बांदीपुरा में शहीद हुए कमांडो मिलिंद किशोर को अंतिम विदाई, जानें क्या होते हैं गरुड़ कमांडो?

बांदीपुरा में शहीद हुए कमांडो मिलिंद किशोर को अंतिम विदाई, जानें क्या होते हैं गरुड़ कमांडो?

इस साल अब तक सुरक्षाबलों ने 169 आतंकियों को मार गिराया है, वहीं 61 से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं. पाकिस्तान की तरफ से इस साल अब तक 600 से ज्यादा बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ है.

By: | Updated: 12 Oct 2017 09:53 PM

चंडीगढ़: जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा में शहीद हुए गरुड़ कमांडो मिलिंद किशोर को चंडीगढ़ में एयरफोर्स ने राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी. मिलिंद किशोर साल 2002 में एयरफोर्स में भर्ती हुए थे और वह चंडीगढ़ में तैनात थे. वह महाराष्ट्र के रहने वाले थे.


मिलिंद स्पेशल ट्रेनिंग के लिए जम्मू-कश्मीर में थे, जहां बांदीपुरा में आतंकियों से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गए. मिलिंद अपने पीछे दो मासूम बेटियों और पत्नी को छोड़ गए हैं. पत्नी और दोनों बेटियों के साथ मिलिंद चंडीगढ़ में रहते थे. एयरफोर्स ने अपने शहीद जवानों को राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी.


 


इस साल अब तक सुरक्षाबलों ने 169 आतंकियों को मार गिराया है, वहीं 61 से ज्यादा वान शहीद हो चुके हैं.  पाकिस्तान की तरफ से इस साल अब तक 600 से ज्यादा बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ है.


कौन होते हैं गरुड़ कमांडो ?


गरुड़ कमांडो एयरफोर्स की स्पेशल यूनिट होती है.  देश में केवल 1500 गरुड़ कमांडोज हैं. ये बेहद खास होते हैं. गरुड़ कमांडो हवा और जमीन दोनों जगह युद्ध में माहिर होते हैं. गरुड़ कमांडो यूनिट की स्थापना साल 2004 में हुई थी.


कमांडो यूनिट इजराइल के स्पेशल 'शालडाग' कमांडो की तर्ज पर काम करते हैं. नेवी के मार्कोस और सेना के पैरा कमांडो इन्हें ट्रेनिंग देते हैं. एक साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद एक गरुड़ कमांडो तैयार होता है.

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