'मन की बात' के तीन साल पूरे, पीएम बोले- ये मेरे नहीं देश के मन की बात

'मन की बात' के तीन साल पूरे, पीएम बोले- ये मेरे नहीं देश के मन की बात

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज मन की बात कार्यक्रम को तीन साल पूरे हो गए. ये मन की बात का 36वां संस्करण है. ये मेरे मन की बात नहीं है ये देशवासियों के मन की बात है.

By: | Updated: 24 Sep 2017 12:25 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उनके मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' ने समाज के हर वर्ग को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसके जरिए देशभर से मिलने वाले सुझावों से शासन में सुधार लाने में मदद मिलती है


मोदी ने कार्यक्रम के 36वें संस्करण में कहा, "मन की बात के लिए मुझे बहुत ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलती है. हमने इस कार्यक्रम के तीन साल पूरे कर लिए हैं. स्वभाविक रूप से मैं सभी का उल्लेख नहीं कर सकता, लेकिन इससे मिलने वाली प्रतिक्रियाओं से हमें सरकार चलाने में मदद मिलती है."


प्रधानमंत्री ने कहा, "स्वच्छता ही सेवा अभियान के लिए कुछ लोग परिणाम लाने के लिए काम कर रहे हैं. श्रीनगर में 18 साल के बिलाल डार को नगर निगम ने स्वच्छता अभियान का ब्रैंड एंबेस्डर बनाया है. बिलाल डार पिछले कई सालों से बिना किसी लालच के डल झील को साफ करने का काम कर रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक बिलाल हर साल झील से करीब 12,000 किलो कचरा निकालते हैं.''


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''अक्तूबर का महीना खास है. महात्मा गांधी से लेकर सरदार पटेल तक अक्तूबर में जन्म लिया. 2 अक्तूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है. 11 अक्तूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जयंती है. इसके साथ ही हम दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती मना रहे हैं.''


प्रधानमंत्री ने कहा, ''इन नेताओं ने देश के लिए कष्ट झेले हैं. सभी महापुरुषों का केंद्र बिंदु देश था. देश के लिए कुछ करना, इनके लिये मात्र उपदेश ही नहीं था बल्कि इन्होंने अपने जीवन के द्वारा देश के लिए कुछ कर के दिखलाया. उन्होंने कहा कि इनमें से कई महापुरुष सत्ता के गलियारों से दूर रहे हैं और सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय में लगे रहे. नाना जी देशमुख ने राजनीति छोड़कर लोगों की सेवा की. दीन दयाल जी भी समाज के आखिरी व्यक्ति के जीवन में बदलाव के लिए प्रयासरत थे.''


प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मौसम में लोग घूमने निकलते हैं. हमारे देश में कई लोग विदेशों में ही घूमने जाते हैं. हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है. आप विदेश जाएं ठीक है, लेकिन भारत में देखने के लिए बहुत कुछ हैं. पहले आप देश को समझ लें.


उन्होंने कहा ‘‘ देश के महापुरुषों ने पहले देश को घूमा, उसे समझा. पर्यटन में मूल्यवर्द्धन तब होगा जब हम विद्यार्थी के तौर पर घूमेंगे.’’ प्रधानमंत्री ने कहा ‘‘500 से ज्यादा जिलों में मैं गया हूं. 450 से ज्यादा में मैं रुका हूं.’’ मोदी ने कहा कि विविधता में एकता केवल नारा नहीं है बल्कि यह भारत की अपार शक्ति का भंडार है, इसे अनुभव करें.


उन्होंने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना इसमें निहित है. उन्होंने कहा कि अलग अलग जगह अलग अलग खानपान है. भारत को अपने भीतर आत्मसात कीजिए. इन अनुभवों से आपका जीवन समृद्ध होगा.

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