ABP स्पेशल: अदाणी के SBI लोन पर क्यों घिरे मोदी?

By: | Last Updated: Thursday, 20 November 2014 4:20 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जाने माने उद्योगपति गौतम अदाणी की करीबी की कहानी एक बार फिर कांग्रेस की जुबान पर आ गई है. चुनाव से पहले कांग्रेस टॉफी वाली दोस्ती का जिक्र करती थी और अब आरोप है ऑस्ट्रेलिया में कोयले की खान के लिए पैसे खराब करने का. कांग्रेस का आरोप है कि जब देश में कोयले की कमी नहीं है तो अदाणी को विदेश में कोयला खान चलाने के लिए देश के सरकारी बैंक का पैसा क्यों फंसाया जा रहा है.

 

एक बार फिर चर्चा में हैं कारोबारी गौतम अदाणी चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि अदाणी के इस कारोबार के लिए भारत के एक सरकारी बैंक ने भारी भरकम कर्ज दे दिया है.

 

पीएम मोदी पर कांग्रेस का हमला

 

कांग्रेस पूछ रही है कि आखिर सरकारी बैंक ने क्यों दिया है अदाणी को कर्ज.

 

इस तस्वीर को लेकर मोदी चर्चा में हैं. तस्वीर में बैठे हैं अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी,  इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद हैं और इसी तस्वीर में मौजूद हैं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य, जो बाकायदा पीएम की मौजूदगी में गौतम अदाणी के साथ कर्ज के कागजातों यानी एमओयू पर दस्तखत करने के लिए मौजूद हैं.

 

कांग्रेस अब इसी तस्वीर को लेकर अदाणी और मोदी की करीबी पर निशाना साध रही है.

 

कांग्रेस का आरोप है कि जन धन योजना से मिले पैसों को बड़े उद्योगपतियों को लोन के तौर पर दिया जा रहा है. कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा है कि एक ओर तो कोयला मंत्री ये कहते हैं कि देश का पैसा विदेशों में जा रहा है इसलिए विदेशों से कोयला मंगाना हम बंद करने वाले हैं दूसरी ओर अदानी ग्रुप को स्टेट बैंक से 6200 सौ करोड़ का कर्ज दिया जा रहा है.

 

कांग्रेस के इस इल्जाम के पीछे की कहानी जान लीजिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान जो बड़े कारोबारी समझौते हुए उसमें से एक बड़ा समझौता अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने किया. इस समझौते के मुताबिक अदाणी अब ऑस्ट्रेलिया के क्लेरमांट शहर में कारमाइकल कोयला खान से कोयला निकालेंगे. विवाद की वजह ये है कि इसके लिए उन्हें कर्ज की जरूरत थी और इसे मंजूरी दी है भारत का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने. कर्ज की रकम है छह हजार दो सौ करोड़ रुपये.

 

इकोनॉमिक टाइम्स में 28 अगस्त 2014 को छपी रिपोर्ट के मुताबिक “लिंक एनर्जी ये एलान करती है कि उसने अदाणी ग्रुप के साथ कारमाइकल खान को करार किया है और अदाणी इस सौदे के लिए 80 करोड़ रुपये की रॉयल्टी अदा करेंगे.”

 

यानी जिस कारमाइकल सौदे का जिक्र कांग्रेस कर रही है उसका करार साल अगस्त महीने में ही हो गया था. मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सिर्फ इतना हुआ की उसी खान को चलाने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ 6 हजार 200 करोड़ रुपये के कर्ज पर दस्तखत किए गए.

 

इसी पर पूछ रही है कांग्रेस सवाल कि जब देश के बिजली मंत्री पीयूष गोयल दावा कर रहे हैं कि देश में कोयले की कमी नहीं है और भारत अगले दो साल में कोयले का इंपोर्ट बंद कर देगा तो अदाणी विदेश में कोयला खान चलाने और उससे भारत में बिजली बनाने को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है.

 

कांग्रेस ने अदाणी और मोदी की करीबी को एक बार फिर मुद्दा बनाया है. इतना ही नहीं इस सौदे को लेकर कांग्रेस ने स्टेट बैंक ऑफ इँडिया के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं.

