राज्यसभा में सरकार को उठानी पड़ी शर्मिन्दगी

By: | Last Updated: Tuesday, 3 March 2015 5:05 PM
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नई दिल्ली: सरकार के लिए आज राज्यसभा में उस समय शर्मिन्दगी की स्थिति उत्पन्न हो गई जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर भ्रष्टाचार एवं कालाधन के मुद्दे पर विपक्ष के एक संशोधन को उच्च सदन में मंजूर कर लिया गया. हालांकि प्रधानमंत्री ने कॉरपोरेट समर्थक होने तथा भूमि विधेयक में किसान समर्थक किसी भी प्रावधान को हल्का करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आबादी कवरेज को घटाने के किसी फैसले से भी इंकार करते हुए कहा कि यह ‘‘कपोल कल्पना’’ प्रचारित नहीं की जानी चाहिए.

 

काला धन के मुद्दे पर मोदी ने कांग्रेस को निशाना बनाते हुए कहा कि उसकी सरकार ने विशेष जांच दल का गठन ही नहीं किया क्योंकि यह किसी को बचाने का प्रयास था. उन्होंने संप्रग सरकार की योजनाओं की नकल किए जाने के आरोपों पर कहा कि खुद कांग्रेस सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की योजनाओं की नकल की थी.

 

राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है और उच्च सदन में आज उसके लिए तब गहरी शर्मिन्दगी की स्थिति उत्पन्न हो गई जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधन को सदन ने मंजूरी प्रदान कर दी.

 

माकपा सदस्यों सीताराम येचुरी और पी राजीव ने यह संशोधन पेश किया था. सदन ने मत विभाजन के बाद इसे मंजूर कर लिया. इसके पहले सरकार ने विपक्ष से अपील की थी कि वह अपना संशोधन वापस ले और मत विभाजन पर जोर नहीं दे.

 

संशोधन को 57 के मुकाबले 118 मतों से मंजूर कर लिया गया. राज्यसभा के इतिहास में यह चौथा मौका है जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधन को सदन ने मंजूरी प्रदान की है.. पहली बार जनता पार्टी के शासन काल में 30 जनवरी 1980 को ऐसा हुआ था. उसके बाद 1989 में ऐसा हुआ जब वीपी सिंह नीत राष्ट्रीय मोर्चा सरकार थी. तीसरी बार 12 मार्च 2001 को ऐसा हुआ था जब अटल बिहारी वाजपेयी नीत राजग सरकार सत्ता में थी.

 

संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने येचुरी को संशोधन पर जोर नहीं देने का अनुरोध किया और कहा कि कालाधन का जिक्र किया गया है. उन्होंने कहा कि उनकी चिंताओं को नोट किया गया है और इसलिए इसे वापस ले लेना चाहिए.

 

नायडू ने येचुरी को संशोधन पर जोर देने से रोकने की कोशिश की और कहा कि सरकार काला धन लाने का प्रयास कर रही है और इस मुद्दे पर कोई दो राय नहीं है.

 

उन्होंने येचुरी से अनुरोध किया, ‘‘आपको अधिकार है. आपकी चिंताओं को समझा जा सकता है.. लेकिन आप मत विभाजन पर जोर नहीं दीजिए.’’ लेकिन येचुरी ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति में वह सहमत हो जाते. उन्होंेने कहा कि वह संशोधन पर जोर दे रहे हैं क्योंकि सरकार ने कोई चारा नहीं छोड़ा है और विपक्ष को प्रधानमंत्री के जवाब पर स्पष्टीकरण मांगने का मौका नहीं दिया गया. उन्होंेने कहा, ‘‘ यहां तक कि विपक्ष के नेता को भी मौका नहीं दिया गया…’’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपना जवाब देने के तुरंत बाद सदन से बाहर जाने पर भी आपत्ति जतायी.

