सरकार मनरेगा की ‘समीक्षा’ करने का मन बना चुकी है

By: | Last Updated: Thursday, 16 October 2014 4:10 PM

नई दिल्ली: कुछ हलकों से आपत्तियों के बावजूद केंद्र पूर्व संप्रग सरकार की महती योजना मनरेगा की ‘पूर्ण समीक्षा’ करने का मन बना चुका है और उसका तर्क है कि इसे ‘‘विशुद्ध रूप से दलीय उद्देश्यों के लिए फायदा लेने की अनुमति दी गई.’’ ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस योजना की समीक्षा करने की अपनी योजनाओं के आज कारण गिनाए और सुझाव दिया कि इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रिय परियोजना कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ा जा सकता है.

 

मंत्रालय द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि इसमें ‘‘सामूहिक रूप से सुविचारित विकास परियोजनाओं की काफी कमी रही जिससे गांव की जरूरतों और इस योजना के तहत की गई गतिविधियों के बीच कोई तालमेल ही नहीं था.’’ मनरेगा पर विभिन्न अध्ययनों और सीएजी की रिपोर्ट के उद्धरणों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा, ‘‘स्वतंत्र संगठनों और लोगों से योजना की पूरी समीक्षा कराए जाने की अविलंब आवश्यकता है. अनिवार्य रूप से उन लोगों से ऐसा कराने की आवश्यकता है जो ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजनाओं से कभी जुड़े नहीं रहे हैं.’’ नितिन गडकरी नीत ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा तैयार नोट में कहा गया है, ‘‘जब तक अत्यंत संभावित हितों का नेटवर्क नहीं तोड़ा जाता है तब तक असली तस्वीर नहीं उभरकर आएगी.’’

 

सरकार ने कहा, ‘‘आसानी से धन हासिल करने और राजनैतिक दल के प्रचार के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल करने पर तभी रोक लगायी जा सकती है जब सही और बिना पूर्वाग्रह वाले लोगों की टीम से मनरेगा में सुधार के सवाल पर गौर करने को कहा जाए.’’ नोट में कहा गया है, ‘‘कैग रिपोर्ट और आलोचनात्मक अध्ययनों के उद्धरणों को जब उस सरकार द्वारा बुलाए गए सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया तो यह आंखें खोलने वाली थी. इन रपटों का विरले ही ग्रामीण विकास मंत्रालय के दस्तावेजों में उल्लेख मिलता है.’’ सरकार ने अपने रख को तब दोहराया है जब दो दिन पहले कई अग्रणी अर्थशास्त्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के प्रावधानों को हल्का नहीं करने का अनुरोध किया था. यह कानून लाखों गरीबों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है.

 

हालांकि, मंत्रालय ने कहा कि यह योजना के लिए जरूरी है कि गांवों को बेरोजगारी मुक्त करने के लिए उसे लोकप्रिय आंदोलन में तब्दील कर दिया जाए.

 

मंत्रालय ने कहा, ‘‘हमारा गांव-हमारा रोजगार–हमारा विकास या इसी तरह का नारा ग्रामीणों को अपने गांव के लिए सामूहिक दृष्टि विकसित करने के लिए योजना का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित कर सकता है और इस प्रक्रिया में बेरोजगारी का पूरी तरह उन्मूलन किया जा सकता है.’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘जब तक इस भावना को पूरी तरह समाहित नहीं किया जाता तब तक योजना एक अन्य सरकारी कार्यक्रम बनी रहेगी जहां धन बांटा जाता रहेगा. चूंकि आसानी से धन मिल जाता है इसलिए सभी भागीदार एजेंसियां और व्यक्ति उससे निजी लाभ लेने में कुछ भी गलत नहीं पाते हैं.’’

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Web Title: manrega
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