कलाम को नहीं थी सोनिया को पीएम की शपथ दिलाने में झिझक: मनमोहन

By: | Last Updated: Wednesday, 29 July 2015 5:30 PM

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज इन आरोपों को ‘‘कोरी अफवाह’’ करार देते हुए खारिज कर दिया कि 2004 में संप्रग को लोकसभा चुनावों में मिली जीत के बाद दिवंगत राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाने को लेकर कोई झिझक थी.

 

एक न्यूज़ चैनल को दिए गए एक इंटरव्यू में सिंह ने कहा, ‘‘मेरा मानना है यह कोरी अफवाह फैलाई जा रही है . इसमें कोई सच्चाई नहीं है . कलाम ने कभी इस बात पर सवाल नहीं उठाए कि जो शख्स शपथ लेगा, वह कौन होगा .’’

 

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘वह (कि कौन प्रधानमंत्री होगा) बहुमत का समर्थन पाने का दावा करने वाली पार्टी या व्यक्ति का विशेषाधिकार था, चाहे कोई भी हो . (सोनिया गांधी के बारे में) जो भी कहा गया, मेरा मानना है कि वह सच नहीं है . यह कोरी अफवाह फैलाई जा रही है कि उन्हें श्रीमती गांधी को शपथ दिलाने को लेकर झिझक थी…..मेरी मौजूदगी में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई .’’

 

इंटरनेट पर इस बारे में चल रही अटकलों, कि कलाम ने सोनिया के पासपोर्ट एवं अन्य ब्योरों के बारे में पूछा था, के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, ‘‘यह सब बकवास है .’’

 

सिंह ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाने वाले कलाम सरकार गठन को लेकर उस वक्त कांग्रेस पार्टी और संप्रग में चल रहे घटनाक्रमों से वाकिफ थे . कलाम के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए सिंह ने कहा कि जब दोनों अपने पद पर थे, उस वक्त दोनों के संबंध बहुत अच्छे थे .

 

सिंह ने कहा, ‘‘उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मैंने उनका काफी आदर किया . यह एक ऐसा संबंध था जिसका सबसे ज्यादा लाभ मुझे मिला .’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति के तौर पर वह एक अच्छे मित्र, सलाहकार और मार्गदर्शक थे . मैंने उनके साथ काफी अच्छा वक्त बिताया, शायद इसलिए कि हम एक जैसी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के थे .’’ भारत-अमेरिका परमाणु करार पर समाजवादी पार्टी को राजी करने का श्रेय सिंह ने कलाम को दिया . सपा पहले इस करार का विरोध कर रही थी .

 

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने सपा नेतृत्व को सुझाव दिया था कि वह इस मुद्दे पर कलाम से मिले और उनसे मिलने के बाद पार्टी ने करार का समर्थन करने का फैसला किया .

 

सिंह ने कहा कि कहा कि संसद में परमाणु करार का पारित होना सुनिश्चित करने में कलाम ने ‘‘बड़ी भूमिका’’ निभाई थी .

 

यह पूछे जाने पर कि क्या कलाम राष्ट्रपति पद संभालने के कुछ ही दिन बाद अगस्त 2002 में गुजरात दौरे पर जाना चाहते थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस पर झिझक रहे थे, इस पर सिंह ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया .

 

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री वाजपेयी और राष्ट्रपति के बीच गुजरात दंगों को लेकर हुई बातचीत के बारे में मुझे जानकारी नहीं है . लेकिन सांप्रदायिक सद्भाव हमारे पवित्र गणराज्य के मूल सिद्धांतों में से एक है और उन्होंने मुझसे इसके बारे में बात की थी और कहा था कि इस धरोहर को बचा कर रखना है .’’ यह पूछे जाने पर कि क्या कलाम सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर काफी चिंतित थे, इस पर सिंह ने कहा, ‘‘यह सही बात है .’’

 

पूर्व प्रधानमंत्री ने इस बारे में ब्योरा साझा नहीं किया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा बिहार विधानसभा को भंग किए जाने के फैसले को पलट दिए जाने के बाद कलाम इस्तीफा देना चाह रहे थे, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना किया . बिहार विधानसभा 2005 में भंग की गई थी .

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Web Title: Manmohan Singh_
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