मालेगांव बम धमाका: सरकारी वकील रोहिणी के आरोपों पर NIA का इनकार

By: | Last Updated: Friday, 26 June 2015 1:09 AM
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मुंबई/नई दिल्ली: मालेगांव के वर्ष 2008 के बम विस्फोट मामले में विशेष लोक अभियोजक ने आज एक विवाद को हवा देते हुए आरोप लगाया कि गत वर्ष मई में नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उनसे इस मामले में नरम रूख अपनाने को कहा था. हालांकि एजेंसी ने इस आरोप गलत बताते हुए खारिज कर दिया. इस मामले में कुछ हिन्दू कट्टरपंथी आरोपी हैं.

 

मामले में विशेष लोक अभियोजक रोहिणी सालियान ने आरोप लगाया कि एनआईए के एक अधिकारी ने स्वयं उनसे मुलाकात की और प्रतीत होता है कि ऐसा उच्चाधिकारियों के कहने से किया गया होग.

 

उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में दावा करते हुए कहा, ‘‘एनआईए के एक अधिकारी ने मुझे फोन किया और कहा कि वह मुझसे मिलना चाहते हैं. उसके बाद वह पिछले साल किसी वक्त मुझसे मिले और इस मामले में आरोपियों के प्रति नरम रहने को कहा.’’ अभियोजक ने कहा, ‘‘इस साल 12 जून को एक बार फिर वही अधिकारी मुझसे मिले और मौखिक रूप से कहा कि मेरी जगह इस मामले में किसी अन्य वकील को नियुक्त किया जाने वाला है. मैने उनसे कहा कि मेरे बिल का भुगतान करवा दें और इस मामले में अभियोजक के तौर पर मेरा नाम हटवा दें. हालांकि आज तक न तो मेरे स्थान पर किसी अन्य वकील को नियुक्त करने की कोई अधिसूचना जारी हुई और न ही मेरे बिल अदा किए गए.’’ बहरहाल सालियान ने उनसे मिलने वाले अधिकारी का नाम बताने से इंकार कर दिया.

 

उधर, एनआईए ने वकील के आरोपों से इंकार करते हुए दो पेज का एक स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें इस बात से इंकार किया गया कि एजेंसी के किसी अधिकारी ने सालियान को कोई अनुचित सलाह दी है. इसमें सालियान के इस आरोप से भी इंकार किया गया है कि उनके द्वारा देखे जा रहे मामलों में उनके अभियोजन कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया गया था.

 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कहा, ‘‘एनआईए विशेष लोक अभियोजक को, एजेंसी के किसी अधिकारी द्वारा अनुचित ब्रीफिंग जारी करने या जिन एनआईए मामलों को वह देख रही हैं उनके अभियोजन कार्यों में अड़चन पैदा करने से पूरी तरह से इंकार करती है.’’ इस कार्य से उन्हें मुक्त नहीं किये जाने के दावे के बारे में एनआईए ने कहा कि उन्हें गैर अधिसूचित करने का काम शुरू हो चुका है.

 

वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में 12 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित शामिल हैं. इन 12 व्यक्तियों में से चार जमानत पर हैं.

 

एनआईए ने मामले को 2011 में अपने हाथ में लिया था और बाद में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. यद्यपि उन्हें एक चूक के चलते जमानत मिल गई क्योंकि उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर नहीं किया गया था.

 

29 सितम्बर 2008 को हुए मालेगांव विस्फोट में चार व्यक्ति मारे गए थे और 79 अन्य घायल हो गए थे. प्रारंभिक जांच में इस घटना में अल्पसंख्यक समुदाय के शामिल होने का संदेह जताया गया. यद्यपि तत्कालीन एटीएस प्रमुख दिवंगत हेमंत करकरे के नेतृत्व में हुई जांच में दक्षिणपंथी चरमपंथियों के शामिल होने का संदेह जताया गया तथा साध्वी ठाकुर और अन्य गिरफ्तार कर लिये गए.

एनआईए ने दावा किया कि विशेष लोक अभियोजक का काम तब शुरू होता है जब जांच एजेंसी सुनवाई अदालत में आरोपपत्र पेश कर देती है. इसमें कहा गया कि 2008 का मालेगांव विस्फोट मामला अभी तक सुनवाई के स्तर पर नहीं पहुंचा है. लिहाजा यह कहना गलत है कि अदालत में पेश होने के लिए सालियान की अनदेखी कर दी गयी.

 

एनआईए ने कहा कि इस वर्ष जनवरी में उसके महानिदेशक शरद सिन्हा, गृहमंत्रालय के एक अधिकारी और एजेंसी के कानूनी सलाहकार ने विशेष लोक अभियोजक के पैनल में पांच साल या उससे अधिक समय से बने हुए लोगों के प्रदर्शन, उपयुक्तता एवं उपलब्धता की समीक्षा की थी. इसकी सिफारिशों के आधार पर एजेंसी की मुंबई शाखा ने रोहिणी सालियान सहित तीन विशेष लोक अभियोजक को गैर अधिसूचित करने की 16 जून को सिफारिश की थी. सालियान के विशेष लोक अभियोजक के रूप में पांच साल 31 अगस्त को पूरे हो रहे हैं. इस बीच, कांग्रेस ने आज राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के महानिदेशक को हटाने की मांग की और वर्ष 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में विशेष लोक अभियोजक रोहिणी सालियान की उस टिप्पणी को लेकर राजग सरकार पर हमला बोला जिसमें उन्होंने दावा किया था कि एनआईए ने उनसे इस मामले में नरम रूख अपनाने को कहा था .

 

कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने मांग की कि मालेगांव मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए क्योंकि गृह मंत्रालय के अधीन इस एजेंसी द्वारा की जा रही जांच पर कांग्रेस को कोई भरोसा नहीं रह गया है.

 

इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सालियान के खुलासे पर उनका रूख स्पष्ट करने की मांग की और साथ ही यह भी कहा कि इस मामले में उपर के जिन लोगों का उल्लेख आया है उनका खुलासा होना चाहिए.

 

भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने कहा कि जब तक उपर के लोगों द्वारा नहीं कहा जाये तब तक एजेंसी का अधिकारी अभियोजक, सालियान से यह कहने की हिम्मत नहीं कर सकता कि इस मामले में नरमी बरती जाये.

 

उन्होंने एनआईए द्वारा कानूनी प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप पर भी चिंता जतायी.

 

पार्टी ने केन्द्र पर ‘‘आतंकवादियों’’ का बचाव करने के लिए एनआईए का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया.

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