जीतन राम मांझी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया

By: | Last Updated: Friday, 20 February 2015 1:19 AM
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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की किस्मत का फैसला आज होने वाला है. मांझी को आज बिहार विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है. बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के अभिभाषण के बाद बहुमत परीक्षण होगा. सुबह 11 बजे से विधानसभा की कार्रवाई शुरू होगी.

 

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में अभी 233 सदस्य ही हैं जिसका बहुमत का आंकड़ा 117 होता है. नीतीश के साथ 130 विधायक हैं जबकि मांझी के पास अभी सिर्फ 8 विधायक ही हैं क्योंकि कोर्ट ने बाकी 8 निलंबित विधायकों के वोट देने पर रोक लगा दी है.

 

ऐसे में बीजेपी के 87 विधायकों के समर्थन के बाद भी उनकी कुल तादाद 95 तक ही पहुंचती है यानी बहुमत के 117 के आंकड़े से 22 विधायक कम.

 

बीजेपी लगाएगी मांझी की नैया पार?

बिहार में इस समय कोई पार्टी सत्तारूढ़ नहीं है. जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री हैं, मगर पार्टी से निकाले जा चुके हैं. जनता दल (युनाइटेड) सत्तारूढ़ था, मगर शुक्रवार को विधानसभा में विपक्ष के साथ बैठेगा. जो दल विपक्ष में था, वह मांझी का समर्थन करेगा, यानी सदन का नजारा बेहद दिलचस्प होगा. जद (यू) को अब सदन में विपक्ष का दर्जा मिल गया है और मांझी को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का साथ. बहुमत साबित करने के लिए बेदल मुख्यमंत्री के पास अब कुछ ही घंटे बचे हैं.

 

पटना में गुरुवार को एक बार फिर बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें केंद्र में सत्तारूढ़ दल के विधायक मांझी सरकार को समर्थन देने के मूड में दिखे. बीजेपी प्रदेश नेतृत्व ने सदन में मांझी के विश्वास मत प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला ले लिया है.

 

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “बीजेपी के सभी सदस्य सदन में मांझी सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे. बीजेपी एक महादलित का इस तरह अपमान होते नहीं देख सकती. व्हिप जारी कर दिया गया है.”

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी सत्ता में हिस्सेदारी नहीं करेगी और न ही सरकार में शामिल होगी. बीजेपी ने सदन में गुप्त मतदान करवाने की मांग भी की.

 

इधर, विश्वास मत से एक दिन पूर्व बिहार विधानसभा में जद (यू) को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा मिल गया. विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी. अधिसूचना के मुताबिक, जद (यू) के विधायक और पूर्व मंत्री विजय कुमार चौधरी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया गया है.

 

जद (यू) को मुख्य विपक्षी दल माने जाने के खिलाफ बीजेपी के विधायक विधानसभा के सामने धरना पर बैठ गए और इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए सदन अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की.

 

बीजेपी के विधायक और मुख्य प्रवक्ता विनोद नारायण झा ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष नीतीश कुमार के दबाव में असंवैधानिक फैसले ले रहे हैं. पूर्व प्रतिपक्ष नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि लोकतंत्र के इतिहास में शायद यह पहला मौका होगा जब सत्ता और विपक्ष में एक ही पार्टी बैठेगी. उन्होंने कहा कि जद (यू) के दबाव में अध्यक्ष द्वारा ऐसा निर्णय लिया गया है.

 

इस बीच, जद (यू) ने पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में मांझी खेमे पर विधायकों के खरीद-फरोख्त करने का न केवल आरोप लगाया, बल्कि सबूत के तौर पर एक ऑडियो भी जारी किया.

 

जद (यू) विधायक शरफुद्दीन ने आरोप लगाया कि मांझी का समर्थन करने के लिए सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की ओर से उन्हें पद और पैसों का लालच दिया गया. शरफुद्दीन ने पप्पू यादव से हुई बातचीत की रिकॉर्डिग पत्रकारों को सुनाई.

 

शिवहर के विधायक ने कहा कि पप्पू यादव ने अपने ही मोबाइल पर उन्हें मांझी से भी बात करवाई. मांझी ने कहा, “जल्द आइए, आपको बड़ा पद मिलने वाला है.”

 

शिवहर विधायक ने मीडिया से कहा कि मांझी खेमे के लोगों ने समर्थन लेने के लिए उन्हें कई बार फोन किया गया है.

 

जद (यू) के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि विधायकों को पैसों और पदों का लालच देकर खरीदने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि मांझी की सरकार मात्र 12 विधायकों के समर्थन से चल रही है. उन्होंने राज्य के मौजूदा हालत के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया.

 

गुरुवार को पटना पहुंचे जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री मांझी मुंगेरी लाल के सपने बेच रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार के साथ पर्याप्त संख्या बल है.

 

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मांझी जनता को गुमराह कर रहे हैं और मुंगेरी लाल के सपने बेच रहे हैं.” उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार के साथ पर्याप्त संख्या बल है और अगली सरकार नीतीश के नेतृत्व में बनेगी.

 

बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार से ही शुरू हो रहा है. सत्र के पहले दिन मांझी सरकार को बहुमत साबित करना है. मांझी के पक्ष में कितने विधायक खड़े होंगे, यह किसी को नहीं पता. मगर नीतीश खेमा 130 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है.

 

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 10 सीटें रिक्त हैं. बहुमत साबित करने के लिए कुल 117 विधायकांे की संख्या जरूरी है.

 

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में वर्तमान समय में जद (यू) के 111, बीजेपी के 87, कांग्रेस के पांच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 24, निर्दलीय पांच तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के एक सदस्य हैं.

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