अस्पतालों में इलाज, स्कूलों में पढ़ाई ठप, हर तरफ कूड़ा ही कूड़ा, टीचर भी गए हड़ताल पर

By: | Last Updated: Monday, 1 February 2016 1:00 PM
MCD strike enters 6th day: Teachers also went on strike

नई दिल्ली : दिल्ली में हड़ताल से हाहाकार मचा है. छह दिनों से जारी नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से जगह-जगह गंदगी और कूड़ा फैला हुआ. शनिवार से ही एमसीडी के सात अस्पतालों और सभी डिस्पेंसरी के डॉक्टर और नर्स हड़ताल पर हैं.

एमसीडी के अस्पतालों में सिर्फ़ इमरजेंसी सेवायें दी जा रही हैं. आज से एमसीडी स्कूल के टीचर भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं.

हड़ताल की वजह से स्कूलों में पढ़ाई ठप है, तो अस्पतालों में इलाज में रुकाव है, सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही दी जा रही है. शहर में तरह तरफ कूड़ा ही कूड़ा है.

झगड़ा क्या है?

एमसीडी कह रहा है कि पैसा बकाया है लेकिन सरकार कह रही है कि हम तो 12 महीने का पैसा पहले ही दे चुके हैं. इस झगड़े की वजह से दिल्ली कूड़े के ढेर पर बैठी हुई है. दिल्ली सरकार और नगर निगम के बीच वो झगड़ा क्या है ये समझने की कोशिश करते हैं?

झगड़े की इस कहानी में तीन किरदार हैं

पहला दिल्ली सरकार, दूसरा दिल्ली के तीनों नगर निगम और तीसरा इन दोनों की लड़ाई में सबसे ज्यादा परेशान होने वाला वो सफाई कर्मचारी जिसे 4 महीनों से वेतन नहीं मिल रहा.

बात पूरी समझ आए इसलिए ये जान लीजिए कि साल 2012 में तब की शीला सरकार ने नगर निगम का तीन टुकड़ों में बंटवारा कर दिया था. और तीनों निगम पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है.

दिल्ली सरकार कहती है कि निगम को पैसे दिए जा चुके हैं जबकि दिल्ली नगर निगम कह रही है कि दिल्ली सरकार पर उनका करोड़ों बकाया है. एमसीडी को पैसे मिल तो रहे हैं लेकिन वो पूरे नहीं पड़ रहे कैसे वो समझिए?

पहला पेंच

जब साल 2012-13 में दिल्ली सरकार का बजट 36 हजार करोड़ था. तब दिल्ली नगर निगम के लिए 3128 करोड़ यानि दस फीसदी के आसपास पैसा दिया गया. साल 2015-16 में दिल्ली सरकार का बजट 41 हजार 129 करोड़ हो चुका है. लेकिन एमसीडी को 2457 करोड़ दिए गए यानी करीब छह फीसदी के आसपास मतलब दिल्ली सरकार का बजट तो बढ़ा लेकिन एमसीडी का नहीं.

दूसरा पेंच

दिल्ली नगर निगम की शिकायत है कि उन्हें टैक्स से होने वाली कमाई में उनका तय हिस्सा नहीं दिया जा रहा है. एमसीडी के मुताबिक कुल टैक्स में साढ़े 10 फीसदी एमसीडी को दिया जाना था. एक तो वो नहीं मिलता दूसरा उसी हिस्से में डेढ़ फीसदी म्यूनिसपल रिफॉर्म कर दिया गया लेकिन वो पैसा भी उन्हें नहीं दिया जा रहा.

तीनों एमसीडी जब अपना बजट तैयार करती है तो उसमें तीसरे वित आयोग के पैसे, ग्लोबल टैक्स और म्यूनिसिपल रिफॉर्म के पैसे को भी जोडती है लेकिन एमसीडी के मुताबिक दिल्ली सरकार इन सबको दर किनार कर अपने हिसाब से बजट तैयार कर पैसे देती है. जो नियम और जरूरत दोनों के लिहाज से बहुत कम है.

एमसीडी के मुताबिक दिल्ली सरकार से तीसरे वित आयोग के 2,970 करोड़ रुपए मिलने है जो अब तक नहीं मिले है. जबकि दिल्ली सरकार का दावा है कि एक भी पैसा बकाया नहीं है.

मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली नगर निगम द्वारा लिए गए पहले के 6000 करोड़ रुपए पर ना तो दिल्ली सरकार ने इस साल कोई ब्याज लिया है ना ही पैसे मांगे है.

तीसरा पेंच

बंटवारे के वक्त शीला सरकार ने कहा था कि वित्तीय घाटे में दिल्ली सरकार निगम की मदद करेगी. जो नहीं हो रही. तीनों नगर निगम की वित्तीय हालत काफी बुरी है पूर्वी और उत्तरी निगम ज्यादा खस्ताहाल हैं क्योंकि उन्हें दक्षिणी दिल्ली की तरह उतना प्रॉपर्टी टैक्स नहीं मिलता. लेकिन दिल्ली सरकार खराब हालत के लिए एमसीडी को ही जिम्मेदार मानती है.

दिल्ली सरकार और एमसीडी दोनों अपना-अपना राग अलाप रहे हैं लेकिन पिस रहे हैं वो सफाई कर्मचारी जिनके घर का खर्चा नहीं चल रहा और दिल्लीवासी जिनके घर के सामने से कूड़ा नहीं उठ रहा.

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Web Title: MCD strike enters 6th day: Teachers also went on strike
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