पेरिस में बोले PM मोदी- 2030 तक भारत कार्बन में करेगा 35 फीसदी तक कटौती

By: | Last Updated: Tuesday, 1 December 2015 2:15 AM
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पेरिस/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ मिलकर  अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का शुभारंभ किया और विकसित तथा विकासशील देशों को साथ लाने वाली इस पहल के लिए भारत की ओर से तीन करोड़ डालर की सहायता का भी वादा किया.

 

मोदी ने इसके साथ ही ऐलान किया कि भारत हरियाणा के गुड़गांव में राष्ट्रीय सौर उर्जा संस्थान के परिसरों में इस पहल की मेजबानी करेगा.

 

पेरिस के जलवायु सम्मेलन में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत कम कार्बन छोड़ने की हर कोशिश कर रहा है, विकसित देशों को बड़ी जिम्मेदारी लेनी होगी. पेरिस के जलवायु सम्मेलन में कई देशों ने की ज्यादा कार्बन छोड़ने वाले देशों पर टैक्स लगाने की मांग की. पेरिस में चल रहे जलवायु सम्मेलन में पीएम मोदी की पहल पर सौ देशों ने मिलकर सोलर अलायंस बनाया. सौर उर्जा को बढ़ावा देने के लिए 180 करोड़ रुपये की राशि देने का भी एलान किया.

 

उन्होंने कहा कि भारत इस पहल के तहत सचिवालयी ढांचागत निर्माण के लिए करीब तीन करोड़ डालर का योगदान देगा और अगले पांच साल के लिए इसके संचालन को मदद मुहैया कराएगा.

 

उन्होने कहा, ‘‘ हम पांच साल के लिए संचालन का समर्थन करेंगे और मिलकर अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दीर्घावधि कोष जुटाएंगे.’’ मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की शुरूआत के मौके पर कहा, ‘‘ यह एक ऐसा गठबंधन है जो विकसित और विकासशील देशों , सरकारों और उद्योगों , प्रयोगशालाओं तथा संस्थानों को एक साझा उपक्रम में एकसाथ लाता है.’’ इस पहल को 100 से अधिक देशों के समर्थन से शुरू किए जाने के मौके पर मोदी ने कहा, ‘‘ आज के दिन नयी उम्मीदों का सूर्योदय हुआ है… न केवल स्वच्छ उर्जा के लिए बल्कि उन गांवों और घरों के लिए भी जो अभी तक अंधेरे में हैं… और हमारी सुबहों तथा शामों के लिए भी जिनमें सूर्य का तेज स्पष्ट नजर आता है.’’ मोदी ने कहा कि विकासशील विश्व अरबों लोगों को समृद्धि की ओर ले जा रहा है और ऐसे में इस ग्रह के लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद एक साहसिक वैश्विक पहल पर टिकी है.

 

प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक देशों को पर्याप्त ‘कार्बन स्पेस’ तो छोड़ना ही होगा ताकि विकासशील देश तरक्की कर सकें . उन्होंने कहा, ‘‘ यही प्राकृतिक जलवायु न्याय’’ है. ओलांद ने प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे बदलाव की मिसाल बताया.

 

मोदी ने कहा, ‘‘ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का जो सपना मैंने लंबे समय से संजोया हुआ था , राष्ट्रपति ओलांद ने तुरंत आगे आकर उसका समर्थन किया.’’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी प्रधानमंत्री मोदी की पहल की सराहना करते हुए कहा, ‘‘ मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल का स्वागत करता हूं. संयुक्त राष्ट्र इसे सफल बनाने के लिए काम करेगा.’’ सौर उर्जा के महत्व को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय परंपरा में , सूर्य सभी प्रकार की उर्जाओं का स्रोत है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ जैसा कि रिग्वेद कहता है , सूर्य भगवान सभी प्राणियों, चर और अचर की आत्मा है . भारत में बहुत से लोग सूर्य नमस्कार के साथ अपने दिन की शुरूआत करते हैं .’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ आज , जब उर्जा के स्रोतों और औद्योगिक युग की ज्यादतियों ने हमारे ग्रह को संकट में डाल दिया है तो विश्व को हमारे भविष्य को रौशन करने के लिए सूर्य की शरण में जाना चाहिए.’’ मोदी ने विशेष रूप से कहा कि भारत के पास 4 गीगावाट की क्षमता है और उसने वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट सौर उर्जा जोड़ने का लक्ष्य रखा है. ‘‘अगले साल की समाप्ति तक हम 12 गीगावाट जोड़ चुके होंगे .’’ सौर गठबंधन का विचार मोदी ने ही पिछले महीने भारत. अफ्रीका फोरम शिखर वार्ता के दौरान पेश किया था.

 

पेरिस सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर यहां आए मोदी ने अपने भाषण की शुरूआत फ्रांसीसी लोगों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए की और कहा कि ‘‘मुश्किल घड़ी ’’ में विश्व की शानदार तरीके से मेजबानी करने के लिए भारत दिल की गहराइयों से फ्रांस की सराहना करता है . प्रकृति के संबंध में उद्धरणों वाली एक किताब की प्रस्तावना मोदी और ओलांद ने संयुक्त रूप से लिखी है. इस किताब को भी इस मौके पर जारी किया गया. प्रधानमंत्री ने अपनी किताब ‘कन्वीनिएंट एक्शन’’ का नया संस्करण फा्रंसीसी राष्ट्रपति को समर्पित किया है.

 

मोदी ने कहा, ‘‘ उनके साथ प्रस्तावना का सह लेखक बनकर मैं सम्मानित हुआ हूं. ’’ उन्होंने साथ ही कहा, ‘‘ प्राचीन समय से ही विभिन्न सभ्यताओं ने सूर्य को विशेष स्थान दिया है.’’ मोदी ने आधुनिक देशों से विकास के लिए विकासशील देशों की खातिर पर्याप्त कार्बन स्पेस छोड़ने का आह्वान किया और कहा कि इससे विकास का एक ऐसा रास्ता बनेगा जिस पर कार्बन फुटप्रिंट कम होंगे.

 

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और उर्जा के बीच सम्मिलन से हमारा भविष्य परिभाषित होना चाहिए. बहुसंख्यक मानवता को बारहों मास सूर्य की भरपूर रौशनी का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. फिर भी , बहुत से उर्जा स्रोत के बिना भी हैं. इसीलिए यह गठबंधन इतना महत्वपूर्ण है.’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘हम सौर उर्जा को अपनी जिंदगियों और अपने घरों में लाना चाहते हैं , इसे सस्ता बनाकर, अधिक भरोसेमंद बनाकर और ग्रिड से आसानी से जोड़कर . हम शोध और नवोन्मेष में सहयोग करेंगे. हम ज्ञान को साझा करेंगे तथा सर्वश्रेष्ठ कार्यो का आदान प्रदान करेंगे.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘हम सौर क्षेत्र में निवेश को आकषिर्त करेंगे , संयुक्त उद्यम को प्रोत्साहन देंगे और नवोन्मेषी वित्तीय प्रणालियां विकसित करेंगे. हम नवीकरणीय उर्जा के संबंध में अन्य अंतरराष्ट्रीय पहलों के साथ भागीदारी करेंगे.’’ मोदी ने कहा, ‘‘ मुझे उद्योग जगत की प्रतिक्रिया से खुशी है. इससे बेहिसाब आर्थिक अवसर पैदा होंगे जो इस सदी की नयी अर्थव्यवस्था की आधारशिला बनेंगे.’’

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