महाराष्ट्र सर्वे: बीजेपी की बल्ले-बल्ले, उद्धव सीएम पद की पहली पसंद

By: | Last Updated: Friday, 10 October 2014 2:33 PM
Maharashtra_BJP_Shiv-Sena_NCP_Congress_Opinion Poll

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में चुनावी दंगल सज चुका है. शिवसेना के साथ गठबंधन तोड़ चुकी बीजेपी नए सहयोगी दलों के साथ चुनाव मैदान में है तो कांग्रेस और एनसीपी भी अगल-अगल लड़ाई में है, लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत मिलने के आसार नहीं हैं.

 

एबीपी न्यूज़-नीलसन के ओपिनियन पोल के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व वाली पृथ्वीराज सरकार की वापसी नामुमकिन लग रही है, लेकिन किसी भी एक पार्टी को बहुमत मिलने के आसार भी नहीं हैं.

सर्वे के मुताबिक महाराष्ट्र में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरेगी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रह जाएगी. बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को विधानसभा की 288 में से 120 सीटें मिलेंगी. शिवसेना को 67 सीटें मिल सकती हैं और ये दूसरे नंबर की पार्टी रहेगी.

 

लगातार 15 सालों से सत्ता पर काबिज़ रहने वाली कांग्रेस और एनसीपी की हालत काफी खराब है. कांग्रेस जहां 46 सीटों पर सिमट जाएगी, वहीं एनसीपी 36 सीटें जीत सकती हैं. राज ठाकरे के एमएनएस की झोली में 8 सीटें जा सकती हैं. बाकी 11 सीटें निर्दलीयों और छोटे दलों के खाते में जा सकती हैं.

 

 

अगर ये तस्वीर उभरती है तो महाराष्ट्र में सरकार बनाना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है. सर्वे के मुताबिक बीजेपी को जादुई आंकड़े से 25 सीटें कम रह सकती है. ऐसी स्थिति में सरकार बनाने के लिए बीजेपी को एनसीपी या शिवसेना से समर्थन की जरूरत लाजमी है. एमएनएस और दूसरे छोटे दल भी अहम भूमिका निभा सकते हैं.

 

 

सीएम की पहली पसंद

 

एबीपी न्यूज़-नीलसन के ओपिनियन पोल के मुताबिक चुनाव में जनता भले ही शिवसेना को सरकार बनाने लायक सीटें नहीं दे रही है, लेकिन बतौर सीएम उनकी पहली पसंद हैं शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे. 

 

सबसे ज्यादा 22 फीसद वोटर उद्धव ठाकरे को बतौर सीएम देखना चाहते हैं. दूसरी पसंद हैं बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस. इन्हें राज्य की 19 फीसद जनता पसंद करती है. जनता की पसंद के मामले में तीसरे पायदान पर हैं मौजूदा सीएम और कांग्रेस के नेता पृथ्वी राज चव्हाण. इन्हें 14 फीसद वोटर का समर्थन हासिल है. चौथे स्थान पर हैं बीजेपी नेता नितिन गडकरी. गडकरी को 9 फीसद जनता बतौर सीएम देखना चाहती है. एनसीपी नेता अजित पवार को छह फीसद तो राजठाकरे को पांच फीसद जनता बतौर सीएम देखना चाहती है.

 

 

वोट शेयर फीसद

 

वोट शेयर में भी बीजेपी अव्वल स्थान पर रहेगी. बीजेपी और उसके गठबंधन को 30 फीसद, शिवसेना को 20 फीसद, कांग्रेस को 18 फीसद वोट मिल सकते हैं. एनसीपी को 12 फीसद वोट मिलने के आसार हैं. छह फीसद वोट एमएनएस को भी मिल सकते हैं. अन्य की झोली में 14 फीसद वोट जा सकते हैं.

 

क्या कहना है जनता का?

 

जनता किसको वोट देगी और क्यों देगी. उनके सामने मुद्दे क्या हैं. पहले और अब के चुनावों में क्या अंतर है. चुनावी मिजाज जानने के लिए सर्वे एजेंसी नीलसन ने जनता से कई सवाल किए, तो बदले में कई चौंकाने वाले जवाब मिले.

 

मोदी का मैजिक?

 

48 फीसदी जनता ने कहा है कि महाराष्ट्र के इस चुनाव में मोदी का मैजिक चलेगा, लेकिन लोकसभा चुनाव की तरह हरगिज नहीं. जबकि 35 फीसद का मत है कि मोदी मैजिक खूब चलेगा.

 

कैसे इधर-उधर होंगे वोट?

 

2009 के विधानसभा में बीजेपी को वोट देने वाले 85 फीसद मतदाता आज भी बीजेपी के साथ हैं. लेकिन कांग्रेस के 69 फीसद ही वोटर उसके साथ हैं. शिवसेना के 80 तो एनसीपी के 66 फीसद जनता उसके साथ हैं. लेकिन ये तुलना अगर लोकसभा चुनाव से की जाए तो बीजेपी को नुकसान दिख रहा है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी का दामन थामने वाले महज़ 75 फीसद ही विधानसभा में वोट देने को राजी दिख रहे हैं. जबकि कांग्रेस के 84 फीसद, शिवसेना के 78 और एनसीपी के 74 फीसद वोटर उनके साथ हैं.

 

 

कैसा रहा है सीएम का कामकाज?

 

33 फीसद जनता ने सीएम पृथ्वी राज चव्हाण के कामकाज़ को अच्छा या बहुत अच्छा करार दिया. 44 फीसद ने औसत तो 20 फीसद ने बुरा या बहुत बुरा ठहराया.

 

 

इसी तरह से सरकार के कामकाज को 27 फीसद ने अच्छा या बहुत अच्छा करार दिया. 43 फीसद ने औसत तो 26 फीसद ने सरकार के काम को बुरा या बहुत बुरा बताया.

 

 

कौनसी पार्टी जितेगी चुनाव?

 

37 फीसद जनता को उम्मीद है कि बीजेपी इस चुनाव में बाजी मार लेगी, जबकि 22 फीसद की उम्मीद शिवसेना से जुडी है. 19% कांग्रेस की जीत की आस लगाए है तो 8 फीसद लोग एनसीपी की जीत मान रहे हैं.

 

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन टूट के लिए कौन है जिम्मेदार?

 

41 फीसद जनता का मानना है कि इसके लिए शिवसेना जिम्मेदार है, जबकि 31 फीसद की नज़र में बीजेपी इसके लिए जिम्मेदार है.

 

एक अलग सवाल में 13 फीसद जनता ने इस टूट के लिए मोदी को जिम्मेदार करार दिया. हालांकि, 63 फीसद जनता इस राय से सहमत नहीं दिखी.

 

 

कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन टूट के लिए कौन है जिम्मेदार?

 

ठीक इसी तरह 42 फीसद जनता का मानना है कि इसके लिए एनसीपी जिम्मेदार है, जबकि 30 फीसद की नज़र में कांग्रेस इसके लिए जिम्मेदार है.

 

क्या राज-उद्धव के साथ आने का समय है?

 

48 फीसद जनता की राय है कि ठाकरे बंधुओं को साथ आने का ये सही समय है. लेकिन 30 फीसद की राय इससे उलट है.

 

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