 

संशोधन में कहा गया है कि अभिभाषण में उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार पर काबू पाने और कालाधन वापस लाए जाने के मामले में सरकार की नाकामी का कोई जिक्र नहीं किया गया है. ताजा घटनाक्रम ने इस बात को रेखांकित किया कि सरकार को अपने प्रमुख आर्थिक सुधार विधेयकों को उच्च सदन से पारित कराने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. हंगामे के बीच कांग्रेस के रामचंद्र राव ने अपने स्थान पर खडे होकर एक बैनर दिखाया. इस पर सभापति हामिद अंसारी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें सदस्य को बाहर जाने को कहने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. बाद में राव मान गए और अपनी सीट पर बैठ गए.

 

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि जहां तक स्पष्टीकरण का सवाल है, इसके लिए कभी अनुमति नहीं दी गयी. इस पर येचुरी ने जवाब दिया कि एक सदस्य के नाते उन्हें अपने अधिकार के बारे में जानकारी है.

 

अंसारी ने कहा कि अगर सदस्य मत विभाजन पर जोर देते हैं तो आसन इंकार नहीं कर सकता.

 

इससे पहले, राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मोदी ने विपक्ष के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि उनकी सरकार कारपोरेट समर्थक है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने जनधन योजना, स्वच्छ भारत, मृदा स्वास्थ्य कार्ड से लेकर सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय और सबके लिए आवास जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं. ‘‘क्या इन कार्यक्रमों से अमीरों को लाभ होगा या गरीबों को ?’’

 

विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक में बदलाव के लिए सहमत होने का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को जमीन के मुआवजे के प्रावधान में ‘सूत’ भर बदलाव नहीं किया गया है और अगर इसमें किसानों के खिलाफ एक भी चीज है तो वह उसे बदलने को तैयार है. प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के जवाब के दौरान भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विपक्ष से सहयोग की अपील की जहां सत्तारूढ गठबंधन के पास बहुमत नहीं है.

 

मोदी ने कहा, ‘‘यह वरिष्ठजनों का सदन है और भूमि अधिग्रहण विधेयक के बारे में कई चिंताएं व्यक्त की गई. मैं प्रथम दिन से कहता रहा हूं कि इसमें कोई कमियां हैं तो उसे ठीक कर लें. अगर कोई कमियां हैं तो (हम) जरूरी सुधार करने को तैयार हैं. ’’ उन्होंने कहा कि पिछले विधेयक में भी हमने सहयोग दिया था. अगर वह अच्छा था तब हमें उसका श्रेय नहीं दें. लेकिन कोई कमियां हैं तो उस ‘पाप’ के भागीदार हम भी हैं. पिछले कानून में जमीन मिलने का प्रावधान प्रभावी नहीं था, ऐसे में स्कूल, रक्षा प्रतिष्ठान आदि के विकास कार्यो को कैसे आगे बढाया जाता.

 

मोदी ने कहा, ‘‘किसानों के खिलाफ एक भी चीज है तो मैं उसे बदलने के लिए तैयार हूं. अगर कोई कमियां हैं तो इसे मिलकर दूर करें और इसे पास करें.’’ उन्होंने यह भी कहा कि संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान पारित खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर भी दुष्प्रचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा ‘‘सरकार ने इस योजना के तहत कवरेज आबादी 67 फीसदी से घटाने का कोई फैसला नहीं किया है. इसे 40 फीसदी नहीं किया जा रहा है. ऐसा दुष्प्रचार मत कीजिये.’’ काले धन के मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि पूर्ववती सरकार ने वर्ष 2011 में विशेष जांच दल का गठन नहीं किया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यह किसी को बचाने का प्रयास था.

 

काले धन के खिलाफ कार्रवाई करने के नाम पर धमकाने के सरकार पर लगे कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए मोदी ने ‘आपातकाल’ की याद करते हुए कहा कि उससे बड़ा खतरा क्या हो सकता है.

 

उन्होंने कहा कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्हें जेल भेज देने की धमकियां दी जाती थीं.

 

एक घंटे से अधिक लंबे भाषण में मोदी ने संप्रग सरकार के कार्यकाल की योजनाओं के साथ तुलना करते हुए इस आलोचना को नकार दिया कि नौ माह में उनकी सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया जो नजर आए.

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