मैगी में क्या, कितना और कैसे है खतरनाक?

By: | Last Updated: Wednesday, 3 June 2015 4:20 PM

नई दिल्ली: मैगी में जो मिला वो खतरनाक है इसकी चर्चा तो रही है लेकिन वो कितना खतरनाक है और कैसे ये आपको बताते हैं. मैगी की जांच में मिले एमएसजी और लेड को शरीर के लिए खतरनाक बताया जा रहा है सबसे पहले बात एमएसजी यानि मोनोसोडियम ग्लूटामेट की करते हैं.

 

क्या होता है एमएसजी?

 

एमएसजी एक तरह का एमीनो एसिड होता है जो कई खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है.  जैसे मशरूम, टमाटर, चावल का माड़ और सिरका. इसका स्वाद एकदम अलग होता है ये ना तो खट्टा होता है ना मीठा ना नमकीन होता है और ना ही कड़वा. एमएसजी को पैकेज्ड फूड में स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.लेकिन इसके अलावा कुछ और बाते हैं जिसे समझना जरूरी है.

 

एमएसजी को ग्लूटामेट एसिड से आर्टिफिशियल तरीके से बनाया जाता है और ग्लूटामेट हमारे शरीर में मौजूद होता है शरीर में इसका इस्तेमाल नर्वस सिस्टम करता है जैसे आंखों से दिमाग में संदेश लाने ले जाने का काम. ये काम शरीर की न्यूरॉन कोशिकाएं करती हैं. और इनके बनने में ग्लूटामेट की भूमिका अहम होती है इतनी अहम की ग्लूटामेट बढ़ जाए तो न्यूरॉन कोशिकाएं खत्म होने लगती हैं और घट जाएं तो आपका दिमाग सुस्त हो जाएगा.

 

कहा जाता है कि एमएसजी मिला हुआ खाना खाने से शरीर में इसकी मात्रा 20 गुना तक बढ़ सकती है जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है. छोटे बच्चों के लिए तो ये बेहद खतरनाक है.

 

मैगी बनाने वाले नेस्ले इंडिया का कहना है, “मैगी में एमएसजी अलग से नहीं मिलाते.और हम ये मैगी के पैकेट पर लिखते भी हैं. मैगी बनाने के लिए हाइड्रोलाइज्ड ग्राउंडनट प्रोटीन, ओनियन पाउडर और गेंहू का आटा इस्तेमाल करते हैं इन सारी चीजों में ग्लूटामेट होता है हमें पूरा यकीन है कि जांच में जो ग्लूटामेट मिला है जो प्राकृतिक रूप से मौजूद इन चीजों के वजह से मिला है.”

 

घर में भी जब गेंहू का आटा रोटी बनाने के लिए तैयार किया जाता है तो पानी मिलाते ही आटे में मौजूद ग्लूटेन ग्लूटामेट में बदल जाता है और इसलिए ही आटे में इलैस्टिसिटी होती है और लोइयां काटकर रोटियां बनती है. तो पेंच यहां फंस रहा है जहां जांच में ज्यादा एमएसजी की ज्यादा मात्रा मिल रही है लेकिन नेस्ले इंडिया के मुताबिक वो तो पहले से ही प्राकृतिक रूप से मौजूद है वो अलग से इसका इस्तेमाल नहीं करते.

 

दरअसल साल 2011 के पहले भारत में कच्चे खाद्य पदार्थों की जांच का कोई नियम ही नहीं था लेकिन 2011 के बाद FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने नियम बनाया कि कच्चे माल की भी जांच की जाएगी ताकि एक लिस्ट तैयार जिससे ये पता चल सके कहां पर खतरनाक केमिकल के बनने की संभावना है और ये कौन से खाद्य पदार्थ से बन रहा है ऐसे टेस्ट हर पांच साल में किए जाते हैं.

 

मैगी जांच में फेल हो रही है लेकिन अभी सबसे बड़ी संस्था फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आनी बाकी है. एमएसजी के बाद बात दूसरे खतरनाक तत्व लेड की. मैगी के सैंपल डॉक्टरों के मुताबिक लेड एक हैवी मेटल है जिसके बारे मे कहा जाता है कि 5 माइक्रोग्राम की मात्रा भी बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है.

 

आपको बता दें कि लेड से शरीर में खून की कमी, जोड़ो में समस्या, यादाश्त कमजोर होना, किडनी डैमेज, लीवर का खतरा, दिमाग से जुड़ी बीमारियां तक हो सकती हैं.

 

नेस्ले इंडिया ने दावा किया है कि 1000 सैंपल की जांच की गई जो साढ़े 12 करोड़ मैगी के अलग-अलग पैकेट से लिए गए थे और ये सारे सैंपल में लेड की मात्रा तय मानकों से ज्यादा नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि लेड कच्चे माल से आ सकता है वो पानी भी हो सकता है

 

मैगी विवाद पर नेस्ले कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर लोगों के मन में उठ रहे 15 सवालों का जवाब दिया है. नेस्ले का कहना है कि उन्होंने एक हजार सैंपल की जांच की है जो बिल्कुल सही पाए गए हैं और मैगी खाना पूरी तरह सुरक्षित है.

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Web Title: MAGGI
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