 

जवाब में बीजेपी ने कहा है कि किसी को कर्ज देना या ना देना बैंक का काम है और सरकार इसमें दखल नहीं देती.

 

दरअसल कांग्रेस ने बैंक के फैसले पर जो सवाल उठाए हैं उसके पीछे है अदाणी ग्रुप की कमाई के आंकड़े.

 

कमाई के आंकड़े

 

अपने भी कभी लोन लेते वक्त बैंक के कागजातों पर किए होंगे दस्तखत और इससे पहले बैंक ने आपकी आमदनी ठोंक बजाकर परखा होगा और आपको बता दिया होगा कि आपकी ईएमआई कमाई से ज्यादा नहीं हो सकती. लेकिन अदाणी के मामले में यही है विवाद की जड़.

 

दरअसल बैंक फैसला लेते हैं इंटरेस्ट कवरेज रेशियो पर. यानी आमदनी और कर्ज चुकाने के लिए जरूरी रकम का अनुपात. अदाणी के मामले में जिस 1.5 इंटरेस्ट कवरेज रेशियो की बात हो रही है.  वो असल में एक मानक है जिसके आधार पर बैंक लोन देते हैं. 1.5 या डेढ गुना के ब्याज रेशियो को मोटे तौर पर ऐसे समझिये कि अगर किसी को कर्ज पर 100 रुपये का ब्याज चुकाना हो तो उस का मुनाफा कम-अस-कम डेढ गुना यानी 150 रुपये से ज्यादा होना चाहिए. नहीं तो बैंक लोन नहीं देते. क्योंक ब्याज चुकाने के ही पैसे न हों तो कोई धंधा कैसे करेगा और मूल कैसे चुकाएगा?

 

अब विश्लेशकों के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में अदाणी की कंपनी का मुनाफा रहा लगभग 9,000 करोड़ रुपये. और कर्ज पर ब्याज चुकाया लगभग 5,700 करोड़ रुपये. यानी ब्याज रेशियो बैठा 1.57 जो 1.5 से कोई बहुत ज्यादा नहीं. यानी अदाणी की कंपनी को मुनाफे में से हर 100 रुपये ब्याज चुकाने के बाद 57 रुपये ही बचते हैं. औऱ ये तो एक साल का आंकड़ा है. हाल के दिनों में तो ब्याज का बोझ औऱ बढ़ता जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक जुलाई अगस्त औऱ सितंबर के तीन महीनों में कंपनी का इंटरेस्ट कवरेज रेशियो गिरकर 1.12 पर आ गया है. यानी मुनाफे में से हर 100 रुपये ब्याज चुकाने पर सिर्फ 12 रुपये ही बच रहे हैं. उसमें कंपनी नहाएगी क्या औऱ निचोड़ेगी क्या?

 

हालांकि अदाणी ग्रुप ने वेबसाइट पर अपने कारोबार की खूबियां अदाणी ग्रुप ने खुद ही गिना दी हैं.

 

इस प्रोजेक्ट में भारत और विदेशों से प्राइवेट और सार्वजनिक क्षेत्र के फाइनेंसर रुचि ले रहे हैं उससे 10 हजार नौकरियां और ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड को 136 हजार करोड़ रुपये टैक्स मिलेगा. भारत को अदाणी ग्रुप का ये प्रोजेक्ट सस्ती दर पर बिजली मुहैया करवाएगा.

 

दूसरी तरफ एसबीआई प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्य ने भी कहा है कि अभी अदाणी को कर्ज नहीं दिया गया है और आखिरी फैसला बाकी है.

 

अरुंधती भट्टाचार्य कहती हैं, “हमने क्वींसलैंड की सरकार से बात की है. उन्होंने पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी दे दी है. अभी तक सिर्फ MoU साइन किया गया है. अब सारी औपतारिकताएं पूरी की जाएंगी और एसबीआई बोर्ड आखिरी फैसला लेगा.”

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Web Title: modi adani and sbi loan
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