चिकित्सा शोध में पिछड़ रहा भारत: मोदी

By: | Last Updated: Monday, 20 October 2014 11:05 AM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत चिकित्सा के क्षेत्र में शोध के मामले में पिछड़ रहा है. इस दिशा में और काम किए जाने की जरूरत है. मोदी ने भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के 42वें दीक्षांत समारोह में कहा, “भारत चिकित्सा के क्षेत्र में शोध के मामले में पिछड़ रहा है और इस दिशा में काफी कुछ किए जाने की जरूरत है. हमें शोध, विशेषकर केस हिस्ट्री पर ध्यान देने की जरूरत है. यह मानवता के लिए बड़ा योगदान होगा.”

 

उन्होंने कहा, “शोध के लिए चिकित्सकों को उन मरीजों का रिकॉर्ड रखना चाहिए, जिनका इलाज हो रहा है. ऐसे रिकॉर्ड को बराबर संभाल कर रखा जाना चाहिए.” मोदी ने हालांकि, कहा कि भारतीय चिकित्सकों को विश्वभर में सम्मान मिलता है.

 

प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट सुनी गई, जहां चिकित्सक और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी मौजूद थे. उनके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन भी मौजूद थे. इस दौरान 500 से अधिक छात्र-छात्राओं को मेडिकल की डिग्री दी गई.

 

अच्छे चिकित्सकों के गुण के संबंध में प्रधानमंत्री ने कहा, “अच्छे चिकित्सक वे होते है, जो खुद को मरीज से जोड़ कर रखते हैं और न कि सिर्फ रोग से. वे मरीजों में विश्वास पैदा करने की कोशिश करते हैं.”

 

उन्होंने कहा कि चिकित्सक जो सलाह मरीजों को देते हैं उन्हें खुद उसका पालन करना चाहिए. तभी मरीज चिकित्सकों को गंभीरता से लेते हैं.

 

मोदी ने कहा, “उदाहरणस्वरूप, यदि आप कैंसर रोग का उपचार करने वाले चिकित्सक हैं और आप धूम्रपान करते हैं तो लोगों को लगेगा कि देखो, चिकित्सक स्वयं धूम्रपान करते हैं तो इसका मतलब है कि यह हानिकारक नहीं है.” उन्होंने दीक्षांत समारोह में विशेष अतिथियों को आमंत्रित करने का सुझाव दिया.

 

मोदी ने कहा, “क्या हम दीक्षांत समारोह में विशेष अतिथियों को बुलाने की परंपरा शुरू कर सकते हैं? विशेष अतिथि से मेरा मतलब गांव के आठवीं-नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों से है. उन्हें आमंत्रित करना चाहिए, ताकि वे दुनिया को देख सकें.”

 

सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मोदी ने कहा, “यह विद्यार्थियों के बीच उत्सुकता पैदा करेगा, उन्हें सपना देखने में मदद करेगा, जिसका बड़ा प्रभाव होगा.”

 

उन्होंने संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने अंदर के छात्र को हमेशा जिंदा रखें. प्रधानमंत्री ने कहा, “क्या आपको लगता है कि यहां आपका छात्र जीवन समाप्त हो गया? ज्ञान और सीखने की ललक कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए.”

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि एम्स में आप बेहद सुरक्षित थे. यहां आपकी मदद के लिए वरिष्ठ छात्रों से लेकर शिक्षक हर कोई मौजूद था. लेकिन अब आप बड़ी कक्षाओं में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां आपको अपने फैसले खुद लेने होंगे.

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