शिवसेना नेता अनिल और सुभाष देसाई गुपचुप दिल्ली आए, पर राजनाथ-नड्डा से मिले बिना ही वापस लौटे मुंबई

By: | Last Updated: Wednesday, 22 October 2014 1:12 AM
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नई दिल्ली: महाराष्ट्र में सरकार को लेकर भारी सस्पेंस बना हुआ है. बीजेपी को बहुमत नहीं मिला और शिवसेना के साथ गठबंधन टूट चुका है. गठबंधन फिर से जोड़ने की बात चल रही है लेकिन ये कब होगा, कैसे होगा, इसका अभी पता नहीं है. शिवसेना नेता अनिल देसाई और सुभाष देसाई के गुपचुप कल दिल्ली आए और फिर आज मुंबई लौट जाने की खबर आई है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक शिवसेना नेता जेपी नड्डा या राजनाथ सिंह से मिलने आए थे लेकिन मुलाकात नहीं हुई. अभी तक दोनों पार्टियों के बीच कोई बातचीत शुरू नहीं हुई है. 

शिवसेना सूत्रों के मुताबिक अनिल देसाई और सुभाष देसाई राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा से मुलाकात करने दिल्ली गए थे. लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई. बीजेपी की तरफ से कुछ अन्य नेताओं के नाम दिए गए थे लेकिन वो महाराष्ट्र पर बातचीत के लिए अधिकृत नहीं थे इसलिए शिवसेना नेता उनसे नहीं मिले. आगे की बातचीत पर फैसला उद्धव ठाकरे लेंगे.

 

सूत्रों के मुताबिक यह भी खबर है कि उद्धव ठाकरे दीवाली बाद दिल्ली आ सकते हैं लेकिन उससे पहले जेपी नड्डा से शिवसेना के नेता बातचीत करेंगे.

 

इससे पहले खबर थी कि बीजेपी ने अपनी शुरूआती दुविधा को छोड़ते हुए सरकार गठन के लिए अपने अलग हुए सहयोगी शिवसेना का साथ लेने का मंगलवार को संकेत दिया. शिवसेना ने महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी नेतृत्व के साथ चर्चा करने के लिए अपने दो दूत दिल्ली भेजे हैं.

 

इसके साथ ही यह भी प्रतीत हुआ कि एनसीपी से बाहर से समर्थन लेने का विकल्प बीजेपी नहीं छोड़ना चाहती ताकि शिवसेना के साथ समझौता नहीं हो पाने की स्थिति में उसके पास दूसरा विकल्प बना रहे. सूत्रों के हवाले से खबर है कि दीवाली के बाद शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं.

 

सूत्रों ने कहा कि शिवसेना ने बीजेपी नेतृत्व के साथ चर्चा के लिए अपने दो नेताओं को लगाया है. शिवसेना ने इस विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के खिलाफ तीखी बयानबाजी की थी.

 

महाराष्ट्र में सरकार गठन पर बीजेपी दे रही है शिवसेना को संकेत

 

बीजेपी नेतृत्व से चर्चा करने के लिए शिवसेना के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य अनिल देसाई और एक अन्य नेता सुभाष देसाई मंगलवार रात दिल्ली पहुंचे. शिवसेना ने इसके साथ ही अपने कट्टर नेता संजय राउत को दरकिनार कर दिया.

 

पार्टी सूत्रों ने कहा कि परोक्ष तौर पर शिवसेना को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह का महाराष्ट्र दौरा टाल दिया है. सिंह को बीजेपी विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया था. वह अब दीपावली के बाद वहां जायेंगे. यह कदम एक तरह से पर्दे के पीछे शिवसेना को बीजेपी की शर्तो पर साथ लाने की संभावना तलाशने का हिस्सा है.

 

सरकार बनाने की कवायद के लिए सघन विचार विमर्श के बीच राज्य के बीजेपी नेता विलास मुगंतीवार ने मुख्यमंत्री के मुद्दे को नया मोड़ दे दिया जब उन्होंने इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का पक्ष लिया. इस बीच वित्तमंत्री अरूण जेटली और महाराष्ट्र के लिए पार्टी के चुनाव प्रभारी ओम माथुर की टिप्पणियों से भी यह स्पष्ट है कि पार्टी ने शिवसेना के लिए अपने दरवाजे बंद नहीं किये हैं.

 

सभी विकल्प खुले रखते हुए जेटली ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और कुछ अन्य नेताओं को टेलीफोन पर बधाई देने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अपने आप में संकेत देता है (संभावित गठजोड़ के बारे में).

 

जेटली ने कहा, ‘‘हमारे पास दो प्रस्ताव हैं. शिवसेना स्वाभाविक सहयोगी रही है, एनसीपी ने बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है..महाराष्ट्र में सरकार बनाने में बीजेपी और शिवसेना का सहयोगी बनना निश्चित रूप से एक बात होगी लेकिन यदि कुछ कठिनाई पैदा होती है तो आपके पास एनसीपी के रूप में बिना शर्त समर्थन की पेशकश भी मौजूद है.’’ उन्होंने हालांकि कहा कि शिवसेना के साथ अभी अधिक बात नहीं हुई है, साथ ही जोर दिया कि दोनों सहयोगी अभी भी केंद्रीय मंत्रिमंडल और मुम्बई नगर निगम में साथ-साथ हैं.

