मैं अब भी सीएम हूं, इस्तीफे का सवाल नहीं, नीतीश सत्ता के लोभी हैं: जीतन राम मांझी

By: | Last Updated: Sunday, 8 February 2015 1:21 PM

नई दिल्ली: बिहार में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद बिहार के सीएम जीतन राम मांझी ने कहा कि वो अब भी सीएम हैं और इस्तीफे का सवाल नहीं है.

 

 

बहुमत का दावा करने वाले जीतन राम मांझी ने अपने राजनीतिक ‘गुरू’ नीतीश कुमार को सत्ता का लोभी बताया. मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार सत्ता के बगैर नहीं रह सकते हैं और उनका असली चेहरा सामने आ गया है.

 

जीतन राम मांझी ने कहा, “पार्टी की तरफ से विधायक दल की बैठक बुलाना गैर कानूनी था. 20 तारीख को विधानसभा के फ्लोर पर तय होगा कि बिहार का सीएम कौन रहेगा. हम बहुमत साबित करेंगे. जो भी गरीब का हिमायती होगा हमारा समर्थन करेगा.”

 

नीतीश के खिलाफ बग़ावत की वजह बयान करते हुए मांझी ने कहा, “मुझे रबर स्टांप समझकर सीएम बनाया गया, हमने दो महीने तक नीतीश की बात मानी, लेकिन जब मीडिया ने रबर स्टांप कहा तो मेरा स्वाभिमान जागा. हमने खुद से काम करना शुरू किया तो उनके पेट में दर्द हुआ और अब नायाज़ तरीके से एक महादलित सीएम की कुर्सी छीनने की कोशिश की जा रही है.”

 

मांझी ने दावा किया कि वो 20 तारीख को बहुमत साबित कर देंगे.

 

बहुमत साबित करने के सवाल पर मांझी ने कहा, “विधानसभा के फ्लोर पर जो भी समर्थन देगा, उसका समर्थन लेंगे. अभी तक बीजेपी के समर्थन को लेकर बात नहीं हुई है.”

 

क्या है पूरा मामला

 

बिहार की राजनीति के क्लाईमेक्स की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब मांझी ने कैबिनेट के दो मंत्रियों ललन सिंह और पीके शाही को बर्खास्त की शुरुआत की. शनिवार को नीतीश समर्थक बीस मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था और बाकी आठ मंत्री मांझी के साथ हैं.

 

जेडीयू ने बिहार के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से मांग की है कि मांझी को बर्खास्त किया जाए. शनिवार को नीतीश को विधायक दल का नेता चुना गया था. नीतीश की ओर से जेडीयू, कांग्रेस और आरजेडी के नेता राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से मिलने पहुंचे थे. राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी पटना में मिले नहीं इसलिए उनके प्रधान सचिव को 130 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंपकर सभी नेता लौट आए.

 

नीतीश के साथ जेडीयू के 97 विधायक, 24 आरजेडी के और 5 कांग्रेस के हैं. शनिवार को जेडीयू विधायक दल की बैठक में भी 97 विधायक आए थे. ऐसा लगता है कि 13 विधायक मांझी के साथ हैं. हालांकि मांझी समर्थकों का दावा है कि सदन में विश्वासुमत आसानी से मिल जाएगा.

 

बिहार में बीजेपी के 87 विधायक हैं और कहा जा रहा है कि मांझी उन्हीं के सहारे बगावत की नाव पर सवार हैं और मांझी के मुताबिक उनकी नाव तो डूबेगी नहीं.

 

हालांकि मांझी सुबह दावा कर रहे थे और शाम तक स्पीकर ने नीतीश कुमार को विधायकदल के नेता के तौर पर मान्यता दे दी. इस बीच नीतीश समर्थक पूर्व मंत्री बीमा भारती ने आरोप लगाया है कि मांझी समर्थक मंत्री विनय बिहारी और नरेंद्र सिंह के विधायक बेटे सुमित सिंह ने मांझी को समर्थन देने के लिए धमकाया है. बीमा ने एफआईआर दर्ज करा दी है.

 

पिछले साल लोकसभा में मिली हार के बाद नीतीश ने मांझी को सत्ता सौंपी थी लेकिन पिछले तीन-चार महीने में मांझी ने सत्ता पूरी तरह अपने हाथ में ले ली थी जिससे नीतीश समर्थक मंत्री मांझी के खिलाफ खड़े हो गए और फिर शुरू हुआ बिहार में चुनाव से पहले सियासी हलचल का क्लाईमेक्स. अब ड्रामे के द एंड का इंतजार है.

 

क्या है संवैधानिक स्थिति?

 

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि जेडीयू विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद भी नीतीश कुमार तब तक मुख्यमंत्री नहीं बन सकते हैं, जबतक राज्यपाल जीतनराम मांझी को पद से नहीं हटाते हैं.

 

सुभाष कश्यप के मुताबिक संविधान में इसके नियम साफ हैं. या तो राज्यपाल विश्वास मत की मांग करे, या विधानसभा का कोई सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लाए या किसी वित्त विधेयक को जीतनराम मांझी सदन में पास नहीं करवा पाएं तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा या राज्यपाल उन्हें पद से हटा देंगे.

 

कुल मिलाकर गेंद अब राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के पाले में है. अब देखना ये है कि केशरीनाथ त्रिपाठी जीतनराम मांझी को विश्वास मत साबित करने का मौका देते हैं या फिर जेडीयू को बिहार विधानसभा में इसके लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने का रास्ता अख्तियार करना पड़ता है

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: manjhi
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017