महज साढ़े तीन महीनों में बदले इस सियासी रंग की असली वजह क्या है?

महज साढ़े तीन महीनों में बदले इस सियासी रंग की असली वजह क्या है?

बस उसी गुस्से को देखते हुए पीएम ने जीएसटी पर अपने नये बयान से नया सियासी रंग भरा है.

By: | Updated: 16 Oct 2017 09:36 PM
नई दिल्ली:  राजनीति के भी अजीब रंग हैं. कभी जिसे गाजे बाजे के साथ ऐतिहासिक फैसला और पल बताने की कोशिश थी, आज वोट बैंक ने विपक्ष को भागीदार बना दिया.

दिन 30 जून 2017, वक्त-मध्य रात्रि, जगह-संसद भवन का सेंट्रल हॉल
समारोह- 17 अप्रत्यक्ष करों और 23 सेस से आजादी. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ बटन दबाकर जीएसटी को लॉन्च किया.

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'जो लोग आशंकाएं करते हैं मैं उनसे कहूंगा ऐसा ना करें. जब आप अपने डॉक्टर से नंबर लेकर नया चश्मा बनवाते हैं तब भी कुछ दिन आंखों को दिक्कत होती है. जीएसटी से होने वाली परेशानी भी ऐसी ही होगी.'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'जीएसटी सिर्फ एक टैक्स सुधार नहीं है, ये आर्थिक सुधार से आगे ईमानदारी की दिशा में आगे ले जाने वाला सुधार है. कानून भले ही इसे गुड्स एंड सर्विस टैक्स कहता हो लेकिन मैं इसे ‘गुड और सिंपल’ टैक्स मानता हूं.'

दिन 16 अक्टूबर, वक्त-शाम करीब 5 बजे, जगह-गुजरात की राजधानी गांधीनगर

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस जीएसटी को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है जबकि जीएसटी के फैसले में कांग्रेस सरकार वाले राज्यों की भी रजामंदी है. ‘गुजरात गौरव महासम्मेलन’को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने विकास, जीएसटी और नोटबंदी को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. जहां नोटबंदी और विकास को लेकर पीएम आक्रामक रूख अख्तियार करते दिखे वहीं जीएसटी पर आज सियासी तौर पर बैकफुट पर दिखे. हालांकि जीएसटी में बदलाव के संकेत कंपनी सेक्रेटरीज के कार्यक्रम में ही पीएम ने दे दिये थे. फिर उन्हीं बदलाव के संकेतों को जीएसटी काउंसिल ने अमल में लाया. जीएसटी के तहत कई तरह की छूटों की घोषणा की गई. उन छूटों में छोटे और मझोले व्यापारियों का खास ख्याल रखा गया. इसके बावजूद जिस गाजे बाजे के साथ जीएसटी को अपनी सरकार की सफलता का पैमाना बताया जा रहा था उसे आज कांग्रेस सरकारों की भागीदारी से जोड़ दिया गया. अब सवाल यह कि क्या जीएसटी की वजह से परेशान व्यापारियों की नाराजगी का असर है? डिटेल खबर यहां पढ़ें

जीएसटी लागू होने के बाद से ही पूरे देश में छोटे और मझोले व्यापारी आंदोलनरत थे. सूरत से लेकर महाराष्ट्र तक में इसका व्यापक असर दिख रहा था. व्यापारियों के मुताबिक नोटबंदी से टूटी कमर अब मरणासन्न हो गई थी. नोटबंदी तो सियासी फायदे नुकसान के धरातल पर बीजेपी के लिए फायदा साबित हुआ. लेकिन गहरी सियासी समझ रखने वाले पीएम मोदी को जीएसटी से व्यापारियों का उमड़ रहा गुस्सा साफ दिखने लगा है. इसका असर है आज का यह बयान कि जीएसटी के लिए कांग्रेस भी भागीदार है. बीजेपी के कोर वोट बैंक रहे व्यापारियों का गुस्सा होना गुजरात चुनाव के लिए शुभ संकेत नहीं है. यह पीएम मोदी खूब समझ रहे हैं. गांधीनगर में गरजे पीएम मोदी, बोले- ‘कांग्रेस ने मुझे जेल भेजने के लिए अमित शाह को जेल भेजा’

सूरत में छोटे व्यापारी कह रहे हैं कि जो समय कपड़ा बनाने में, व्यापारी को कपड़ा दिखाने में और ऑर्डर लेने में लगाना चाहिए वो समय कंप्यूटर के रिकॉर्ड देखने में और जीएसटी का रिटर्न भरने में जाता है. पहले कपड़ा मार्केट बहुत खुशहाल था. पूरा सूरत खुशहाल था, लेकिन अब त्राहि-त्राहि मची हुई है. कपड़ा मार्केट एकदम से बिखर गया है और लोग यहां से निकलना चाहते हैं. ये धंधा बंद करके लोग दूसरे धंधे में जाना चाहते हैं. यह दर्द व्यापारियों का है जिसका चुनाव पर असर दिखना स्वभाविक था.. बस उसी गुस्से को देखते हुए पीएम ने जीएसटी पर अपने नये बयान से नया सियासी रंग भरा है. अपनी तरकश के इन 5 'तीरों' से पीएम मोदी ने किया कांग्रेस को 'घायल'

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