विरोध के नाम पर 'मुसलमान' कानून हाथ में क्यों ले रहे हैं?

By: | Last Updated: Friday, 8 January 2016 4:38 PM
Malda fire reaches Bihar’s Purnea

नई दिल्ली: पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी के बयान को लेकर हंगामा थम नहीं रहा है. पश्चिम बंगाल के मालदा के बाद बिहार के पूर्णिया में भी कल हिंसा हुई है. सवाल ये है कि जब कमलेश तिवारी के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हुई है फिर माहौल बिगाड़ने की ये कोशिश क्यों हो रही है और ये कर कौन रहा है.

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पहली तस्वीर पश्चिम बंगाल के मालदा की 3 जनवरी की हैं. जबकि दूसरी तस्वीर बिहार के पूर्णियां जिले की हैं . दोनों जगहों पर तोड़-फोड़ और हिंसा के पीछे वजह एक ही है .

 

पूर्णियां में आल इंडिया इस्लामिक काउंसिल के बैनर तले एक विरोध जुलूस निकाला गया था . यूपी के अखिल भारतीय हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी के एक भड़काऊ बयान के विरोध में जुलूस निकाला गया था . बायसी के पूर्व विधायक मोहम्मद रुकनुद्दीन के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया था . काउंसिल की ओर से कमलेश तिवारी को फांसी देने की मांग हो रही थी . लेकिन जुलूस में शामिल लोगों ने बायसी थाने पर अचानक धावा बोल दिया . भीड़ ने थाने में जमकर तोड़फोड़ की . थाने के अंदर सामानों को भी नुकसान पहुंचाया . थाने के जरूरी कागजात भी लेकर चले गए . हालांकि आल इंडिया इस्लामिक काउंसिल ने तोड़फोड़ को भीड़ में शामिल कुछ शरारती तत्वों की साजिश करार दिया है .

 

इससे पहले कमलेश तिवारी के विवादित बयान को लेकर मालदा में हजारों की भीड़ ने हिंसा फैलाई थी . थाने के अंदर भी आगजनी की गई थी . दो दर्जन से ज्यादा गाड़ियों में आग लगा दी गई थी . मालदा में भी मुस्लिम समुदाय कमलेश तिवारी को फांसी की मांग कर रहा था.

 

45 साल का कमलेश तिवारी अखिल भारतीय हिंदू महासभा का नेता है, उस पर कई बार भड़काऊ बयान और धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप लग चुके हैं. कमलेश तिवारी कई विवादों में जेल भी जा चुका है. कमलेश के ताजा विवाद की शुरुआत नवंबर में हुई थी. उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खान ने कुछ दिन पहले कहा था कि आरएसएस में लोग इसलिए शादी नहीं करते हैं क्योंकि वो समलैंगिक होते हैं. इसके जवाब में कमलेश तिवारी ने पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी.

 

सोशल मीडिया पर तिवारी का बयान आग की तरह फैला और उतनी ही तेजी से देश भर में विरोध प्रदर्शन भी हुए . 2 दिसंबर को लखनऊ में कमलेश तिवारी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. कमलेश तो जेल चला गया लेकिन मुस्लिम समुदाय के विरोध प्रदर्शन नहीं रुक रहे हैं . पहले मालदा और अब पूर्णिया में हिंसा के बाद सवाल खड़ा होता है कि जब कानून कमलेश तिवारी पर कार्रवाई कर रहा है, तो लोग विरोध के नाम पर कानून अपने हाथों में क्यों ले रहे हैं?

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