तीन मुद्दों के सहारे मोदी को 'मात' देने मैदान में उतर रही है आम आदमी पार्टी

By: | Last Updated: Wednesday, 5 November 2014 8:40 AM
Manish Sisodia outlines AAP agenda in Delhi l Focus on ‘leaderless’ BJP

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा भंग होने के साथ ही चुनाव की तारीखों के एलान का इंतार शुरू हो चुका है लेकिन आम आदमी पार्टी किन मुद्दों को लेकर मैदान में उतरेगी इसकी तस्वीर धीरे धीरे साफ हो रही है.
 

एबीपी न्यूज़ से बातचीत में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसौदिया ने कहा है कि पार्टी दिल्ली में तीन मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी-

 

  1. दिल्ली नगर निगम में बीजेपी सात साल से है फिर भी चारों तरफ भ्रष्टाचार है. आम आदमी पार्टी 49 दिन के कार्यकाल की तुलना एमसीडी के 7 साल के कार्यकाल से करेगी. बीजेपी दिल्ली नगर निगम और केंद्र दोनों जगह सत्तारूढ़ है और दोनों जगह बीजेपी फेल हैं.
     

  2. आम आदमी पार्टी दिल्ली में जनता को अपने 49 दिन के सरकार और केंद्र में बीजेपी के 150 दिन की तुलना करेगी.
     

  3. आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी. लेकिन दिल्ली में बीजेपी का कोई चेहरा नहीं है.

 

आपको बता दें कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की ओर से जो होर्डिंग लगाए गए हैं उसमें बताया गया है कि मोदी सरकार के 150 दिन के कार्यकाल में महंगाई बढ़ी जबकि उनके 49 दिन के कार्यकाल में बिजली पानी के दाम कम हुए थे.

 

बीजेपी का पलटवार

 

49 दिन बनाम 150 को मुद्दा बनाने की तैयारी में जुटी आम आदमी पार्टी पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है. बीजेपी ने कहा है कि 49 दिन में केजरीवाल ने सिर्फ धरना प्रदर्शन किया और कुछ नहीं.

 

अब ये भी सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या केजरीवाल दिल्ली के दंगल में मोदी से नहीं टकराना चाहते हैं. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पार्टी एक ओर जहां मोदी सरकार के 150 दिन की तुलना अपने 49 दिन के कार्यकाल से करते हुए अपने कार्यकाल में बेहतर बताने की कोशिश कर रही थी वहीं बाद में अरविंद केजरीवाल ने जो ट्वीट किया है उसमें मोदी सरकार के 150 दिन का जिक्र नहीं है. बल्कि अपने 49 दिन के कार्यकाल की तुलना एमसीडी के 7 साल के कार्यकाल से की है. केजरीवाल ने अपने 49 दिन के कार्यकाल को बेहतर बताया है.

 

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव से 6 महीने पहले दिल्ली में विधानसभा का चुनाव हुआ था. उस चुनाव में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला लेकिन कांग्रेस के बाहरी समर्थन से अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में सरकार बना ली थी.

 

पिछले साल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 32 पर जीत मिली थी. बीजेपी-अकाली गठबंधन को 34 फीसदी वोट मिले थे. जबकि आप को 28 सीटें मिली थीं और 29 फीसदी वोट मिले थे. कांग्रेस 70 पर लड़कर सिर्फ आठ सीटें जीत सकी थी लेकिन वोट 25 फीसदी वोट मिले थे. 

 

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि दिल्ली की जनता किसके हक में अपना फैसला सुनाती है.

 

यहां देखें- संवाद्दाता सरोज सिंह से आप नेता मनीष सिसौदिया की बातचीत