्पष्ट नहीं किया कि वो दुकान में क्या बेचेंगे?

 

दुकान का क्यों है महत्व?

दुकान के मालिक सुशांत जैन ने बताया कि ‘घंटेवाला’ दुकान चलाने वाली उनकी सातवीं पीढी है. 225 साल पहले उनके पूर्वजों ने उस समय के शाहजहांबाद में इस दुकान की शुरुआत की थी. तब राजा हाथियों के उपर बैठ कर इस दुकान से मिठाईयां लेने आते थे, हाथी पर जब राजा आते थे तब हाथी के गले में बंधे ‘घंटी’  को बजाकर दुकान से सामान मंगाया जाता था. तभी दुकान के मालिक ने इसका नाम ‘घंटेवाला’ रख दिया.

 

चांदनी चौक में रहने वाली सुशांत की 90 साल की दादी बताती है कि इस दुकान पर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी मिठाई लेने आ चुके हैं. यहां तक कि राजीव गांधी ने शादी के बाद इस दुकान पर आकर खाना भी खाया था.

 

विवादों के कारण कई बार बंद हुई दुकान

दुकान के मालिक ने बताया कि साल 2000 में दुकान को बंद किया गया था, लेकिन करीब 2 महीने कोर्ट में केस चलने के बाद दुकान को फिर से खोला गया. अब करीब 15 साल बाद दिल्ली की प्रदूषण नियंत्रण संस्था का कहना है कि दुकान से काफी कचरा निकलता है तो इसे पूर्वजों के उस जगह से हटा कर कहीं और शिफ्ट किया जाए. दुकान के मालिक का कहना है कि ऐसा किसी हाल में नहीं हो सकता ऐसा करने से दुकान का महत्व ही नहीं रहेगा.

 

सुशांत जैन बताते है कि 1996 में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन करने के बाद अपने पूर्वजों के बिजनेस से जुड़ गए थे, लेकिन 2000 में कोर्ट में मामला चलने और फिर 2003 में भाई के अलग हो जाने के बाद वो अकेले पड़ गए. ऐसे में वो अब इस दुकान को चलाने में सक्षम नहीं हैं. सुशांत चाहते है कि अगर कोई दुकान की फ्रेंचाइजी लेकर इसे आगे बढ़ाए तो वो उसे ये दुकान देने के लिए तैयार है. लेकिन किसी हाल में वो इस दुकान को नहीं बेचेंगे.

 

सुशांत जैन की पत्नी कहती है कि उन्होंने ऑनलाइन भी मिठाईंयां बेचनी बंद कर दी है, उन्होंने अथॉरिटी से गुहार लगाते हुए कहा कि- “हमने तो अपनी दुकान बंद कर दी, लेकिन अगर अथॉरिटी चाहे तो कई और दुकानें जो 100 साल से पुरानी हैं उसे बंद होने से बचा सकती है.”

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