Lucknow will get a lady mayor in the last 100 years।नवाबों के शहर में बनेगा इतिहास, 100 साल में पहली बार एक महिला बनेगी मेयर

नवाबों का शहर रचेगा इतिहास, 100 साल में पहली बार एक महिला बनेगी मेयर

नवाबों का शहर लखनऊ पिछले 100 साल में पहली बार किसी महिला को अपना मेयर चुनने जा रहा है. राजधानी में नगर निगम चुनावों के दूसरे चरण के तहत रविवार को मतदान होना है. बता दें कि पिछले 100 साल में लखनउ की मेयर कभी कोई महिला नहीं बनी.

By: | Updated: 24 Nov 2017 05:47 PM
Lucknow will get a lady mayor in the last 100 years

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से चुनावी गहमागहमाी तेज हो गई है. जहां एक ओर विपक्षी पार्टियां नगर निकाय चुनाव के जरिए अपना जनाधार को वापस पाने की कोशिश में हैं तो वहीं दूसरी ओर यह चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली परीक्षा है. इस बीच नवाबों के शहर लखनऊ में एक इतिहास बनने जा रहा है. दरसअल लखनऊ पिछले 100 साल में पहली बार किसी महिला को अपना मेयर चुनने जा रहा है. राजधानी में नगर निगम चुनावों के दूसरे चरण के तहत रविवार को मतदान होना है. बता दें कि पिछले 100 साल में लखनउ की मेयर कभी कोई महिला नहीं बनी.


इस बार लखनऊ मेयर की सीट महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित है. सत्ताधारी बीजेपी सहित विभिन्न दलों ने अपने महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा है. जीत किसी भी दल के प्रत्याशी का हो लेकिन इतिहास बनना तय है. पहली बार राजधानी लखनऊ को महिला मेयर मिलेगी.


उत्तर प्रदेश म्यूनिसिपैलिटी कानून 1916 में अस्तित्व में आया. बैरिस्टर सैयद नबीउल्लाह पहले भारतीय थे, जो स्थानीय निकाय के मुखिया बने थे. लखनऊ में मेयर भले ही कोई महिला नहीं रही हो लेकिन यहां से लोकसभा के लिए तीन बार एक महिला चुनाव जीतकर संसद पहुंची थीं. 1971, 1980 और 1984 में लखनऊ से शीला कौल चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची थीं.


उत्तर प्रदेश सरकार ने 1948 में स्थानीय निकाय का चुनावी स्वरूप को बदल कर प्रशासक पद के लिए चुनाव कराना शुरु किया था. इस पद पर पहली बार भैरव दत्त सनवाल नियुक्त हुए थे. संविधान संशोधन के जरिए 31 मई 1994 को लखनऊ के स्थानीय निकाय को नगर निगम का दर्जा दिया गया. 1959 के म्यूनिसिपैलिटी एक्ट में मेयर पद के लिए चुनाव कराने का प्रावधान किया गया.


रोटेशन के आधार पर इस चुनाव में महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गयी. इसी आरक्षण की वजह से लखनऊ के नगर निगन चुनाव में केवल महिला प्रत्याशी ही मैदान में हैं. इस बार के चुनाव में बीएसपी ने पूर्व अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल को प्रत्याशी बनाया है. बता दें कि बीएसपी 17 साल बाद पार्टी के चिन्ह पर नगर निगम का चुनाव लड़ रही है.


बीजेपी से मेयर पद की प्रत्याशी संयुक्ता भाटिया का कहती हैं, "अब हमारा समय आ गया है."

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