बोट पर सवार लोगों के इरादे नेक नहीं थे: रक्षा मंत्री

By: | Last Updated: Monday, 5 January 2015 4:39 PM
Manohar Parrikar

नई दिल्ली: समंदर में पाकिस्तान की बोट पर हो रही राजनीति के बीच रक्षा मंत्री का अहम बयान आया है. मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि बोट पर सवार लोगों के इरादे नेक नहीं थे. दिन में भी पर्रिकर ने शक जताया था कि बोट पर आतंकी होने का शक है. अगर बोट पर तस्कर होते तो पाक की एजेंसी के संपर्क में नहीं होते. उन्होंने ये भी कहा कि बोट का रास्ता भी मछुआरों वाला नहीं था.

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रक्षा मंत्री ने नया बयान दिया है कि सवार लोगों के इरादे नेक नहीं थे. बोट में सवार लोग सरेंडर कर सकते थे. पाकिस्तानी अधिकारियों से बातचीत हो रही थी. बोट में क्या था, मालूम नहीं. ये मामला तस्करी का नहीं है. 

 

उन्होंने कहा कि अगर तस्कर होते तो घिर जाने पर खुद को खत्म नहीं करते और न ही पाकिस्तानी एजेंसियों से उनका संपर्क होता .मनोहर पर्रिकर ने कहा कि पाकिस्तानी बोट से आत्मघाती हमला किए जाने की आशंका थी. ऐसे में भारतीय कोस्टगार्ड इससे बेहतर कार्रवाई नहीं कर सकते थे.

 

पर्रिकर ने आज चार थ्योरी पेश की है-

1. पर्रिकर ने कहा कि नौका न तो मछली पकड़ने के क्षेत्र में थी और न ही ऐसे व्यस्त मार्ग पर थी जिसे तस्कर पसंद करते हैं तथा उनके कार्यों से ऐसा संकेत मिलता है कि वे ‘किसी अन्य तरह की गतिविधि के लिए थे. हम सुनिश्चित नहीं हैं कि वह अन्य तरह की गतिविधि क्या है.’

 

2. तस्कर होते तो पाक की मैरी टाइम एजेंसी के संपर्क में नहीं होते.

 

3. पर्रिकर ने कहा कि बोट पर अगर ड्रग तस्कर होते तो वे खुदकुशी नहीं करते बल्कि सरेंडर कर देते या फिर ड्रग फेंक देते.

 

4.  पर्रिकर ने कहा कि वह उन्हें ‘संदिग्ध या संभावित आतंकी’ करार देते हैं क्योंकि उन्होंने घेराबंदी किये जाने पर खुद को उड़ा लिया. उन्होंने कहा कि वे (नौका पर सवार) पाकिस्तान के नौवहन अधिकारियों, सेना और अंतरराष्ट्रीय सम्पर्क से जुड़े थे.

 

पाकिस्तान के ड्रग माफिया की बोट थी- इंडियन एक्सप्रेस

पाकिस्तान में हो रही जांच के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट दी है कि पाकिस्तान की जांच में ये पता चला है कि भारतीय कोस्ट गार्ड के ऑपरेशन के समय जिस बोट को आग लगाकर नष्ट किया गया था वो पाकिस्तान के ड्रग माफिया का हो सकता है.

 

इंडियन एक्सप्रेस ने चार बड़े सवाल खड़े किए हैं-

फिशिंग बोट के करीब कोस्ट गार्ड का जहाज आसानी से पहुंच सकता था जबकि एक घंटे का वक्त लगा?

बोट में विस्फोटक होते तो परखच्चे उड़ जाते जबकि नाव के निचले हिस्से से आग उठ रही थी?

खराब मौसम की वजह से कोस्ट कुछ बरामद नहीं कर सकी जबकि मौसम विभाग के मुताबिक तब आसमान साफ था?

एनटीआरओ को मिली सूचना कोस्टगार्ड से साझा की जबकि खुफिया सूत्रों को जानकारी देने का नियम है?

 

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