मोदी का डबल धमाका!

By: | Last Updated: Sunday, 19 October 2014 4:56 PM

नई दिल्ली : जोशीला लहजा, इमोशन में लिपटी हुए जुबान और सधा हुआ बॉलीवुड का अंदाज. नरेंद्र मोदी की डॉयलॉग डिलेवरी हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन की याद दिलाती है. बड़ी-बडी बातों और मुद्दों को बेहद आसान शब्दों में जनता तक पहुंचाने की मोदी की महारत ही उन्हें दूसरे नेताओं से आगे ले जाती है. तमतमाए चेहरे के साथ जब नरेंद्र मोदी मंच पर प्रकट होते हैं तो टीवी के कैमरे उनके चेहरे के भावों को लोगों के और नजदीक पहुंचा देते हैं. हाथों के इशारे. चहरे पर तेजी से बदलते भाव और उनकी भाषा का ठेठ देसी अंदाज सुनने वालों के जहन पर सीधी चोट करता है लेकिन मोदी की ये चोट क्या महाराष्ट्र औऱ हरियाणा में भी वोट में तब्दील होगी. ये वो सवाल था जिसके जवाब का पूरे देश को बेसब्री से इंतजार था और खुद नरेंद्र मोदी का दिल भी इन दो राज्यों में बहुमत के लिए बेकरार था.

 

महाराष्ट्र के महासंग्राम में एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे तो दूसरी तरफ कांग्रेस औऱ एनसीपी जैसे विरोधी दल. महाराष्ट्र की इस चुनावी जंग में मोदी के खिलाफ सीना ताने शिवसेना भी खड़ी थी. लेकिन चुनाव के इस चक्रव्यूह में नरेंद्र मोदी ने अपने सारे विरोधियों को चारों खाने चित्त कर दिया है.  

 

मिशन महाराष्ट्र पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी बिसात पर विरोधी दलों को ढेर कर दिया है. दरअसल महाराष्ट्र औऱ हरियाणा के चुनाव में बीजेपी ने जो जीत हासिल की है. उसकी तैयारी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने महीनों पहले ही शुरु कर दी थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अमेरिका दौरे से वापस लौटे तो उन्होंने इस चुनावी जंग में अपनी पूरी ताकत झोंक दी.

 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बीजेपी के लिए भी मसीहा बन चुके हैं क्योंकि महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों में बीजेपी पूरी तरह से नरेंद्र मोदी के करिश्में पर ही उम्मीद लगाए बैठी थी. औऱ मोदी लहर के बूते ही महाराष्ट्र में बीजेपी ने अपने दम पर अकेले लड़ते हुए . सीटें हासिल की औऱ पहली बार राज्य में सबसे बडी पार्टी के तौर पर उभरी है वहीं हरियाणा में 48 सीटें जीत कर पहली बार बीजेपी ने अपने दम पर बहुमत भी हासिल किया है. जाहिर है बीजेपी की इस जीत के पीछे मोदी मैजिक को ही बड़ी वजह माना जा रहा है.  महाराष्ट्र और हरियाणा का चुनाव खुद नरेंद्र मोदी के लिए भी बेहद अहम बन गया था क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा का ये चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए भी पहली बड़ी परीक्षा थी ऐसे में इस जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक ताकत औऱ ज्यादा बढेगी. 

 

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन कहते हैं कि मोदी ऐसे लीडर के तौर पर उभरेंगे जो इंदिरा गांधी के बाद से इस मुल्क में किसी और ने नहीं देखा है और पार्टी संगठन सबकुछ उनकी मर्जी पर चलेगा . और अभी जैसा पांच महीने में दिखा है उससे भी ज्यादा उनका अपना फैसला सब जगह लगना शुरू हो जाएगा. और फिर शायद हम राजनीति के नए दौर में होंगे. यहां सिर्फ मोदी का राज नहीं होगा सारे गठबंधन की सियासत खत्म हो जाएगी. जो माना जा रहा था हिंदुस्तानी संगठन से राजनीति का एक मेल है वो चीजें खत्म होगी और मोदी नए तरह से पॉलिटिक्स करेंगे.

 

 

महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी की जीत के लिए सबसे बड़ा फैक्टर मोदी मैजिक को माना जा रहा है. लेकिन राजनीति के जानकार मानते हैं कि इन दोनों राज्य में बीजेपी की जीत के ग्राफ में जो बेतहाश बढोतरी हुई है उसके लिए कुछ और अहम फैक्टर भी जिम्मेदार हैं. 

