लैंड बिल में मोदी सरकार कर सकती है पांच बड़े बदलाव: सूत्र

By: | Last Updated: Wednesday, 22 July 2015 4:46 PM
modi government on landbill

फाइल फोटो

नई दिल्ली: क्या मोदी सरकार विवादास्पद ज़मीन अधिग्रहण बिल को लेकर विपक्ष के दबाव के आगे झुक गई है और इसमें बदलाव के लिए मन बना रही है ? सूत्रों की मानें तो जो कुछ मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक से पहले हुआ उससे तो यही लगता है. मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में बिल को बदलाव को लेकर चर्चा प्रस्तावित थी लेकिन ऐन वक्त पर उसे टाल दिया गया.

 

उच्च पदस्थ सूत्रों ने एबीपी न्यूज़ को बताया है कि पीएमओ की तरफ से मंगलवार को ही ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वो ज़मीन बिल में बदलाव की तैयारी शुरू करें. पीएमओ की तरफ से यहां तक कहा गया कि बिल को लेकर विपक्षी दलों की ज्यादातर मांगों को मान लिया जाए.  सूत्रों के मुताबिक़ जल्दी जल्दी में कैबिनेट नोट भी तैयार कर लिया गया और उसे मंगलवार रात हुई कैबिनेट बैठक के एजेंडे में शामिल भी कर लिया गया.

 

सूत्रों के मुताबिक सरकार बिल में पांच संशोधन करने पर विचार कर सकती है. जो बदलाव सुझाए गए उनमें सबसे अहम ये है कि राज्य सरकारों को अपना कानून बनाने की आजादी दे दी जाए. इस बात का इशारा पीएम ने नीति आयोग की बैठक में भी दिया था. इसके अलावा जिन पांच क्षेत्रों को सहमति वाले नियम से अलग रखा गया है उसमें से ‘ औद्योगिक कॉरिडोर ‘ को बाहर निकाल दिया जाए. 

 

इसका मतलब ये हुआ कि औद्योगिक कॉरिडोर के लिए ज़मीन अधिगृहित करना हो तो लोगों से सहमति लेनी ज़रूरी होगी और उसका सामाजिक प्रभाव आकलन भी करना होगा.  लेकिन सूत्रों के मुताबिक़ ऐन वक्त में इस विषय को कैबिनेट की बैठक में चर्चा के लिए नहीं लाने का फ़ैसला कर लिया गया.

 

दो दिनों पहले ही केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने इस बात के साफ़ संकेत दिए थे कि सरकार इस मसले पर नया बिल ला सकती है. हालांकि ये बात समझ से परे है कि अगर संसद की संयुक्त समिति इस बिल की समीक्षा कर रही है और उसे 3 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देनी है तो फिर सरकार अचानक बिल में बदलाव करने की क्यों सोंचने लगी है.

 

एक तर्क तो ये है कि न सिर्फ मोदी सरकार के विरोधी बल्कि आरएसएस से जुड़े किसान और मज़दूर संगठन और स्वदेशी जागरण मंच ने भी ज़मीन अधिग्रहण क़ानून में किए जा रहे दूरगामी बदलावों का विरोध किया है. विरोधियों के अलावा शिवसेना , अकाली दल जैसी एनडीए सहयोगियों ने भी नए बिल के कई प्रस्तावों पर अपनी आपत्ति जताई है. कांग्रेस और तमाम विरोधी तो विरोध कर ही रहे हैं. राहुल गांधी ने तो यहां तक चुनौती दे दी है कि वो सरकार को एक इंच ज़मीन भी अधिगृहित नहीं करने देंगे.

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