महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों पर सबकी नजर

By: | Last Updated: Sunday, 5 October 2014 3:14 PM

नई दिल्लीः महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद और ज्यादतर सीटों की खींचतान को लेकर कांग्रेस-एनसीपी व बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की गांठ ढीली पड़ चुकी और सभी अलग-अलग चुनावी जंग में उतरकर ताल ठोक रहे हैं, ऐसे में उत्तर भारतीय मतदाताओं का महत्व काफी बढ़ गया है.

 

मुंबई, ठाणे, पुणे और कोंकण में प्रवासी के तौर के पर रह रहे उत्तर भारतीय समाज की सभी जातियों-ब्राह्मण, क्षत्रिय, कुर्मी, यादव, मौर्य, निषाद, कश्यप, बिंद, स्वर्णकार, पाल, साहू, धोबी, पासी, चौहान, राजभर, खटिक, चौरसिया आदि जातियों के सामाजिक संगठन काम कर रहे हैं, ऐसे में राजनैतिक दलों के आका सामाजिक संगठनों के प्रमुखों को पटाने में लगे हैं. मुंबई की 36, ठाणे की 24 व कोंकण की 15 विधानसभा सीटों में से लगभग 4 दर्जन सीटों को सीधे उत्तर भारतीय मतदाता प्रभावित करते हैं.

 

मुंबई को देश की आर्थिक नगरी कहा जाता है, जहां देश के सभी प्रदेशों के प्रवासीय रहते हैं. इनमें उत्तर भारतीय, विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार के लोगों की काफी अधिक यानी लगभग 40-45 फीसदी आबादी मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई व पुणे में रहती है. इनमें बिल्डर, उद्योगपति, डेयरी फार्म व होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों के अलावा बहुत से लोग रेती बालू, फल सब्जी, कपड़ा, पालिश, पेंट, मार्बल, पीओपी, फर्नीचर के धंधे में लगे हैं और टेक्सी चालकों में सर्वाधिक उत्तर प्रदेश के ही लोग लगे हैं.

 

उत्तर भारतीय मतदाताओं में देखा जाय तो सबसे अधिक निषाद, केवट, और इसके बाद मुसलमान, यादव हैं. परंतु राजनीति में सक्रिय ब्राह्मण, राजपूत व मुसलमान ही हैं. पिछड़ों में आर.आर. सिंह (पटेल) एक बार मुंबई महानगर पलिका के कांग्रेस से महापौर बने थे. पूर्व में शिवसेना से भदोही निवासी धनश्याम दूबे व कांग्रेस सेरमेश दूबे व बीजेपी से अभिराम सिंह सक्रिय राजनीति में थे. वर्तमान में कांग्रेस से कृपाशंकर सिंह (जौनपुर), राजहंस सिंह (आजमगढ़), बीजेपी से मोहित कम्बोज, अमरजीत सिंह, एनसीपी से नवाब मलिक व इनके भाई कप्तान मलिक तथा समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा आजमगढ़ निवासी अबू आजमी सक्रिय राजनीति में हैं. रमेश दूबे व कृपाशकर सिंह गृह राज्यमंत्री रह चुके हैं तो नवाब मलिक पूर्व में मंत्री रहें हैं और एन.सी.पी. के प्रवक्ता हैं.

 

महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना व कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन टूट जाने से राजनीति काफी उलझ गई है. सभी प्रमुख दल उत्तर भारतीयों को अपने-अपने पाले में करने में जुटे हैं. और इस चुनाव में काफी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा. मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे में उत्तर भारतीय काफी निर्णायक स्थिति में है. मुंबई की कई सीटों पर प्रमुख दलों ने उत्तर भारतीय उम्मीदवार बनाकर पशोपेश में डाल दिया है.

 

पूर्व में उत्तर भारतीय कांग्रेस के साथ मजबूती से जुड़े रहे, लोकसभा चुनाव के समय ‘मोदी लहर’ में बीजेपी के साथ हो लिए, पर विधानसभा चुनाव में किधर जाएंगे, अभी स्पष्ट नहीं है. उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख दल सपा व बीजेपी उत्तर भारतीय व पूर्वांचल के प्रभावी नेताओं को महाराष्ट्र की चुनाव की जंग में प्रचार के लिए भेजा है. आपस में चुनावी जंग में उतरने से उत्तर भारतीय मतदाता असमंजस में हैं और इस कारण उत्तर भारतीय मतों के बंटने से रोका नहीं जा सकता.

