गांधी आपत्तिजनक कविता मामला: सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकारी प्रकाशक की माफ़ी

By: | Last Updated: Thursday, 14 May 2015 5:16 PM

नई दिल्ली: महात्मा गांधी के बारे में आपत्तिजनक कविता का प्रकाशन करने वाले एक शख्स की माफ़ी को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. हालांकि, कविता लिखने वाले कवि पर मुकदमा जारी रहेगा.

 

महात्मा गांधी के बारे छपी इस विवादित कविता का मामला 21 साल पुराना है.’गांधी माला भेटला होता’ यानी ‘मुझसे मिले गांधी’ नाम की जिस कविता के प्रकाशन को लेकर ये मामला है उसे 1984 में कवि वसंत दत्तात्रेय गुर्जर ने लिखा था.

 

बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र कर्मचारी यूनियन की पत्रिका ने 1994 में इस कविता का प्रकाशन किया. इस कविता में कथित तौर पर गांधीजी के बारे में अश्लील और आपत्तिजनक बातें लिखी गईं हैं.

 

कविता के प्रकाशन को ले कर पत्रिका के संपादक और बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र कर्मचारी यूनियन के महासचिव देवीदास तुलझापुरकर और कवि वसंत दत्तात्रेय गुर्जर के खिलाफ पुणे में आईपीसी की धारा 292 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया.

 

अश्लील सामग्री के प्रकाशन के लिए लगने वाली इस धारा के तहत 2 साल तक की सज़ा हो सकती है. देवीदास तुलझापुरकर ने इस मुक़दमे को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी लगाईं थी.

 

इससे पहले 2010 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुक़दमे को निरस्त करने से मना करते हुए दोनों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. इस बीच प्रकाशक तुलझापुरकर ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी गलती को मानते हुए माफ़ी की दरख्वास्त की.

 

आज सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफ़ी को मंज़ूर कर लिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें मामले में आरोप तय करने के लिए कहा गया था.

 

अब तुलझापुरकर को माफ़ी मिल जाने के बाद उन्हें मुक़दमे से राहत मिल गयी है.  लेकिन कवी वसंत गुर्जर को मुक़दमे का सामना करना पड़ेगा. इस मामले की सुनवाई के दौरान मामले सुप्रीम कोर्ट ने महात्मा गांधी के बारे में आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर नाराज़गी जताई थी.

 

बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस दीपक मिश्रा कहा था, “जब बात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हो तो सार्वजनिक रूप से किस तरह की बात कही जा सकती है, इसे लेकर पैमाना सख्त होना चाहिए.”

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Web Title: mahatma gandhi
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