याकूब की पत्नी को सांसद बनाने की मांग पर नप गए घोसी, पार्टी ने पद से हटाया

By: | Last Updated: Saturday, 1 August 2015 2:24 AM
Make Memon’s wife MP demands Samajwadi

नई दिल्ली:  याकूब मेमन की की पत्नी को राज्य सभा सांसद बनाने की मांग करने वाले महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अपाध्यक्ष फारूक घोसी को भारी पड़ी. पार्टी ने उन्हें उपाध्यक्ष पद से हटा दिया है.

 

आपको बता दें कि महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के फारूक घोसी ने याकूब मेमन की पत्नी राहीन को राज्यसभा भेजने की मांग की थी. जिस पर हुए बवाल के बाद उन्होंने सफाई दी कि याकूब के किए की सजा उसकी पत्नी को नहीं मिलनी चाहिए. इस मामले पर फारूक ने कहा था कि यदि मुलाय़म सिंह ऐसा फैसला लेते हैं, तो इसके कष्ट पर मरहम लगाया जा सकता हैं. उन्होंने कहा, ”मैंने जो पत्र मुलायम सिंह को लिखा है इस बारे में न मुलायम सिंह से बात हुई हैं ना प्रदेश अध्यक्ष अबु आजमी से, यह मेरी व्यक्तिगत राय हैं.

 

आपको बता दें कि फारूक ने याकूब की पत्नी को सांसद बनाने की मांग करते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी लिखी थी.

 

इस चिट्ठी में फारूख ने मुलायम सिहं यादव को लिखा है, ‘आपसे गुजारिश है कि मुंबई 30 जुलाई 2015 को याकूब मेमन को फांसी देने के बाद मेरे मन में यहां कुछ सवाल खड़े हुए जो आपको लिख रहा हूं. याकूब मेमन के साथ उनकी पत्नी राहीन याकूब मेमन  भी गिरफ्तार हुई थी परन्तु माननीय न्यायालय ने याकूब मेमन को दोषी करार दिया और श्रीमती राहीन को बरी कर दिया. और वह भी कई सालों तक जेल में रही कितनी तकलीफ सही होगी और हम समाजवादियों की एक खूबी है कि मन में जो बात रहे उसे कहना जरुरी है.’

 

अपने पत्र में उन्होंने आगे लिखा कि ‘आप एक नेता है और आप गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए जाने जाते हैं. मेरे मुताबिक याकूब की पत्नी राहीन को इस समय मदद की जरूररत है और बहुत सारी इस देश में उसी की तरह दयनीय हालत में अपनी जिंदगी गुजार रही हैं. हमें इन औरतों की मदद करनी चाहिए. आज मुस्लिमों को वोट बैंक की तरह देखा जाता है और मुख्य राजनीतिक पार्टियों ने उन्हें साइड लाइन कर दिया है.’

 

फारूक का कहना है, ‘राहीन 21 सालों से अपने पति के बिना रह रही है. अगर राहीन राजनीति में आती है तो वह जरूरतमंद लोगों की आवाज बन सकती है. इसलिए मैंने मुलायम सिंह यादव से उसे सांसद बनाए जाने की मांग की है.’

 

बोले आजम खान-

फारूक घोसी के बयान पर उत्तर प्रदेश के मंत्री आज़म खान ने एबीपी न्यूज़ से कहा, “ये अभिव्यक्ति की आज़ादी है. फारूक घोसी ने मुलायम सिंह को चिट्ठी लिखी है और अब फैसला मुलायम सिंह यादव को करना है. वैसे राज्य सभा से कौन सांसद बनेगा यह पार्लियामेंटरी बोर्ड तय करती है, इसलिए उन्हें अपनी बात पार्लियामेंटरी बोर्ड के सामने रखनी चाहिए. वैसे अभिव्यक्ति की आज़ादी का सबक बीजेपी ने ही सिखाया है.”

 

त्रिपुरा के राज्यपाल ने भी दिया विवादित बयान

कल त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया है कि खुफिया एजेंसियों को 1993 मुंबई विस्फोट के गुनहगार याकूब मेमन के परिजन और दोस्तों को छोड़कर जनाजे में एकत्र हुए सभी लोगों पर नजर रखना चाहिए क्योंकि उनमें से कई ‘संभावित आतंकवादी’ हो सकते हैं.

 

अपने बयानों के लिए आलोचना झेलने वाले राज्यपाल ने ट्वीट किया, ‘यह मेरा संवैधानिक दायित्व है कि सार्वजनिक हित के मुद्दे को लोगों के ध्यान में लाऊं. इससे राज्यपाल के तौर पर मेरी हैसियत से कोई समझौता नही हुआ है.’

 

कांग्रेस ने राज्यपाल तथागत रॉय के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए उनकी राय और सोच पर सवाल उठाए हैं. राय की आलोचना करते हुए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं और उनका बयान संविधान के मुताबिक नहीं है.

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