 

मुंबई व ठाणे की अधिकांश सीटों का फैसला उत्तर भारतीय तो करंेगे ही, लगभग दो दर्जन से अधिक सीटों को अकेले पूर्वांचली निषाद प्रभावित करने की स्थिति में हैं. कांग्रेस ने कलीना (शांताक्रुज) विधानसभा क्षेत्र से पूर्व गृह राज्यमंत्री व मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह को उतारा है तो बीजेपी ने अमरजीत सिंह व एनसीपी ने नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक को मैदान में उतार दिया है. मालाड़ की डिंडोसी सीट से कांग्रेस ने निवर्तमान विधायक राजहंश सिंह को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं से बीजेपी ने उनके मुकाबले मुंबई उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष मोहित कम्बोज को उतारा है. अन्य कई सीटों पर ही उत्तर भारतीय आपस में दो हाथ करेंगे.

 

महाराष्ट्र के सामाजिक-जातिगत समीकरण में मराठा-13 प्रतिशत, ब्राह्मण-4 दलित-13 (चमार-6, महार-7 प्रतिशत) आदिवासी-9 प्रतिशत, मुसलमान-9, आगरी-4, कोली, मच्छीमार- 11.5, भोई-3.5, मांझी, केवट-2 प्रतिशत, बंजारा-5.5, अहिर/गवली/गडेरिया-1.10, पटेल/पाटी दार/कुणबी-8.5 और अन्य पिछड़े व सवर्ण-15.90 प्रतिशत है. महाराष्ट्र की राजनीति में कोली, आगरी, बंजारा व आदिवासी का चुनावी समीकरण बनाने बिगाड़ने में काफी भूमिका होती है. बीजेपी में सपा के महाराष्ट्र प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष व आगरी सेना के अध्यक्ष राजाराम सागरी काफी ताकतवर नेता है और गणेश नाइक शिवसेना में और इसी समाज के श्रीराम सेठ शेतकारी संगठन चलाते हैं.

 

कोली समाज में डॉ. गजेंद्र भानजी, पूर्व विधायक कांती किशन कोली, दामोदर तान्डेल, रमेश पाटील कांग्रेस समर्थक हैं तो पुरुषोत्तम पाटील सपा और पूर्व एमएलसी अनंत तरे शिवसेना के प्रभावी कोली नेता हैं. बंजारा समाज के हरि भाऊ राठौर (पूर्व बीजेपी सांसद-यवतमाल) वर्तमान में कांग्रेस से एमएलसी है और काफी प्रभावी है.

 

गोपीनाथ मुंडे बंजारी/बंजारा समाज के बड़े नेता थे, परंतु उनकी मृत्यु के बाद राठौर सबसे प्रभावी बंजारा नेता हो गए हैं. मुंडे की बेटी पंकजा बीजेपी के साथ बंजारा समाज का कितना ध्रुवीकरण करा पाती हैं, भविष्य के गर्भ में हैं. दलितों में दर्जनभर से अधिक नेता हैं, पर रामदास आठवले (महाल) प्रभावी माने जाते हैं.

 

गोपीनाथ मुंडे ने माधव (माली, धनगर, वंजारा) समीकरण से पिछड़ों को काफी मजबूत व प्रभावशाली बना लिया था. माली समाज के बड़े नेताआंे में झगन भुजवल का नाम शामिल है तो गवली/अहिर/धनगर/गड़ेरिया समाज में डॉन अरुण गवली का कुछ क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव है.

 

यह तो तय है कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा, चुनाव बाद फिर गठबंधन की रणनीति के लिए जोड़तोड़ शुरू होगी, जिसमें फिर से कांग्रेस और एनसीपी साथ आ सकती है और बीजेपी व शिवसेना का भी साथ आना संभव है.

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Web Title: Maharashtra assembly election
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