Minister's 'Change Constitution' Comment Provokes Anger In Parliament अनंत हेगड़े के विवादित बयान पर राज्यसभा में हंगामा, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

अनंत हेगड़े के विवादित बयान पर राज्यसभा में हंगामा, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

अनंत कुमार हेगड़े ने कर्नाटक के कोप्पल जिले में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि खुद को सेक्युलर और बुद्धिजीवी मानने वाले नहीं जानते कि उनके मां-बाप कौन हैं?

By: | Updated: 27 Dec 2017 01:32 PM
Minister’s ‘Change Constitution’ Comment Provokes Anger In Parliament

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े के कथित विवादित बयान के विरोध में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही आज एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. हंगामे की वजह से सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल दोनों नहीं हो पाये. विपक्ष ने अनंत कुमार हेगड़े का इस्तीफा मांगा है.


कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री हेगड़े के कथित विवादित बयान का विरोध कर रहे विपक्षी सदस्यों ने उन पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.


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सदन में हंगामा उस समय शुरू हुआ जब आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के क्रम में सभापति एम वेंकैया नायडू ने हेगड़े का नाम पुकारा. इसी दौरान विपक्षी सदस्यों ने उनके बयान का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया.


सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा ‘‘अभी तक हमें एक बयान पर स्पष्टीकरण नहीं मिला और दूसरा बयान आ गया.’’ आजाद ने सत्ता पक्ष की ओर संकेत करते हुए कहा कि वहां से आए दिन बयान आते रहते हैं. उन्होंने कहा कि मंत्री ने जो बयान दिया है उस पर उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए.


उन्होंने कहा ‘‘अभी मंत्री सदन में उपस्थित हैं, इसलिए उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए. वह कुछ ही देर में सदन से चले जाएंगे.’’ आजाद को रोकते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि सदन में नोटिस दिए बिना किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं की जा सकती.


इस पर आजाद ने कहा ‘‘...जो मंत्री भारत के संविधान पर विश्वास नहीं करता, उसे मंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.’’ इसी बीच हेगड़े सदन से बाहर चले गए. तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय और सपा के नरेश अग्रवाल ने भी व्यवस्था के प्रश्न के तहत यह मुद्दा उठाया.


राय ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना की भावना का उल्लंघन कतई नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि वह इस बारे में आसन से स्पष्ट व्यवस्था चाहते हैं कि क्या ऐसे व्यक्ति को मंत्री पद पर बने रहने का हक है जो संविधान का पालन नहीं करता. उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का जिक्र संविधान की प्रस्तावना में है. क्या एक मंत्री को संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन करने का हक है.


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