 

जेटली ने कहा, ‘‘नि:संदेह तीन स्तरीय सरकार में से हम दो में सहयोगी हैं. यह तथ्य कि हम एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं, अपने आप में एक संकेत है.’’ केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शिवसेना शामिल है और मुंबई नगर निगम में भी दोनों दल सहयोगी हैं.

 

बीजेपी के महाराष्ट्र चुनाव प्रभारी ओम प्रकाश माथुर ने भी इसी आधार बात कही और कहा कि उनकी पार्टी ‘‘खुश’’ होगी यदि उसकी ‘‘स्वाभाविक सहयोगी’’ शिवसेना साथ आती है. उन्होंने कहा,‘‘हमारा मानना है कि पार्टी जो वषरें तक हमारे साथ रही है. यदि स्वाभाविक सहयोगी जो हमारे साथ थी हमारे साथ आती है, हम खुश होंगे. लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो राजनीति में सभी विकल्प खुले हैं.’’बीजेपी ने 288 सदस्यीय विधानसभा में 122 सीटें जीती हैं जो बहुमत से 23 सीटे कम है. वहीं शिवसेना ने 63 और एनसीपी ने 41 सीटें जीती हैं.

 

शिवसेना 63 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. एनसीपी के पास 41 सीटें हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या वह शरद पवार के नेतृत्व वाले दल एनसीपी से गठबंधन की संभावना को खारिज कर रहे हैं, जेटली ने कहा कि राजनीति में किसी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, ‘‘जब आप बातचीत कर रहे होते हैं तो पार्टी कुछ भी नहीं बोलती.’’ इस बारे में जोर देकर यह पूछे जाने कि क्या वह एनसीपी को ‘ना’ कह रहे हैं, उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसी को हां नहीं कह रहा हूं.’’ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आज जेटली से उनके आवास पर मुलाकात की. उन्होंने जेटली से करीब आधे घंटे तक बात की और सरकार बनाने की रणनीति पर चर्चा की.

 

समझा जाता है कि जेटली और गडकरी के बीच महाराष्ट्र में पार्टी की पसंद के बारे में चर्चा हुई. एनसीपी ने पहले ही बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की है लेकिन बीजेपी ने अभी यह तय नहीं किया है कि वह पेशकश स्वीकार करनी है या नहीं.

 

सूत्रों ने कहा कि अगर शिवसेना तेवर दिखाती है तो बीजेपी अपना नेता चुनकर सरकार बनायेगी तथा एनसीपी के प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन से सदन में बहुमत साबित करेगी.

 

जेटली से बातचीत करने के बाद गडकरी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं से विचार विमर्श करने के लिए नागपुर रवाना हो गए. बताया जाता है कि संघ की इच्छा है कि हिन्दुत्व की शक्तियां एकजुट रहें. लेकिन अंतिम निर्णय उसने बीजेपी पर छोड़ दिया है.

 

इस बीच मुख्यमंत्री पद के लिए महाराष्ट्र में बीजेपी प्रमुख देवेन्द्र फड़नवीस का नाम सबसे आगे चल रहा है. हालांकि इस दौड़ में एकनाथ खडसे और विनोद तावडे भी शामिल हैं.

 

इस बीच गडकरी के नयी दिल्ली से नागपुर पहुंचने पर शानदार स्वागत किया गया तथा बाद में विदर्भ क्षेत्र से पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों का एक समूह उनके आवास के बाहर एकत्रित हुआ और उनके नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए नारेबाजी की. जब संवाददाताओं ने गडकरी से मुगंतीवार की उस मांग के बारे में पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनना चाहिए, गडकरी ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य की राजनीति में लौटना नहीं चाहते.

 

बीजेपी विधायक दल की बैठक के लिए कल मुम्बई पहुंचे अच्छी संख्या में विधायक आज सीधे नागपुर स्थित गडकरी के आवास पहुंचे और उनके पक्ष में नारेबाजी की. बीजेपी विधायक दल की बैठक नहीं हो पायी थी.

 

इस घटनाक्रम को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है ताकि बीजेपी नेतृत्व को एक संकेत दिया जा सके जिसे अभी मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला करना है.

 

इससे पहले दिन में पूर्व महाराष्ट्र बीजेपी प्रमुख एवं पार्टी की कोर समिति के सदस्य मुगंतीवार ने मुम्बई में संवाददाताओं से कहा कि गडकरी को राज्य की राजनीति में वापस आना चाहिए.

 

उन्होंने कहा, ‘‘प्रदेश बीजेपी नेताओं का मानना है कि नितिन गडकरीजी को राज्य की राजनीति में वापस आना चाहिए और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद संभालना चाहिए. उनके पास काफी प्रशासनिक अनुभव है जो उन्हें एक आदर्श उम्मीदवार बनाता है.’’ विदर्भ क्षेत्र खुलकर बीजेपी के समर्थन में आया है और क्षेत्र में 62 सीटों में से 44 सीटें जीती हैं. वहां अलग राज्य एक विवादास्पद मुद्दा है.

 

महाराष्ट्र में 122 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. दूसरे नंबर पर शिवसेना के 63 विधायक हैं.

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