महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मंजूरी मिली, NCP के समर्थन वापस लेने पर पृथ्वीराज चव्हाण ने दिया था इस्तीफा

By: | Last Updated: Monday, 29 September 2014 9:01 AM
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नई दिल्ली: महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है. चुनाव में गठबंधन टूटने के बाद एनसीपी ने कांग्रेस की पृथ्वीराज चव्हाण की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.

 

इसके बाद सीएम चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया था. अब राज्यपाल ने उन्हें अगली व्यवस्था तक सीएम बने रहने के लिए कहा था लेकिन अब राष्ट्रपति शासन लग गया है.

 

महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा के 15 साल पुराने गठबंधन के टूटने और फिर मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के इस्तीफा देने के बाद आज राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महाराष्ट्र में केंद्रीय शासन को लागू करने की उद्घोषणा पर हस्ताक्षर कर दिया. कल केंद्रीय कैबिनेट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी.

कल गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका में होने के कारण राजनाथ सिंह ने बैठक की अध्यक्षता की.

राकांपा की ओर से समर्थन वापस लिए जाने के साथ बीते शुक्रवार को चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया था. राज्यपाल विद्यासागर राव ने कल उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया.

महाराष्ट्र में 15 अक्तूबर को विधानसभा चुनाव होने वाला है. इसके मद्देनजर राज्यपाल ने केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की थी.

शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने चव्हाण पर उसकी उपेक्षा करने और सीटों के तालमेल पर वार्ता को अवरूद्ध करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस से गठबंधन खत्म कर लिया है.

 

चव्हाण का इस्तीफा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया है. आपको बता दें कि कल ही एनसीपी के नेता अजीत पवार अपने समर्थन वापस लेने की सूचना राज्यपाल को दे दिया था. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति शासन लगेगा या राज्यपाल इनको ही कार्यकारी मुख्यमंत्री बनाए रखेंगे.

 

आपको बता दें कि एनसीपी ने कांग्रेस से अपना गठबंधन तोड़ लिया था. एनसीपी नेता अजीत पवार ने कहा कि हम चाहते हैं कि सेक्यूलर वोट एक जगह रहे. हमारे नेता हमेशा सकारात्मक भूमिका देते रहे. विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे थे तो हमारे बीच संवाद थे. कभी कोई संवादहीनता नहीं थी.

 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि 1999 में राष्ट्रवादी की स्थापना हुई. महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच समझौता की वजह धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाना था. धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने के लिए हम यूपीए के साथ हुए.

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