 

वरिष्ठ पत्रकार जयंतो घोषाल ने कहा है कि मुझे लगता है की नरेंद्र मोदी बहुत बड़ा फैक्टर है क्योंकि दो महीने में मोदी लहर खत्म नहीं हुआ तो चुनाव का नतीजा जो हुआ है उसमे नरेंद्र मोदी का रोल आपको मानना ही पड़ेगा. मतलब नरेंद्र मोदी के लिए जो रोल है वो पॉजिटिव रोल ही है. और नरेंद्र मोदी अगर ना होते तो रिजलट और खराब होते लेकिन इस बार जो रिस्क लिया गया है. वो सिर्फ नरेंद्र मोदी नहीं पूरी पार्टी, संघ परिवार सब एक साथ मिलकर एक स्ट्रेटजी दिए हैं. बीजेपी अपने बल पर कम से कम एक कोशिश करे की जहां पर मराठी मानुष का जो आईडिएनटिटी है. वो भी बीजेपी उनके लिए लड़े जो पहले शिवसेना का आईडिएनटिटी था . तो इसीलिए ये जो चुनाव का नतीजा इसमें सिर्फ नरेंद्र मोदी के लिए जीत, नरेंद्र मोदी के लिए हार ये जो थ्योरी से मैं इसके साथ सहमत नहीं हूं.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए महाराष्ट्र में बीजेपी की जीत इस मायने में भी अहम है कि महाराष्ट्र देश का एक ऐसा बड़ा राज्य है जहां कांग्रेस की सरकार बाकी बची थी. यहीं नहीं महाराष्ट्र कभी भी बीजेपी का गढ नहीं रहा है बीजेपी राज्य में शिवसेना की जूनियर सहयोगी की हैसियत से ही अभी तक चुनाव लड़ती रही है ऐसे में महाराष्ट्र में अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ने की वजह से भी नरेंद्र मोदी की साख दांव पर लगी थी. जानकार मानते हैं कि महाराष्ट्र औऱ हरियाणा की इस जीत के बाद अब पार्टी औऱ सरकार में मोदी विरोध की बची संभावनाएं भी पूरी तरह से खत्म जाएंगी.

 

वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई ने कहा है कि नरेंद्र मोदी का राजनीतिक जो है दिल दोगुना रात चौगुना तरक्की कर रहा है. उनका एक ग्राफ राजनीतिक स्तर पर बढ़ गया है . जैसा इंदिरा गांधी का जो हुआ था की उनका कहना था की आई एऩ द ईशू. जिस तरीके से नरेंद्र मोदी जो हैं वो ही हैज द इशू. जो वो कहते हैं पूरे रानीतिक दल उनके पीछे लगे हैं लेकिन कोई उनको डाऊन नहीं कर पा रहा. जो आज वो कह रहे हैं लोग उसको मान रहे हैं, जो सपने दिखा रहे हैं उसको लोग सोच रहे हैं वो सपने साकार भी करेंगे. ये भाजपा और नरेंद्र मोदी का सुनहरा दौर है.

 

 

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का चुनावी प्रदर्शन पूरी तरह नरेंद्र मोदी पर ही निर्भर था. क्योंकि वो बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव में बीजेपी ने मुख्यमंत्री के तौर पर किसी को प्रोजेक्ट नहीं किया था इसीलिए इन चुनावों में चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही बनाया गया था. ये एक तरह का नया प्रयोग बीजेपी ने किया था. ताकि आगे होने वाले जम्मू कश्मीर, झारखंड और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में मोदी लहर का माहौल बनाए रखा जा सके. 

 

राजनीतिक विश्लेषक कंचन गुप्ता ने कहा कि अगले जो चुनाव आएंगे उसके लिए एक टैंपो बन जाता है. दूसरा है राज्यसभा में आगे जाकर जो चुनाव होंगे उसमें आप अपने उम्मीदवार को ले आ सकते हैं. इसकी जरुरत इसलिए है क्योंकि लोकसभा में भाजपा के पास अपना बहुमत है. लेकिन राज्यसभा में नही है. कुछ ऐसे बिल हो सकते हैं जो पास करवाने में दिक्कत आए और इसलिए राज्यसभा में अपना बहुमत होना जरुरी है.

 

जयंतो घोषाल ने बताया कि ये जो नंबर वन नरेंद्र मोदी,  नंबर 2 अमित शाह मैं इसको एक कम्बो बोलता हूं इसके उपर डिपेंडेंस ऑन दिस टू कैरेक्टर जिस पर नरेंद्र मोदी लीड कर रहे हैं पूरी पार्टी को रैली करना पड़ेगा. संघ परिवार से लेकर अभी आपको मानना पड़ेगा तो अभी ये चलेगा इसके मोमेंटम से बाकी कश्मीर और बाकी जहां राज्य में तमिलनाडू, बंगाल में जो चुनाव आ रहा है वो मोमेंटम को भी यूज करने का मौका मिलेगा.

 

 

हरियाणा औऱ महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों से साफ है कि अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है. लेकिन केंद्र में अपनी सरकार को मुस्तैदी से चलाने के लिए ये जरुरी है कि बीजेपी की ज्यादा राज्यों में सरकारे बने ताकि संसद के उपरी सदन यानी राज्यसभा में बीजेपी के ज्चादा सांसद पहुंच सके. यही वजह है कि हरियाणा और महाराष्ट्र की जीत के बाद अब मोदी की नजरें पश्चिम बंगाल, झारखंड औऱ जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों के चुनावों पर भी टिकेंगी. उन राज्यों पर भी प्रधानमंत्री मोदी की खास नजर होंगी जहां क्षेत्रीय दलों का राज है और फिलहाल यहां सत्ता में बैठी पार्टियां एनडीए के खिलाफ है. फिलहाल तो महाराष्ट्र और हरियाणा की जीत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के हौसले और बुलंद कर दिए हैं.

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