मुंबई में आज हो रहा है कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण राणे के सियासी भविष्य का पैसला

By: | Last Updated: Saturday, 11 April 2015 11:21 AM

मुंबई: नारायण राणे, महाराष्ट्र की राजनीति का एक बडा चेहरा हैं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, शिवसेना के विद्रोही हैं और कांग्रेस में आने के बाद भी कुछ वैसे ही सुर में अक्सर बात करते रहे हैं. राणे इन दिनों अपने सियासी करियर के साथ एक बडा जुआं खेल रहे हैं. उन्होने बांद्रा पूर्व विधानसभा सीट पर से चुनाव लडने का फैसला किया है और ये चुनाव उनके लिये करो या मरो की लडाई बन गई है.

 

मुंबई के उपनगर बांद्रा पूर्व की विधानसभा सीट, महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना का गढ रही है. बीते विधानसभा चुनाव में यहां से शिवसेना के बाला सावंत विधायक चुने गये थे. चंद दिनों पहले वे अचानक चल बसे, जिसके बाद यहां उपचुनाव हो रहा है. शिवसेना ने उनकी पत्नी तृप्ति सावंत को चुनावी टिकट दिया है.

 

नारायण राणे जिस कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार हैं, उसकी हालत साल 2014 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर काफी खराब थी. करीब 12 हजार वोट पाकर कांग्रेस यहां चौथे नंबर पर थी.

 

चुनाव जीतने वाले शिवसेना के दिवंगत उम्मीदवार बाला सावंत को 41388 वोट मिले थे, दूसरे नंबर पर बीजेपी थी जिसे 25791 वोट मिले और तीसरे नंबर पर ओवैसी बंधुओं की पार्टी आल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन थी जिसने 23 976 वोट जुटाये.ऐसे में अब राणे को इस चुनाव में अपनी कांग्रेस पार्टी को चौथे नंबर से पहले नंबर पर पहुंचाना है.

 

कांग्रेस की प्रतिदवंदवी एनसीपी ने तो राणे के समर्थन में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, लेकिन दूसरी तरफ बीजेपी और राज ठाकरे की पार्टी एमएनस ने भी इस बार अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. इसका फायदा शिवसेना को मिल सकता है और राणे के लिये इसने मुकाबला और कडा कर दिया है.

 

इस सीट पर 80 हजार मुसलिम वोट हैं, जबकि 50 हजार दलित वोट हैं, लेकिन कांग्रेस के इन पारंपरिक वोटों को हासिल करने के लिये एआईएमआईएम जी तोड कोशिश कर रही है. हैद्राबाद के ओवैसी बंधु यानी की पार्टी के अध्यक्ष असददुद्दीन ओवैसी और उनके छोटे भाई अकबरउद्दीन ओवैसी ने बांद्रा में ही अपना डेरा जमा लिया था. दोनो पूरी आक्रमकता के साथ अपने उम्मीदवार रहबर खान के लिये चुनाव प्रचार कर रहे थे. राणे उनके निशाने पर थे.

 

शिवसेना भी अपने प्रचार में ये कहकर राणे पर निशाना साध रही थी कि वे इस इलाके से बाहर के हैं और स्थानीय नागरिकों की समस्याएं नहीं समझ सकेंगे.

 

62 साल के नारायण राणे एक मंझे हुए राजनेता हैं, सियासी खेल के अनुभवी खिलाडी हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सोच कर उन्होने यहां से चुनाव लडने का जुआं खेला जब राजनीति में उनका बुरा दौर चल रहा है. पहली नजर में ही ये सीट कांग्रेस के लिये आसान सीट नजर नहीं आती. राणे बीता विधानसभा चुनाव कोंकण की कुडाल सीट से हार गये. वो अपने बडे बेटे निलेश को भी बीता लोकसभा चुनाव जीता नहीं सके. अशोक चव्हाण को महाराष्ट्र कांग्रेस और संजय निरूपम को मुंबई कांग्रेस का अध्यक्ष चुने जाते वक्त भी उन्हें नजरअंदाज किया गया…लेकिन चुनावी गणित चाहे जो कुछ भी कहें, राणे अपनी जीत के लिये आश्वस्त हैं और इसके पीछे उनके अपने कारण हैं.

 

ये चुनाव जीतेने की खातिर नारायण राणे भी पूरा जोर लगा रहे हैं और कांग्रेस पार्टी भी. आनेवाले दिनों में राणे की महाराष्ट्र की सियासत में दशा और दिशा क्यो होगी, इसका फैसला 15 अप्रैल को होगा जब ईवीएम मशीनों में कैद वोटों की गिनती की जायेगी.

 

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Web Title: Maharashtra bypolls
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